Wednesday, January 23, 2008

कभी कभी मेरे दिल में


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है
कि जैसे interest rate गिराया गया है मेरे लिए
तू अबसे पहले हज़ारों में बिक रही थी कहीं
तूझे cheaper बनाया गया है मेरे लिए
कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है

कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है
कि ये crash, ये correction मेरी किस्मत है
ये collapsing prices हैं मेरी खातिर
ये volatality और ये uncertainty मेरी किस्मत है
कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है

कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है
कि जैसे तू 'डिविडेंड' देती रहेंगी उम्र भर यूंही
बड़ेगी तेरी 'शेयर प्राईस' यूंही
मैं जानता हूं कि तू 'शेयर' है मगर यूंही
कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है (3)

कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है
कि जैसे मिल गया IPO कौड़ियों में कहीं
दो trades में ही मालामाल हो गया हूं मैं
सिमट रही है तमाम दौलत मेरे खाते में
कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है

दिल्ली
24 जनवरी 2008
(साहिर से क्षमायाचना सहित)

अमरीका के लिए #3 कुछ इस तरह है:

कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है
कि जैसे तू split होती रहेंगी उम्र भर यूंही
बड़ेगी तेरी earnings per share यूंही
मैं जानता हूं कि तू dot-com है मगर यूंही
कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है

Monday, January 21, 2008

देश, डिश और दिशा


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

शहर शहर
गांव गांव
जिधर देखा
नज़र आई
देश की दयनीय दशा

गली गली
नगर नगर
दिशाहीन देश में
डिश ही नज़र आई
जिसे मिल रही है सही दिशा

शहर शहर
गांव गांव
अग्रसर है घोर निशा

इधर उधर
यहाँ वहाँ
मारे मारे फ़िरते युवा
रोशनी की जगह मिले
अंधा कर दे ऐसा धुआ

डगर डगर
नहर नहर
हाथ मलें रगड़ रग़ड़
छूटे नहीं मैल मगर
जब वहीं सर चढ़े
चित्त हो बड़े बड़े
हावी है इस कदर
दौलत का नशा
बस्ती बस्ती
कस्बा कस्बा

दिल्ली
19 जनवरी 2008

देश की मिट्टी


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

देश की मिट्टी, मिट्टी नहीं धूल है
गुल सारे गुल हैं बचे बस शूल हैं

पास होते ही दूर चले जाओ
सीखा रहा हर एक स्कूल है

गांव से शहर, शहर से देश
जो न जा सके वो कहलाता fool है

कल कल करती थी कल गंगा जहाँ
आज वहाँ बहता हुआ cesspool है

दिशाहीन हैं सारे देश के युवा
Dish tv जिन के लिए educational tool है

कुर्सी के ईर्द-गिर्द डोलते नेता
राजनीति के तालाब में तैरते stool हैं

आज़ादी से पहले Divide and rule था
आज़ादी से आज तक कायम dynasty rule है

हर गली गूंचे में कई सारे मंदिर है
पर पर-पैसों की दक्षिणा पर पंडित करता drool है

परिस्थितिया सारी हो रही प्रतिकूल हैं
कुल मिलाकर India का scene नहीं cool है

दिल्ली
19 जनवरी 2008

अमर प्रेम


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

जब जब तुम से मिलने आता हूं
तो सोचता हूं
तुम न मिलो तो ही अच्छा है
जब जब तुम से मिलता हूं
तो सोचता हूं
तुम जुदा न हो तो ही अच्छा है

मैं इतने दिनों तक
हैरान था
परेशान था
कि तुम ने मुझे स्वीकारा नहीं
तो क्यूं ठुकराया भी नहीं?

अब समझ में आया कि
असली प्यार तो वही है
जिसमें चाहत अभी बाकी है

तुम मुझसे मिलती रहना
मगर मेरी हरगिज़ न बनना

अब समझ में आया कि
असली प्यार तो वही है
जो वर्जित है

तुम मुझसे मिलती रहना
मगर वैध रिश्ता हरगिज़ न बनाना

सच तो यहीं है कि
प्रेमी-प्रेमिका के मिलाप के साथ ही
अक्सर प्रेम कहानी खत्म हो जाती है

तुम स्वीकारती
तो चाहत खत्म हो जाती
तुम ठुकराती
तो नफ़रत हो जाती
ये आग जो लगी हुई है
इसे बनाए रखना
शांत कर के
इसे राख हरगिज़ न होने देना

मैं चोरी-छुपे
सब के सामने
तुम से मिलता रहूंगा
तुम्हे निहारता रहूंगा
तुम्हे चाहता रहूंगा

पर कभी नहीं कहूंगा
कि तुम बहुत सुंदर हो
कि तुम मेरे दिल में बसी हो
कि मुझे तुम से प्यार है

क्यूंकि जो बात हम कह नहीं पाते
वो दिल, दिमाग और ज़ुबान पर
हमेशा रहती है

अगर कह दिया तो
भूल जाउंगा कि कभी
मैंने तुम से ये कहा था

न कहू तो
हमेशा याद रहेगा कि कभी
मैंने तुम से ये कहा नहीं

दिल्ली
15 जनवरी 2008

Tuesday, January 15, 2008

Tata की Nano


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

लाएंगे Nano हम भी एक लाख में
चार चांद लगाएंगे Tata की साख में

नैनों में खुमार
है Nano का आज
निहार रहे सब
छोड़ काम काज
ज़िक्र है इसका हर एक बात में
लाएंगे Nano हम भी एक लाख में

हमने कहा इसे जाने दो
हम हैं बस जानें दो
पत्नी कहे no, no, no
पड़ोसी ला रहे हैं Nano
होंगे शामिल हम भी इस भेड़ चाल में
लाएंगे Nano हम भी एक लाख में

रखेंगे कहाँ?
चलाएंगे कहाँ?
गली गूंचो में
फ़साएंगे कहाँ?
सोचेंगे समझेंगे सब ये बाद में
लाएंगे Nano हम भी एक लाख में

कुछ इस तरह
हमारी society चले
कि नाक न कटे
चाहे फ़ेंफ़ड़े जले
मंज़ुर हैं छुपाना नाक हमें mask में
लाएंगे Nano हम भी एक लाख में

विकास का सितारा
टिमटिमाया है दोबारा
हरियाली और रास्ते के बीच
फ़ंसा है बिचारा
मुश्किल से खिले हैं फूल भारत की शाख में
लाएंगे Nano हम भी एक लाख में

भाईयो और बहनो
देवियो और सज्जनो
हम और आप
चलाएंगे Nano
तर्क वितर्क जाए सब भाड़ में
लाएंगे Nano हम भी एक लाख मे.

... और 5 साल बाद दो सूरतें हो सकती हैं:
अ.
गायब है सुरज
गायब हैं तारें
गायब हो गये
उद्यान हमारे
डूबे शहर प्रदूषण की राख में
लाए थे Nano हम भी एक लाख में

ब.
प्रयत्न हमारा
हुआ सफ़ल
देश आगे
गया निकल
Nano छा गयी अमेरिका ईराक़ में
लाए थे Nano हम भी एक लाख में

दिल्ली
13 जनवरी 2008

Thursday, January 10, 2008

टाटा की neno


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

Laae.nge Nano ham bhii ek laakh me.n
Chaar chaand lagaae.nge Tata kii saakh me.n

Naino me.n khumaar
Hai Nano kaa aaj
Nihaar rahe sab
Chho.D kaam kaaj
Zikra hai isakaa har ek baat me.n
Laae.nge Nano ham bhii ek laakh me.n

Hamane kahaa ise jaane do
Ham hai.n bas jaane do
Patnii kahe no, no, no
Pa.Dosii laa rahe hai.n Nano
ho.nge shaamil ham bhii is bje.D chaal me.n
Laae.nge Nano ham bhii ek laakh me.n

Rakhege kahaa.N?
Chalaae.nge kahaa.N?
Galii guu.ncho me.n
Fasaae.nge kahaa.N?
Soche.nge samajhe.nge sab ye baad me.n
Laae.nge Nano ham bhii ek laakh me.n

Kuchh is tarah
Hamaarii society chale
Ki naak na kate
Chaahe fe.nfa.De jale
Ma.nzur hai.n chhupaanaa naak hame.n 'mask' me.n
Laae.nge Nano ham bhii ek laakh me.n

Vikaas kaa sitaraa
TmTimaayaa hai dobaaraa
Hariyaalii aur raaste ke biich
Fa.nsaa hai bichaaraa
mushikil se khile hai.n phuul bharat kii shaakh me.n
Laae.nge Nano ham bhii ek laakh me.n

Bhaiyo aur bahano
Deviyo aur sajjano
Ham aur aap
Chalaae.nge Nano
Tark vitarak jaae sab bhaa.D me.n
Laae.nge Nano ham bhii ek laakh me.

... And 5 years later two scenarios are possible:

A.
Gaayab hai suraj
Gaayab hai.n taare.n
Gaayab ho gaye
Udhyaan hamaare
Duube shahar praduShaN kii raakh me.n
Laae the Nano ham bhii ek laakh me.n

B.
Prayatn hamaaraa
Huaa safal
Desh aage
Gayaa nikal
Nano chhaa gayii America Iraq me.n
Laae the Nano ham bhii ek laakh me.n

Wednesday, January 2, 2008

2008


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

दो हज़ार आठ हो या दो हज़ार साठ
सितारे करे कुछ ऐसी सांठ-गांठ
कि सदा बना रहे आपका ठाटबाट

यहीं है wish, यहीं है thought
दो हज़ार आठ हो या दो हज़ार साठ
आपका मिज़ाज़ नहीं, stocks रहे hot

मियाद


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

साल दर साल मन में उठता है सवाल
शुभकामनाओ की मियाद क्यूं होती है बस एक साल?

चलो इसी बहाने पूछते तो हो एक दूसरे का हाल
साल दर साल जब जब आता नया साल