Tuesday, May 21, 2019

करोड़ों-करोड़ों मत गिनने में वक़्त तो लगता है

करोड़ों-करोड़ों मत गिनने में वक़्त तो लगता है

लड्डू पहले से जो खा ले भक्त तो लगता है


मुद्दों की कोई बात नहीं कीभगवा ही फहराना था

भगवे में मिल गया कहीं-कहीं रक्त तो लगता है


हैं तपस्वी और त्यागी भीदया का कोई भाव नहीं है

लीन हैं ध्यान में फिर भी चेहरा सख़्त तो लगता है


फूल नहीं हैंपात नहीं हैंफल की भी गुंजाईश नहीं है

क्यूँ सींचूँ ऐसे दरख़्त कोगो सशक्त तो लगता है


राहुल उपाध्याय  21 मई 2019  सिएटल

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Best Regards,
Rahul
425-445-0827

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2 comments:

सुशील कुमार जोशी said...

गज्जब :)

शिवम् मिश्रा said...

ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 22/05/2019 की बुलेटिन, " EVM पर निशाना किस लिए - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !