Saturday, January 21, 2012

आज मौसम बड़ा बेईमान है

आज मौसम बड़ा बेईमान है
आनेवाला कोई चुनाव है

खाली-पीली नेता बक रहे हैं
टीवी-रेडियो पे लड़-मर रहे हैं
एक दूजे का करते अपमान हैं

बारी-बारी से सब बिक रहे हैं
सेठ-साहूकार चैक लिख रहे हैं
लाखों-करोड़ों के इनके अभियान हैं

ऐ मेरे यार, ऐ वोट-वाले
दे मुझे वोट, कर देश हवाले
मेरे हाथों ही इसका कल्याण है

(आनन्द बक्षी से क्षमायाचना सहित)

Friday, December 9, 2011

कभी पलकों पे आँसू हैं

कभी पलकों पे आँसू हैं, कभी लब पे शिकायत है
मगर ऐ अमरीका फिर भी मुझे तुझ से मोहब्बत है

जो आता है, वो रोता है, ये दुनिया सूखी-साखी है
अगर है ऐश तो घर पे, जहाँ मनती दीवाली है
मगर इण्डिया नहीं जाना, अभी बनना सिटीज़न है
कभी पलकों पे आँसू हैं...

जो कमाता हूँ, वो खप जाए, बड़ी थोड़ी कमाई है
शेयर पे हाथ भी मारे, मगर पूँजी गवाई है
बने मिलियन्स थे ये सपने, मगर अब कर्ज़ किस्मत है
कभी पलकों पे आँसू हैं...

गराज में कार है, लेकिन मैं दफ़्तर जाऊँ बस लेकर
स्कूल के बच्चे की माफ़िक़, लदे बस्ता मेरी पीठ पर
फ़र्क बस इतना कि माँ नहीं, बीवी बाँधती टिफ़िन है
कभी पलकों पे आँसू हैं...

(निदा फ़ाज़ली से क्षमायाचना सहित)
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इण्डिया = India = भारत
सिटीज़न = citizen
मिलियन्स = millions
गराज = garage
बस = bus
बस्ता = backpack
टिफ़िन = tiffin/lunch

Monday, November 28, 2011

कहीं दूर जब पासपोर्ट बन जाए

कहीं दूर जब पासपोर्ट बन जाए
जल्दी से उसमें वीसा लगाए
दूर-दराज के देश में जा के
कोई सपनों के दीप जलाए

कहीं तो ये दिल कभी जुड़ नहीं पाते
कहीं से निकल आए जन्मों के नाते
भली सी लड़की से ब्याह रचा के
ग्रीन-कार्ड की प्यास बुझाए
कहीं दूर जब...

कभी यूँहीं जब हुई ले-ऑफ़ की बातें
भर आई बैठे-बैठे बस यूँहीं आँखें
कहाँ पे आ के, फ़ंसे हम हाए
अधेड़ उम्र कुछ समझ न पाए
कहीं दूर जब...

कभी तो ये दिल कहे, चलो घर जाए
फिर कहे, अभी रूके, अभी और कमाए
कमा-कमा के बरस हैं गुज़रे
जाने की फिर भी न टिकट कटाए
कहीं दूर जब...

(योगेश से क्षमायाचना सहित)

Wednesday, October 12, 2011

करवा चौथ

भोली बहू से कहती हैं सास
तुम से बंधी है बेटे की सांस
व्रत करो सुबह से शाम तक
पानी का भी न लो नाम तक

जो नहीं हैं इससे सहमत
कहती हैं और इसे सह मत

करवा चौथ का जो गुणगान करें
कुछ इसकी महिमा तो बखान करें
कुछ हमारे सवालात हैं
उनका तो समाधान करें

डाँक्टर कहें
डाँयटिशियन कहें
तरह तरह के
सलाहकार कहें
स्वस्थ जीवन के लिए
तंदरुस्त तन के लिए
पानी पियो, पानी पियो
रोज दस ग्लास पानी पियो

ये कैसा अत्याचार है?
पानी पीने से इंकार है!
किया जो अगर जल ग्रहण
लग जाएगा पति को ग्रहण?
पानी अगर जो पी लिया
पति को होगा पीलिया?
गलती से अगर पानी पिया
खतरे से घिर जाएंगा पिया?
गले के नीचे उतर गया जो जल
पति का कारोबार जाएंगा जल?

ये वक्त नया
ज़माना नया
वो ज़माना
गुज़र गया
जब हम-तुम अनजान थे
और चाँद-सूरज भगवान थे

ये व्यर्थ के चौंचले
हैं रुढ़ियों के घोंसले
एक दिन ढह जाएंगे
वक्त के साथ बह जाएंगे
सिंदूर-मंगलसूत्र के साथ
ये भी कहीं खो जाएंगे

आधी समस्या तब हल हुई
जब पर्दा प्रथा खत्म हुई
अब प्रथाओ से पर्दा उठाएंगे
मिलकर हम आवाज उठाएंगे

करवा चौथ का जो गुणगान करें
कुछ इसकी महिमा तो बखान करें
कुछ हमारे सवालात हैं
उनका तो समाधान करें

Thursday, September 15, 2011

सपने जब सच होते हैं

सपने जब सच होते हैं, कितने फीके लगते हैं
अंगूर जो हम खा नहीं पाते, कितने मीठे लगते हैं

बाद में जा कर वो कितने टेढ़े हो जाते हैं
शुरू-शुरू में जो हमको सीधे लगते हैं

हरियाली और हरित क्रांति की क्यों है इतनी धूम
मुझको तो लाल-पीले ही फूल अच्छे लगते हैं

मंज़िल तक आते-आते लड़खड़ा गए पाँव
और उनका ये उलाहना कि हम पीए लगते हैं

प्रेसिडेंट और पी-एम हैं नाम के हुक्काम
कर्मों से तो वे केवल पी- लगते हैं



सिएटल,

15 सितम्बर 2011

Wednesday, September 14, 2011

पहेली 37


आज हिंदी दिवस है. इस सुअवसर पर प्रस्तुत  हैं दो पहेलियाँ.
 
#1
है रियल पर हम कहें xxxx
बलि चढ़े ताकि कोई मरे x xxx
 
#2
अंग्रेज़ मांगे xxxx
बनाऊँ एक, xx xx
 
कैसे सुलझाए? मदद चाहिए? चिंता करें. ऐसी 36 और पहेलियां हैं जो कि हल की जा चुकी हैं. आप पहले उन्हें पढ़ लें. धीरे-धीरे आपको इन पहेलियों का सारा भूगोल-इतिहास समझ में जाएगा और इन्हें हल करने में कोई कठिनाई नहीं होगी.
 
फिर भी न बात बने तो इन चार पंक्तियों की तरफ़ नज़र फेरें

हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की

भूखें हैं तेरे बन्दें
भूखों को तू बन दे

Sunday, August 21, 2011

अजन्मे का जन्मदिन


जो अजन्मा है उसका जन्मदिन क्यों मनाते हो तुम?
और जन्मदिन है तो पुण्यतिथि भी अवश्य ही होगी
याद आए तो कभी बताना मुझे

सिएटल
21 अगस्त 2011