Tuesday, April 24, 2018

ताश की गड्डी

मैं वह सब हूँ

जो तुम मुझे सोचती हो

वफ़ादार, फरेबी 

दयालु, ग़ुस्सैल 

प्यारा, फूहड़


कमाल का जादू है!


जो तुम सोचती हो

वही पत्ता निकल आता है

मेरी ताश की गड्डी से


24 अप्रैल 2018

सिएटल

Monday, April 23, 2018

काजल के निशान

शर्ट के कंधे पर

काजल के निशान

किसी ख़ुशनसीब को ही नसीब होते हैं


जब मन्नत पूरी हो जाती है

आँसू छलक ही जाते हैं


23 अप्रैल 2018

सिएटल

Saturday, April 21, 2018

Blind spot

इरादे नेक थे

या बुरे?

फ़ैसला हो सका


हवा चली

और दिया बुझा नहीं 


हवा ने दरियादिली दिखाई किसी 

मासूम पे

या

वादाखिलाफी की

अपने धर्म से?


ज्योत के बल की कौन बात करता है?


21 अप्रैल 2018

सिएटल

Friday, April 20, 2018

वो हंगामा जिसे अंजाम तक लाना ना हो मुमकिन

चलो इक बार फिर से क्रिकेट देख लें हम दोनों


मैं तुमसे कोई उम्मीद रखूँ फ़ैसले आदि की

तुम मेरी तरफ़ रखो माँग भागीदारी की

मेरे अपने जुनून हैं, मेरे सपने हैं

मेरे उपर लटकी है तलवार ज़िम्मेदारी की


तुम्हें भी कोई उलझन रोकती है पेशकदमी से

मुझे भी लोग कहते हैं कि ये बेकार के चक्कर हैं

कब किस आंदोलन ने क्या बदल दिया देखो

शहीद हए कई लेकिन बदले न मंज़र हैं


तार्रुफ़ रोग हो जाये तो उसको भूलना बेहतर

ताल्लुक बोझ बन जाये तो उसको तोड़ना अच्छा

वो हंगामा जिसे अंजाम तक लाना ना हो मुमकिन

उसे एक क्रिकेट मैच पर छोड़ना अच्छा


(साहिर से क्षमायाचना सहित)

20 अप्रैल 2018

सिएटल

Thursday, April 19, 2018

संन्यास

हारना तुम्हें आता नहीं 

हराना मैं चाहता नहीं 


ऐसी बाज़ी खेलने से क्या मतलब?


अब हम बच्चे तो हैं नहीं 

कि स्कूल की यूनिफ़ॉर्म के साथ ही

गिले-शिकवे भी उतार दें


अब हम जवाँ भी नहीं 

कि व्हाट्सैप पर एक-दो कार्टून भेजकर 

सब भुला दें


पचपन की उम्र में तो पवैलियन नज़र जाता है

राम चाहे भजूँ भजूँ पर जीवन सिमट सा जाता है


क्यूँ पहनूँ पैड्स

क्यूँ चढ़ाऊँ ग्लव्स

और क्यूँ किसी अनजान गैंद पर

हो जाऊँ मैं आउट?


तुम्हें 

अपनी टीम

अपना मिशन 

मुबारक 


मुझे अपना रणभूमि से संन्यास


19 अप्रैल 2018

सिएटल

Wednesday, April 18, 2018

न जाने कौन सी चीज़ तुम्हें पसन्द है

जाने कौन सी चीज़ तुम्हें पसन्द है

इसलिए हनुमान जी की तरह सारी चीज़ उठा लाया

  • मोज़्ज़रैला से लेकर चेडार तक
  • अमेरिकन से लेकर स्विस तक
  • ब्री से लेकर गौडा तक
  • प्रोवोलोन से लेकर पेप्परजैक तक
  • पार्मीज़ैन से लेकर फ़ेटा तक
  • मॉन्ट्री जैक से लेकर हावरार्टी तक
  • ब्लू से लेकर मन्स्टर तक
  • रिकौटा से लेकर कोल्बी तक
  • कॉटेज से लेकर क्रीम तक


नतीजा?

  • पेट बढ़ गया
  • बाल झड़ गए 
  • स्वास्थ्य बिगड़ गया
  • बाग़ उजड़ गया


लेकिन तुम जो चाहती थी

वो चीज़ नहीं मिली

  • कास्टको में, विन्को में 
  • सेफवे में, टारगेट में
  • फ्रेड मायर में, क्यू-एफ-सी में 
  • पी-सी-सी में, होल फ़ूड्स में
  • क्रोगर में, लकी में
  • अल्बरटसन्स में, कारफोर में
  • एक्मे में, आई-जी- में 
  • ट्रैडर जोस में, वॉल-मार्ट में 


क्यूँकि जो हमें चाहिए

उसे 

  • परिभाषित करना कठिन
  • समझाना नामुमकिन 
  • और समझना दुश्वार है


चाहत

एक अहसास है

जिसका होना ही पाना है

जिसकी खोज

एक निरर्थक प्रयास है

जिसका रंग है, रूप है

जिसमें दर्द है, सुकून है

जिसके बग़ैर 

हम एक ज़िंदा लाश है


18 अप्रैल 2018

सिएटल


Tuesday, April 17, 2018

चुपके-चुपके रात दिन फेसबुक पे जाना याद है

चुपके-चुपके रात दिन फेसबुक पे जाना याद है

हमको अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है


दोपहर की पोस्ट हो या हो आधी रात की

वो तेरा हर पोस्ट को लाईक करना याद है


दोस्तों की पोस्ट में था तेरा चेहरा ढूँढता

वो हर किसी ऐरे-गैरे को दोस्त बनाना याद है


हो बुरा, हो घोर बुरा, केम्ब्रिज एनालिटिका के स्टॉफ का

जिसने किया तहस-नहस, किया सब बर्बाद है


आओ चलो फेसबुक छोड़े, पकड़े व्हाट्सैप का हाथ हम

कब, कहाँ, कोई, किसीका देता आजन्म साथ है


(हसरत मोहानी से क्षमायाचना सहित)

17 अप्रैल 2018

सिएटल