Friday, April 7, 2017

तीन प्रश्न

पानी देते वक़्त सोचता हूँ

माँ ने इतने पौधे क्यूँ लगाए?


फूल निहारते वक़्त सोचता हूँ

माँ ने इतने ही पौधे क्यूँ लगाए?


रोटी, कपड़ा और मकान

तीन का ही तो हुआ था फ़रमान 

फिर पौधों ने कहाँ से पा लिया स्थान?


8 अप्रैल 2017

दिल्ली 

Thursday, April 6, 2017

जब तक हूँ तब तक हूँ

जब तक हूँ

तब तक हूँ

इसके बाद

नभ तक हूँ


सम्बन्धों की सीमाएँ हैं

अनुबंधों की रेखाएँ हैं

इसके बाद

सब तक हूँ


टुकड़ों-टुकड़ों बँटता हूँ

कभी यहाँ, कभी वहाँ रहता हूँ

इसके बाद

पग-पग हूँ


नहीं हूँ तो सचमुच हूँ

हूँ तो झूठमुठ हूँ

समय से परे

पल-पल हूँ


फ़रीदाबाद और दिल्ली के बीच

7 अप्रैल 2017


Friday, March 24, 2017

ट्रम्प भी कैसी है पहेली

ट्रम्प भी
कैसी है पहेली, हाए
कभी तो हँसाए
कभी ये रुलाए


कभी देखो ट्रम्प नहीं माने
पीछे पीछे सपनों के भागे

एक के बाद एक एक्ज़ीक्यूटिव अॉर्डर 

साईन करता चला जाए यहाँ 


जिन्होंने उगाए यहाँ संतरे

उनसे कहे जाओ अपने घर रे
वही चुनकर ख़ामोशी
यूँ चले जाए अकेले कहाँ


(योगेश से क्षमायाचना सहित)

24 मार्च 2017

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Thursday, March 23, 2017

पटरियाँ

पटरियाँ अगर मिल जाएँ तो दुर्घटना तय है

रंग भी अगर मिल जाएँ तो बेरंग हो जाते हैं

सुर भी अगर अपनी पहचान खो दें 

तो कोलाहल मच जाता है


पृथक-पृथक ही सृष्टि पनपे

पृथक-पृथक इसका रूप मनोहर 

कोई फूल बने, कोई पत्ती बने

कोई गुलमोहर, कोई अमलतास बने


पृथकता ही से पीरियाडिक टेबल

पृथक-पृथक खिले फल-फूल यहाँ 

घुल-मिल के ही रह जाते तो

ख़ाक को तकती ख़ाक यहाँ 


यूँ मिल जाने की, मिट जाने की

चाह है उलटी धार सखा

अब निकल पड़े हो, तो निकल पड़ो

मुड़-मुड़ के देखो कि वो तार कहाँ


https://youtu.be/Md0L3q4wdq4











Monday, March 20, 2017

तू अपना पता दे

जो है नहीं 

उसी से कहता हूँ

तू अपना पता दे

तू है कि नहीं 

इतना बता दे


जब दो ही नहीं हैं

तो ये सम्वाद कैसा?

जब एक ही है

तो ये विवाद कैसा?


अपनी ही धारणाओं की

शक्ल की पूजा

जैसे अपना हो बच्चा

पर है तो दूजा 


दीपक जलेगा

तो ज्योति रहेगी

पूजा होगी

तो ख्याति रहेगी


यदि दीपक जलें

तो मिट्टी के ही जलें

यह आवश्यक नहीं 

यह आग है व्यापक

इसका मापक नहीं


20 मार्च 2017

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Sunday, March 19, 2017

March Madness

Madness is celebrated 

March is spent glued to the chair

And then we complain 

Leadership is not fair


Life goes on

As it did last year

We go to work, school, earn, learn, spend 

With abundance and no fear


Every generation

(no matter what the circumstances)

Has learnt 

Three Rs

And whatever is current 


So, count your blessings 

Do your part 

Hope for the best

And lead with heart. 


March 19, 2017

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Thursday, March 2, 2017

ख़ुद भीगता नहीं है और भीगो देता है धरा

ख़ुद भीगता नहीं है

और भीगो देता है धरा

कुछ इस तरह से होली

खेलता है आसमां


(जैसे दूर बैठा 

कोई एन-आर-आई

घर भेजता है धन

और आने को कहो

तो नहीं करता है जतन)


और धरती चलती रहती है

आगे बढ़ती रहती है

उससे मिलने के लिए


उसे क्या मालूम

कि वो गिर रही है

घूम रही है

एक धुरी के चारों ओर


और आसमां

फैलता जाता है

फूलता जाता है

खिसकता जाता है 

दूर

और दूर

और दूर


जो है ही नहीं 

उससे मिलना ये कैसा?

आँखों का दिल से

छलावा ये कैसा?


ज्ञान और विज्ञान में 

यही एक बुराई है

मिलन की आस भी

रास आई है


2 मार्च 2017

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Sunday, February 26, 2017

WhatsApp instagram है



जाने कहाँ गए वो दिन

लिखते थे गीत text में 

चाहे कोई भी बात हो

कहते थे सीधे text में 


अपनी नज़र में आजकल

WhatsApp instagram  है

फ़ोटो ही फ़ोटो हर जगह

मचा हुआ कोहराम है


मेरे status जो भी थे

सब के सब delete हुए

मनसूबे जितने भी बाँधे थे

सब के सब मिट्टी पलीद हुए


25 फ़रवरी 2017

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Saturday, February 18, 2017

टूट न जाएँ सपने मैं डरता हूँ

टूट जाएँ सपने 

मैं डरता हूँ

जग के भी देखो कहाँ

मैं जगता हूँ


रूठ जाएँ अपने

मैं डरता हूँ

खोल के भी आँखें अपनी

बंद रखता हूँ


भूल जाऊँ उसे

मैं डरता हूँ

ग़म और ख़ुशी से मैं 

दूर रहता हूँ


छूट जाए बचपन

मैं डरता हूँ

बरखा की बूँदें 

लब पे चखता हूँ


डूब जाए सूरज

मैं डरता हूँ

मेघों को नैनों में 

रोके रखता हूँ


बीत जाए जीवन

मैं डरता हूँ

दीया इक नया जला

दिया करता हूँ


18 फ़रवरी 2017

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