Friday, December 31, 2021

Re: उल्टा सीधा एक समान #16



शुक्र, 24 दिस॰ 2021 को अ 1:48 पर को Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> ने लिखा:

उल्टा सीधा एक समान #16

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मलयालम, नवीन, नवजीवन आदि ऐसे शब्द हैं जो उल्टा सीधा एक समान हैं। बाएँ से दाएँ भी वही हैं जो दाएँ से बाएँ हैं। 


यह तो हुए शब्द। ऐसे ही शब्दों के समूह, यानी जुमले भी हो सकते हैं। जैसे कि:


नाहक है कहना। 


दिया गया शब्द आगे-पीछे-बीच में कहीं भी आ सकता है। 


आज का शब्द है:


लोन


(यह अंग्रेज़ी का शब्द है। लेकिन हिन्दी में भी प्रचलित है।)

राहुल उपाध्याय । 24 दिसम्बर 2021 । सिएटल

 









उल्टा सीधा एक समान #17

उल्टा सीधा एक समान #17

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मलयालम, नवीन, नवजीवन आदि ऐसे शब्द हैं जो उल्टा सीधा एक समान हैं। बाएँ से दाएँ भी वही हैं जो दाएँ से बाएँ हैं। 


यह तो हुए शब्द। ऐसे ही शब्दों के समूह, यानी जुमले भी हो सकते हैं। जैसे कि:


नाहक है कहना। 


दिया गया शब्द आगे-पीछे-बीच में कहीं भी आ सकता है। 


आज का शब्द है:


नमक


(यह अंग्रेज़ी का शब्द है। लेकिन हिन्दी में भी प्रचलित है।)

राहुल उपाध्याय । 31 दिसम्बर 2021 । सिएटल








Tuesday, December 28, 2021

कहाँ हम अपना, अपना ही सोचते हैं

https://youtu.be/lpXlkuxVNaY


प्रात: विश्व कल्याण का

सबके कल्याण का

हम रोज़ सोचते हैं

भला ही सोचते हैं 

न वेद, न गुरू, कभी 

अनर्थ बोलते हैं 

कहाँ हम अपना

अपना ही सोचते है


समर हो कभी कोई तो 

हम छक्के छुड़ा दें 

ताकत बड़ी, 

शक्ति बड़ी 

हम सबको बता दें 

हिमालय से भी ऊँचा 

है शौर्य हमारा

कभी फिर ना कहे कोई 

ये यूँही बोलते हैं 


मतलब नहीं कोई हमें 

जहां के कलह से

अपने ही जहां में 

हैं हम गंतव्य खोजते

हम अपने इरादों को 

कभी ना भूलते 

इक यही तो हैं जिनसे 

हम ख़ुद को तोलते हैं


जब से हुआ है 

यहाँ जन्म हमारा

तब से रहा यही

विश्वास हमारा

जीओ और जीने दो

यही हैं सोचते

और यही है सच भी

यही सच बोलते हैं 


राहुल उपाध्याय । 27 दिसम्बर 2021 । सिएटल 



Monday, December 27, 2021

जो भी है सच नहीं दर्पण है

https://youtu.be/yS-xjgAj5rk


पा के भी पाए ना तू

खो के भी खोए ना तू

जो भी है सच नहीं दर्पण है


आएँगें यादों में

जाए न जाएँगे

हर पल सताएँगे

तुमको लुभाएँगे

जग जिनने छोड़ा है 

तुमको बुलाएँगे

तुमको जगाएँगे

तुमको सुलाएँगे 

लाख चाहे सोच ले

न समझा कोई न 

समझे आज तू 


हर पल जो आता है

हमको बताता है 

आना और जाना ही 

हमको बस आता है 

बाक़ी जो होता है 

वो एक फ़साना है

उसमें उलझ कर भी 

सबको तो जाना है

लाख चाहे सोच ले 

न समझा कोई न 

समझे आज तू 


जल्दी क्या, देरी क्या,

हर पल बराबर है 

इंसां क्या, सृष्टि क्या, 

हर जीव बराबर है 

ज़िन्दा क्या, मुर्दा क्या, 

आत्मा का सागर है 

मरता न मरता है, 

रहता यहाँ पर है 

लाख चाहे सोच ले 

न समझा कोई न 

समझे आज तू 


राहुल उपाध्याय । 27 दिसम्बर 2021 । सिएटल 


Sunday, December 26, 2021

अपना करम

https://youtu.be/74EfCrc0Cy8


कई महीनों से

कई हफ़्तों से

मैं आँक रहा था

अपना करम

पाया के अभी कुछ किया ही नहीं 


वादों में कहीं 

यादों में कहीं 

कहीं झांक रही थी

कोई पगली 

कुछ देर हुई 

न मैं समझ पाया

फिर आँख खुली 

तो थी माया


अपनों को बहुत

अपना समझा 

उनके ही इशारों 

पर नाचा

अब आज कहाँ 

मैं गुर सीखूँ 

और छोड़ चलूँ 

अपनी छाया


राहुल उपाध्याय । 26 दिसम्बर 2021 । सिएटल 


इतवारी पहेली: 2021/12/26


इतवारी पहेली:


कौन है राजा, कौन # ##

सब हैं बन्दे, नहीं ### 


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya 


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 26 दिसम्बर को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 19 दिसम्बर 2021 । सिएटल 
















Re: इतवारी पहेली: 2021/12/19



शनि, 18 दिस॰ 2021 को अ 11:00 पर को Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> ने लिखा:

इतवारी पहेली:


यह जन्म, फल पिछले #%# # #

अब जो कर सकता है ## ## #


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya 


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 19 दिसम्बर को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 19 दिसम्बर 2021 । सिएटल 
















Friday, December 24, 2021

उल्टा सीधा एक समान #16

उल्टा सीधा एक समान #16

—————————


मलयालम, नवीन, नवजीवन आदि ऐसे शब्द हैं जो उल्टा सीधा एक समान हैं। बाएँ से दाएँ भी वही हैं जो दाएँ से बाएँ हैं। 


यह तो हुए शब्द। ऐसे ही शब्दों के समूह, यानी जुमले भी हो सकते हैं। जैसे कि:


नाहक है कहना। 


दिया गया शब्द आगे-पीछे-बीच में कहीं भी आ सकता है। 


आज का शब्द है:


लोन


(यह अंग्रेज़ी का शब्द है। लेकिन हिन्दी में भी प्रचलित है।)

राहुल उपाध्याय । 24 दिसम्बर 2021 । सिएटल

 









Re: उल्टा सीधा एक समान #15



गुरु, 16 दिस॰ 2021 को अ 8:16 पर को Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> ने लिखा:

उल्टा सीधा एक समान #15

—————————


मलयालम, नवीन, नवजीवन आदि ऐसे शब्द हैं जो उल्टा सीधा एक समान हैं। बाएँ से दाएँ भी वही हैं जो दाएँ से बाएँ हैं। 


यह तो हुए शब्द। ऐसे ही शब्दों के समूह, यानी जुमले भी हो सकते हैं। जैसे कि:


नाहक है कहना। 


दिया गया शब्द आगे-पीछे-बीच में कहीं भी आ सकता है। 


आज का शब्द है:


हार


यह शब्द है अंग्रेज़ी का पर प्रचलित है सो अपना सा ही लगता है। 


राहुल उपाध्याय । 17 दिसम्बर 2021 । सिएटल

 








Saturday, December 18, 2021

इतवारी पहेली: 2021/12/19


इतवारी पहेली:


यह जन्म, फल पिछले #%# # #

अब जो कर सकता है ## ## #


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya 


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 19 दिसम्बर को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 19 दिसम्बर 2021 । सिएटल 
















Re: इतवारी पहेली: 2021/12/12



रवि, 12 दिस॰ 2021 को पू 12:14 पर को Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> ने लिखा:

इतवारी पहेली:


पीने-पिलाने की चीज़ है, नहीं है ## ## #

तलब होती है क्यों तलबगारों को #### #


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya 


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 12 दिसम्बर को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 5 दिसम्बर 2021 । सिएटल 
















Thursday, December 16, 2021

उल्टा सीधा एक समान #15

उल्टा सीधा एक समान #15

—————————


मलयालम, नवीन, नवजीवन आदि ऐसे शब्द हैं जो उल्टा सीधा एक समान हैं। बाएँ से दाएँ भी वही हैं जो दाएँ से बाएँ हैं। 


यह तो हुए शब्द। ऐसे ही शब्दों के समूह, यानी जुमले भी हो सकते हैं। जैसे कि:


नाहक है कहना। 


दिया गया शब्द आगे-पीछे-बीच में कहीं भी आ सकता है। 


आज का शब्द है:


हार


यह शब्द है अंग्रेज़ी का पर प्रचलित है सो अपना सा ही लगता है। 


राहुल उपाध्याय । 17 दिसम्बर 2021 । सिएटल

 








Re: उल्टा सीधा एक समान #14



गुरु, 9 दिस॰ 2021 को अ 8:42 पर को Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> ने लिखा:

उल्टा सीधा एक समान #14

—————————


मलयालम, नवीन, नवजीवन आदि ऐसे शब्द हैं जो उल्टा सीधा एक समान हैं। बाएँ से दाएँ भी वही हैं जो दाएँ से बाएँ हैं। 


यह तो हुए शब्द। ऐसे ही शब्दों के समूह, यानी जुमले भी हो सकते हैं। जैसे कि:


नाहक है कहना। 


दिया गया शब्द आगे-पीछे-बीच में कहीं भी आ सकता है। 


आज का शब्द है:


लकी


यह शब्द है अंग्रेज़ी का पर प्रचलित है सो अपना सा ही लगता है। 


राहुल उपाध्याय । 10 दिसम्बर 2021 । सिएटल

 










Wednesday, December 15, 2021

दुनिया की हर कहानी

दुनिया की हर कहानी

मेरी कहानी है

मेरी ज़िन्दगानी है

मैं हर प्रेमकहानी में हूँ

मैं हर रामायण

हर महाभारत में हूँ 


बस अंत 

कैसा होगा

कैसे होगा

किस पन्ने पर 

कब होगा

अज्ञात है 


दुनिया के हर गीत में 

मेरी आपबीती है

कलम किसी की

धुन किसी की

गायकी किसी की

बात सौ फ़ीसदी मेरी


कोई भी नई रचना 

नई नहीं है 

वो सौ दफ़ा 

लिखी जा चुकी है 

गाई जा चुकी है 

सुनी जा चुकी है

पढ़ी जा चुकी है

जीयी जा चुकी है 


राहुल उपाध्याय । 15 दिसम्बर 2021 । सिएटल 






Tuesday, December 14, 2021

चिराग़ भी ढूँढता है अंधेरा

चिराग़ भी ढूँढता है अंधेरा

अपने वजूद के लिए


संकट न हो तो

अस्तित्व ही नहीं 

किसी का किसी के लिए


दाना-पानी ही ज़रूरी होता

तो हम पेड़ होते

कभी हरे, कभी ख़ाली, 

तो कभी पीले होते

न चलते, न उड़ते

एक ही जगह से चिपके रहते

न मिलते, न जुलते

बस सूरज तकते

बारिश पीते


कहीं आग लगे

तो कुछ बात बने

कहीं गाज गिरे

तो मदद करें

कोई झगड़ा हो

तो बीच-बचाव करें

किसी के दिल पे हाथ रखें 

दिल से दिल की बात कहें


कुछ टूटे-फूटे

तो कुछ काम मिले


संकट नहीं 

तो कुछ भी नहीं 


चाहे 

नेता हो

देवता हो

या कोई भी 


राहुल उपाध्याय । 14 दिसम्बर 2021 । सिएटल 





Monday, December 13, 2021

सबका साथ, सबका विकास

सरकार 

जब भेदभाव करने लगे

पक्षपात करने लगे

संविधान को भूल

किसी एक पर

ज़्यादा ध्यान देने लगे

तो दुख तो होता ही है 

साथ ही डर भी लगता है

कि कहीं दूसरे जो आज

आहत हो रहे हैं 

कल बराबरी पर उतर आए तो?


हर देश की संस्कृति का 

जहाँ सम्मान होता है 

समारोह होते हैं 

खान-पान-वेशभूषा की

प्रदर्शनी लगती है 

वहाँ नेपाल की हो तो स्वागत है

दूसरे पड़ोसी की हो

तो आग लग जाती है 


सब एक जैसा ही सोचें

यह कैसी ज़िद है?


सबका साथ 

सबका विकास 

महज़ जुमला है 


राहुल उपाध्याय । 13 दिसम्बर 2021 । सिएटल 




Sunday, December 12, 2021

देख के फ़ोटो मन मुरझाए

https://youtu.be/z6NekwAS0IA


देख के फ़ोटो मन मुरझाए

मुझसे जुदा तू कैसे मुस्काए 

मासूम चेहरा देखा न जाए 


टप-टप बरसी आँखें, आँखें सूज गईं 

बाक़ी थी जो साँसें, साँसें टूट गईं

जीऊँ क्यूँ ऐसे नयन बहाए


आधी-अधूरी बातें, बातें रह गईं

लम्बी-लम्बी रातें, रातें रह गईं

फ़ोन न आए चैन जो लाए


हाथ न छोड़ा साथ ही सारा छोड़ दिया

प्यार न समझा, प्यार भरा दिल तोड़ दिया

घाव विरह के बढ़ते जाएँ


राहुल उपाध्याय । 12 दिसम्बर 2021 । सिएटल