Wednesday, December 8, 2021

कुछ गिरा

कुछ गिरा

कुछ टूटा

कुछ जला

बहुत कुछ ख़त्म हुआ 


सीमा पर शहीद होते तो

दुःख के साथ जोश भी होता


अब

सिर्फ़ दु:ख ही दु:ख 

सिर्फ़ आँसू ही आँसू 

नमन ही नमन


इंसान नश्वर है 

कब, क्या हो जाए

कह नहीं सकते

एक पल ठीक है

अगले पल ढेर 


मशीन?

मशीन तो अमर है

इससे ऐसी उम्मीद नहीं थी


इंसान जाता है 

तो अकेले जाता है 

मशीन गई

तो 13 को साथ ले गई 


कई लोग 

बस कहते रह जाते हैं 

जिएँगे साथ, मरेंगे साथ 


मधुलिका 

बहुत भाग्यशाली थीं


राहुल उपाध्याय । 8 दिसम्बर 2021 । सिएटल 





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