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Wednesday, December 23, 2020

कैसे कहें हम रोग ने हमको


कैसे कहें हम रोग ने हमको

क्या-क्या खेल दिखाएँ 

यूँ शरमाई किस्मत हमसे

खुद से हम शरमाए 


बागों को तो पतझड़ लूटे

लूटा हमें बहार ने 

मृतक मरे रोग से लेकिन

मारा हमें अलगाव ने 

अपना वो हाल हैं बीच सफ़र में 

जैसे कोई भाग जाए


तुम तो जानो क्या चाहा था

क्या खोकर बैठे हम 

रिश्ते-नाते, बंधु-बांधव 

सब सपने, सब दमख़म 

इतना सब है खोया हमने 

कहे तो कहा ना जाए 


ऐसे लगी बंदिशें हम पे

कहीं भी जा ना सके हम 

अपनों से हम मिल ना पाए

रोए तो रो ना सके हम 

कब होगा ये रोग अलविदा 

हमें कुछ समझ न आए


(नीरज से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 16 दिसम्बर 2020 । सिएटल 

वीडियो यहाँ देखें/सुनें:

https://youtu.be/uNHhxMDuYbI

Saturday, December 19, 2020

वैक्सीन आई है

वैक्सीन आई है, आई है, वैक्सीन आई है

बड़े दिनों के बाद, एक ग़रीब की याद

जगत को अब क्यों आई है


पहले मेरा हाथ लिया है...

उस पे निशाना दाग दिया है


ओ धन-दौलत पे मरने वाले

इतनी दया क्यूँ मेरे खाते


नौकरी देने की जब थी बारी

भूल गया क्यूँ तू ज़िम्मेदारी


सारे रिश्ते तूने तोड़े

आँख में आँसू तूने छोड़े


कम खाते हैं कम सोते हैं

बहुत ज़्यादा हम रोते हैं 


सूनी हो गईं शहर की गलियाँ

कांटे बन गईं बाग की कलियाँ


बंद हुए सावन के झूले

उजड़े आंगन, बुझ गए चूल्हे


अब के बरस जब आई दीवाली

दीप नहीं दिल जले हैं खाली


रंग बिना जब आई होली

रोली लगा के बेटी रो ली


पीपल सूना, पनघट सूना

घर शमशान का बना नमूना


ना फ़सल कटी आई बैसाखी

अब तो क्या रह गया है बाकी


पहले जब भी फूल खिलते थे

मिल-जुल के हम सब खिलते थे


बंद हुआ ये मेल भी अब तो

खतम हुआ ये खेल भी अब तो


डोली में जब बैठी बहना

रस्ता देख रहे थे नैना


मैं तो भाई हूँ मेरा क्या है

इसकी माँ का हाल बुरा है


बजनी थी वहाँ जब शहनाई

छाई थी वहाँ भीषण तन्हाई


तूने पैसा बहुत कमाया

पैसे ने फिर लोभ बढ़ाया


हम पंछी पिंजरे में बैठे

जैसे चाहे तू पैसे ऐंठे


माना उमर बहुत है छोटी

इसकी भी तो क़ीमत होगी


(आनन्द बक्षी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 16 दिसम्बर 2020 । सिएटल 

वीडियो यहाँ देखें/सुनें: https://youtu.be/k6s23D6iUEc


Friday, December 18, 2020

अरे वैक्सीन, तुझे हमने

अरे वैक्सीन, तुझे हमने

सब दुखों की दवा माना 

बड़ी भूल हुई, अरे हमने

ये क्या समझा, ये क्या जाना


गुणगान तेरा हर रोज़ सुना

छलते रहे हम सादों को

तू आएगी, सुख लाएगी

रटते रहे इन वादों को

हम सा न हो कोई दीवाना


सोचा न था बढ़ जाएँगी

तनहाइयाँ जब रातों की

दुख और हमें दे जाएँगी 

बातें झूठी नेताओं की

ठोकर लगी तब पहचाना


ऐ काश के होती ख़बर

दुख किसे पहुँचाया है

शीशा नहीं, सागर नहीं

मंदिर-सा इक दिल ढाया है

ता-आसमान है वीराना


(मजरूह से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 16 दिसम्बर 2020 । सिएटल 

https://youtu.be/ELGJiLufS5E



Wednesday, December 16, 2020

डॉक्टर बुला रहे हैं

डॉक्टर बुला रहे हैं

टीके लगा रहे हैं

लगाना ही लाज़मी है

लगाते ही जा रहे हैं


देखो ये रोग 

है महारोग

भागे भगाए न भागे

डरे न डॉक्टर 

लड़े वो जमकर

हरदम बढ़े वो आगे

बढ़ते ही जा रहे हैं

लड़ते ही जा रहे हैं


लगा कर मास्क

धो कर के हाथ

कब तक बचोगे लोगो

सोचो न बात

दिन हो के रात

जैसे ही मिले लगा लो

फ़ायदे  ही फ़ायदे हैं

एक्सपर्ट बता रहे हैं


आते थे लोग       

जाते थे लोग   

लगते थे रोज़ मेले

कोविड के बाद    

हुए बर्बाद

पड़ गए हम अकेले

टीक लगे जिन्हें  

नगमे वो गा रहे हैं 


डॉक्टर को देख 

ऐसे हैं नेक

अच्छा बुरा न देखे

डॉक्टर को देख 

ऐसे हैं नेक

अच्छा बुरा न देखे

सब का उपचार

दुश्मन के यार

सबको एक सा देखे

जीना सिखा रहे हैं

लड़ना सिखा रहे हैं


दवा का नाम 

ना कर बदनाम

इल्ज़ाम लगा न झूठे

हिम्मत न हार 

हो जा तैयार

आ लगवा ले टीके

शक मिट जाए सारे

वो परिणाम आ रहे हैं


(आनन्द बक्षी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 16 दिसम्बर 2020 । सिएटल 

https://youtu.be/Ue9kfUmMlZI 


Saturday, December 12, 2020

ये दवाई ये वैक्सीन मेरे काम की नहीं

I

ये दवाई ये वैक्सीन मेरे काम की नहीं


कैसे कराऊँ क़त्ल किसी बेगुनाह का

हँसता हुआ चराग है अपने समाज का

ऐ काश भूल जाऊँ मगर भूलता नहीं

किस धूम से कटेगा सर बेक़रार का


अपना पता मिले न खबर यार की मिले

दुश्मन को भी ना ऐसी सज़ा आज सी मिले

उनको ख़ुदा मिले है ख़ुदा की जिन्हें तलाश

मुझको बस इक झलक किसी इंसान की मिले


वैक्सीन लगाके भी मुझको ठिकाना न मिलेगा 

ग़म को भूलाने का कोई बहाना न मिलेगा 

हाथ तरसे जिसमें काम को क्या समझूँ उस संसार को

इक जीती बाज़ी हारके मैं ढूँढूँ बिछड़े काम को


दूर निगाहों से आँसू बहाता हूँ यूँही 

कहाँ को जाऊँ मैं मुझे न बुलाता है कोई

ये झूठे वादे छोड़ दो, सारे हथकंडे छोड़ दो

वैक्सीन कोई इलाज नहीं, मुझसे नाता जोड़ लो


(कैफ़ी आज़मी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 12 दिसम्बर 2020 । सिएटल 

https://youtu.be/LP1D_F1ERQI


Friday, December 4, 2020

वैक्सीन की बात चली तो


कुछ की जेबें भरेंगी 

बाक़ी सब आह भरेंगे 

वैक्सीन की बात चली तो

शक-शुबहा साथ चलेंगे

           

कहीं इसकी है वैक्सीन 

कहीं उसकी है वैक्सीन

कहाँ तो एक नहीं थी

अब हज़ारों हैं वैक्सीन 

कौन सी अच्छी-बुरी है

कैसे हम जाँच लेंगे


जैसे अब तक बचे हैं

वैसे बचते रहेंगे

हाथ धोते रहे हैं

हाथ धोते रहेंगे

वैक्सीन की क्या ज़रूरत 

अक़्ल से काम लेंगे 


हर तरफ़ बाज़ार नरम है

इलाज का बाज़ार गरम है

इनका है क्या भरोसा

इनका न ईमान-धरम है

मरीज़ मरता है तो मर जाए

ये तो नोट छाप लेंगे


(आनन्द बक्षी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 3 दिसम्बर 2020 । सिएटल 

https://youtu.be/BtvcArRUOq4


Friday, October 30, 2020

कहाँ से दर्द भरे दिन

कहाँ से दर्द भरे दिन यहाँ उतर आए

बिना मास्क के माशूक़ ना नज़र आए


ख़ुशी की चाह में मैंने उठाये रंज बड़े

मेरा नसीब कि मेरे क़दम जहाँ भी पड़े

महामारी की वहाँ से भी खबर आए


उदास रात है वीरान दिल की महफ़िल है

न हमसफ़र है कोई और न कोई मंज़िल है

दवाओं का न दुआओं का कोई असर आए


(आनंद बक्षी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 30 अक्टूबर 2020 । सिएटल 

https://youtu.be/7zkJZKCGaiU 



Thursday, September 24, 2020

भजो राम प्यारे

भजो राम प्यारे 

मिटे रोग सारे

यदि ट्रम्प या मोदी 

कहे लगा के नारे 

कहेंगे सब इनका 

है दिमाग फिरा रे

यही कहे तुलसी

तो लगे संत न्यारे


हमसे बढ़ा शातिर 

है कोई और कहाँ रे 

हर जगह से अपेक्षा 

है अलग सदा से

डॉक्टर से न माँगे 

ग्रहों के उपचार आदि

पंडितों से न माँगे 

किसी दर्द की दवा रे


राहुल उपाध्याय । 24 सितम्बर 2020 । सिएटल 


Wednesday, September 23, 2020

धन्य कोरोना!

धन्य कोरोना!

तेरे कारण 

न पाँव लागूँ

न पाँव पड़ूँ 

न किसी को सर चढ़ाऊँ 


धन्य कोरोना!

तेरे कारण 

न गले लगूँ

न कोई गले पड़े

न किसी का दम घुटे


धन्य कोरोना!

तेरे कारण 

न कोई हाथ मिलाए

न किसी के हाथ लगूँ

दो हाथ दूर सब लोग रहे


धन्य कोरोना!

तेरे कारण 

न आए कोई

न जाऊँ कहीं 

झूठ बोलूँ-सुनूँ नहीं 


धन्य कोरोना!

तेरे कारण 

न कोई उँगली पकड़े

न पहुँचे तक पहुँचे

रूहानी मोहब्बत रूहानी रहे


राहुल उपाध्याय । 23 सितम्बर 2020 । सिएटल 


Friday, August 28, 2020

देखो भूला ना करो, मास्क लगाया करो



देखो भूला ना करो, मास्क लगाया करो

हम न बोलेंगे कभी, मास्क बिन न आया करो


जो कोई बीमार हुआ, सोचो क्या हाल होगा

इस ख़ता पर तेरी, कितना नुक़सान होगा

खुद भी समझो ज़रा, औरों को समझाया करो


जान पर मेरी बने, ऐसी क्या मर्ज़ी तेरी

क्या मैं दुखी रहूँ, यही चाहत है तेरी

तो फिर बात सुनो, ऐसी ज़िद ना करो


तेरी हँसी है हसीं, माना क़ातिलाना सही

तेरे अधरों पे मुझे, मिली जन्नत की ख़ुशी 

लेकिन आज रूको ज़रा, यूँ क़ातिल ना बनो


क्या कहेगा ये जहाँ, बुरा जो इतना फँसा 

हर तरफ़ त्राहि-त्राहि, यहाँ से लेकर वहाँ 

अब तो तुम मान जाओ, इतने पागल ना बनो


(हसरत जयपुरी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 1 अगस्त 2020 । सिएटल

https://youtu.be/6Lcxf7p00NI 


Thursday, August 27, 2020

मैंने काम और कमाई की तमन्ना की थी

मैंने काम और कमाई की तमन्ना की थी

मुझको हाथों की सफ़ाई के सिवा कुछ न मिला


गया मंदिर, गया मस्जिद, कहीं राहत न मिली 

किए सजदे, रोए दुखड़े, कहीं चाहत न मिली 

रहे हाथ ख़ाली, भलाई की तमन्ना की थी


किसी साधु किसी बाबा का सहारा भी नहीं 

रास्ते में कोई मिला नाकारा भी नहीं  

मैंने कब तन्हाई की तमन्ना की थी


मेरी राहों से जुदा हो गई राहें सबकी

आज बदली नज़र आती हैं निगाहें सबकी 

मिले कसाई, रिहाई की तमन्ना की थी


कुछ भी माँगा तो बदलते हुए फ़रमान मिले

चैन चाहा तो उमड़ते हुए तूफ़ान मिले

मिला बस शोर, शहनाई की तमन्ना की थी


घर में हो क़ैद ज़माने के अंधेरे पाए

घर से बाहर जो निकला तो झमेले पाए

मैंने कब रोज़ लड़ाई की तमन्ना की थी


(साहिर से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 7 अगस्त 2020 । सिएटल

https://youtu.be/Irs2oxHbJSk 


Tuesday, August 18, 2020

महीन से महीन महीना भी एक भार है

महीन से महीन

महीना भी एक भार है

यह साल उठेगा नहीं 

लगता इस बार है


तिल-तिल कर

गुज़रता वक़्त है

कहने को

जीने के दिन चार हैं


क्या सोम, क्या मंगल

क्या शनि, क्या रवि

हर दिन

होता एक वार है


मूर्ति तो नहीं 

पर मूर्ति सा ही

गर्भगृह में बंद

मेरा कारोबार है


ज्ञान और विवेक की

बारह बज गई है

न जाता है राहुल कहीं 

न आता घर अख़बार है


राहुल उपाध्याय । 18 अगस्त 2020 । सिएटल 


Thursday, June 11, 2020

चढ़ा है तो आसानी से उतरेगा नहीं

इतिहास साक्षी है कि
जब भी हमने कुछ धारा है
उसे उतारने में हम अक्षम रहे हैं

चाहे वो
जूते-चप्पल हों
शर्ट हो
पेंट हो
चश्मा हो
या अँगूठी हो

अब 
ढाई अंगुल के मास्क के भी
दिन आ गए हैं
चढ़ा है
तो आसानी से उतरेगा नहीं 

जिस गाँव में बिजली के अभाव में 
लोग ज़िन्दगी गुज़ार देते थे 
बिना पंखे के
आज
बिना कूलर के
लोगों को नींद नहीं आती है
बिना बाईक 
अपंग
बिना फ़ोन
गँवार 
बिना व्हाट्सेप
अकेले
बिना फ़ेसबुक 
बेजान

अब
जेब में रूमाल के साथ
हेण्ड सेनिटाईज़र भी
अनिवार्य हो जाएगा

कहाँ तो रोटी-कपड़ा-मकान जुटाने में
कमर टूट जाती थी
अब
शैम्पू 
डीओडोरेंट
इंटरनेट 
सब अति आवश्यक है

हम भूल जाते हैं कि
निर्भरता ही नैनों में है नीर भरती
और हम उन्हें समृद्धि का मापदण्ड मान बैठते हैं

सही मायनों में देखिए तो है बस वो ही आज़ाद
जो किसी बात पर भी किसी का नहीं मोहताज 

राहुल उपाध्याय । 11 जून 2020 । सिएटल

Saturday, June 6, 2020

लो बीमारी, दो बीमारी

लो बीमारी
दो बीमारी
है बस यही पहचान हमारी

अलग-थलग हैं
कटे-कटे से
कहने को जात इंसान हमारी

न आँखों में चमक
न होंठों पे हँसी है
दबी-छुपी है मुस्कान हमारी

कोई घूरे हमें
कोई नज़रें फेरे
जैसे हो सूरत हैवान हमारी 

न हम इसके
न ये हमारी
साँसें हैं मेहमान हमारी

राहुल उपाध्याय । 6 जून 2020 । सिएटल

Thursday, June 4, 2020

गुरू गोविन्द दोऊ खड़े किसी के न लागू पाय


सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें:

गुरू गोविन्द दोऊ खड़े किसी के न लागू पाय
कोविड के इस जुग में दो गज दूरी सुहाय

बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे अमरीका देश
है यहाँ के रोग वहाँ और वही के वही कलेश

पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ, पंडित भया न कोय
ढाई अंगुल मास्क का, लगाए सो पंडित होय

आई है तो जाएगी महामारी एक दिन
तब तक धीरज धरिए बन रही वैक्सीन

राहुल दूरी दो गज की मत तोड़ो चटकाय
टूटे फिर बचे नहीं जग से दूर हुई जाय

(कबीर, रहीम से क्षमायाचना सहित)
राहुल उपाध्याय । 4 जून 2020 । सिएटल

Monday, June 1, 2020

वही हो रहा है

जो नहीं होता था 
हो रहा है
एक-दूसरे से 
एक दूसरे को
ख़तरा हो रहा है

पहले भी
किसे फ़ुरसत थी
किसी से मिलने की
ग़लती से सामना हो जाने पर
बस नाटक करते थे
गले लगाने का

कोई कहता है कि
हम तो उकता गए हैं
घर बैठे-बैठे
एक यही थे
जो चाहते थे कि
मिल जाए उन्हें सब
घर बैठे-बैठे

अमेज़ॉन प्राइम
नेटफ्लिक्स
उबर ईट्स
और ज़ूम
आज की
इजाद नहीं है
भोले हैं लोग
भूलने लगे हैं
रहता कुछ
याद नहीं है 

जो चाहा था
वही हो रहा है

राहुल उपाध्याय । 1 जून 2020 । सिएटल