Monday, November 3, 2008

ये भी कोई चुनाव है?

अमरीकी वोटर की शामत आई है
एक तरफ़ कुआँ एक तरफ़ खाई है
किसे वोट दे किसे न दे
सोच सोच हालत पतली हो आई है

48 पुराने राज्यों के होते हुए
दो नए-नवेले राज्यों ने धूम मचाई है
एक तरफ़ अलास्का एक तरफ़ हवाई है
मैनलेंड के निवासियों पर जम कर चपत लगाई है

पहले साल भर चला वो नाटक था
जिसमें एक नारी थी एक वाचक था
चुनना दोनों में से सिर्फ़ एक था
जबकि इरादा किसी का न नेक था

धरा पे धरा ये संसार है
नारी से करता ये प्यार है
दिल करता उस पे निसार है
नित देता उसे उपहार है

लेकिन अहंकार के आगे मजबूर है
नारी रानी बने नहीं मंजूर है
हिलैरी का दिल इसने तोड़ दिया
हवाईअन से नाता जोड़ लिया

चलो डेमोक्रेट्स ने किया तो कोई ग़म नहीं
लेकिन रिपब्लिकन्स भी निकले कम नहीं
गधे तो गधे ही होते हैं
लेकिन हाथी तो साथी होते हैं
जब जनता नारी नकार चुकी थी
खा-पी के सब डकार चुकी थी
जनता को फिर झकझोड़ दिया
ओल्ड बॉयज़ क्लब का भ्रम तोड़ दिया
ओबामा के सामने बम फोड़ दिया
चुनाव का रुख मोड़ दिया

रानी नहीं तो पटरानी ले लो
बूढ़े के साथ जवानी ले लो
'गर मैं गुड़क गया तो
पेलिन राज करेंगी
5 बच्चों का खयाल रखती है
आप का भी ये खयाल रखेंगी

लेकिन मैं हूँ एक एन-आर-आई
पक्का घाघ और अवसरवादी
इनके झांसे में नहीं आनेवाला
लाख सफाई चाहे दे दें
मुझे तो नज़र आए दाल में काला

सब एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं
क्या अलास्का और क्या हवाई है?
एक बर्फ़ तो एक समंदर है
इनके बीच क्या हो सकती लड़ाई है?
हिम से ही सागर निकले
सागर से ही हिम बरसे
जल के ही दोनों रूप है
जल बिन हर कोई तरसे

हम तो अपने मस्त रहेंगे
वोट इनमें से एक को न देंगे
न इस चुनाव में
न किसी चुनाव में
न भाग लिया है
न भाग लेंगे
कल को अगर कोई मुसीबत आए
हम तो फ़्लाईट पकड़ कर भाग लेंगे

3 नवम्बर 2008

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2 comments:

सलिल said...

राहुल-भाई, आपकी लेखनी सशक्त एवं चुलबुली है! और आपके विचार अनोखे और उत्तेजक! आपकी कवितायेँ इन दोनों के मिलन की अद्भुत संतानें हैं ...

राजीव तनेजा said...

हास्य का पुट लिए ताज़ातरीन विष्य पर आपकी कविता पसन्द आई....