Wednesday, May 13, 2026

आपके बाद जीवन में कुछ भी नहीं

आपके बाद जीवन में कुछ भी नहीं

आप थे तो हमें था सहारा मिला


यूँ तो हमदर्द कई हैं, कई साथ भी 

पर अपना न कोई दोबारा बना


यूँ तो गुफ्तगू होती थी हर रोज़ ही

जो कहना था दिल ये कह ना सका


हम कहां थे, कहां से कहां आ गए

आज सोचा तो शीश नवाना पड़ा


रब जो कह दे कि मांगो तो क्या मांग लूं? 

सब तो दिल में है मेरे समाया हुआ


चांद के पास धन है न दौलत कोई

चांदनी की बदौलत वो प्यारा लगा


राहुल उपाध्याय । 13 मई 2026 । सिएटल 

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