आपके बाद जीवन में कुछ भी नहीं
आप थे तो हमें था सहारा मिला
यूँ तो हमदर्द कई हैं, कई साथ भी
पर अपना न कोई दोबारा बना
यूँ तो गुफ्तगू होती थी हर रोज़ ही
जो कहना था दिल ये कह ना सका
हम कहां थे, कहां से कहां आ गए
आज सोचा तो शीश नवाना पड़ा
रब जो कह दे कि मांगो तो क्या मांग लूं?
सब तो दिल में है मेरे समाया हुआ
चांद के पास धन है न दौलत कोई
चांदनी की बदौलत वो प्यारा लगा
राहुल उपाध्याय । 13 मई 2026 । सिएटल

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