कभी इस पर लिख
कभी उस पर लिख
हर बात पर
सबको पका के लिख
कोई पढ़ रहा हो
तो उसे दे बता
तेरी धमनियों में
बहता रक्त नहीं
कुछ करने को
तेरे पास वक़्त नहीं
क्रांति हो तो
कोई और लाए
तू तो बस अपना
फ़ोन चलाए
क्यूँ जुटे नहीं
क्यूँ मरे नहीं
क्यूँ वीरता के
क़िस्से गढ़े नहीं
है तीज-त्योहार
तो नृत्य कर
भजन गा-गा के
जाम कर
कुछ खा मीठा
कुछ खिला मीठा
बेमौके पर न
सेहत की बात कर
तू दीप जला
तू घर सजा
परंपरा से हटकर
न कुछ और कर
जो चल रहा
उसे चलाए जा
कभी इस पर लिख
कभी उस पर लिख
हर बात पर
सबको पका के लिख
राहुल उपाध्याय । 14 अक्टूबर 2026 । सिएटल

0 comments:
Post a Comment