क्या हुआ जो हम हारे
कल तुम ही तो थे जो हारे
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सुन चम्पा, सुन तारा
कोई जीता, कोई हारा
तुमने सीखा, हमने सीखा
हमने सीखा, तुमने सीखा
क्या सीखा, क्या सीखा?
कि
जो गद्दी पे हैं आज बैठे
हल न होंगे मुद्दे उनसे
कोई जीते, कोई हारे
यूँही चलते हैं चक्र सारे
नहीं मिटते हैं दुख, प्यारे!
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ख़ुशियों की तुमको ज़रूरत न होती
अगर ग़म न होते
तुम्हें आज जीतने की ख़ुशियाँ न होती
अगर हम न होते
हमें जो तुम्हारा वोट न मिलता
तरसते ही रहते रुतबा न मिलता
वोट जो मिला तो असर ये हुआ है
तुम आज जीते, कल हम जीतेंगे
कोई जीते, कोई हारे
यूँही चलते हैं चक्र सारे
नहीं मिटते हैं दुख, प्यारे!
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राहुल उपाध्याय । 4 नवम्बर 2026 । सिएटल

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