Tuesday, February 17, 2009

एक तरफ़ा प्यार


न थी
न हैं
न होंगी कभी
सांसों में मेरी
सांसे तेरी

फिर भी सनम
चाहूँगा तुझे
जब तक है
खुशबू
फूलों में तेरी

न थे
न हैं
न होंगे कभी
गेसू तेरे
कांधों पे मेरे

फिर भी सनम
चाहूँगा तुझे
जब तक है
अम्बर पर
बादल घनेरे

न था
न है
न होगा कभी
चेहरा तेरा
हाथों में मेरे

फिर भी सनम
चाहूँगा तुझे
जब तक है
दुआ
हाथों में मेरे

न थे
न हैं
न होंगे कभी
गालों पे तेरे
चुम्बन मेरे

फिर भी सनम
चाहूँगा तुझे
जब तक है
सपनों में
साए तेरे

न थी
न है
न होगी कभी
दुनिया तेरी
दुनिया मेरी

फिर भी सनम
चाहूँगा तुझे
जब तक है
दूरी
तुझसे मेरी

सिएटल,
17 फ़रवरी 2008

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7 comments:

rahul said...

nahut sundar bahut lazabaab sach main mazaa aa gaya ..
kabhi mere blog par dastak den
http://manoria.blogspot.com

COMMON MAN said...

लेकिन हम तो कमेन्टेयाते रहेंगे.

vandana said...

dil ko choo liya aapke ek tarfa pyar ne.

नीरज गोस्वामी said...

इस दिलकश रचना के लिए ...बधाई.

नीरज

इष्ट देव सांकृत्यायन said...

बहुत ख़ूब.

sanju said...

बहुत सुन्दर दिलकश रचना ...बधाई.

Anonymous said...

Kavita bahut sundar hai, Rahul. Yeh bhi sundar baat hai ki aapne kavita ko "Worship" ki category mein tag kiya hai. Very touching...