Tuesday, March 13, 2012

कर-कर के इंकलाब एन्क्लेव ही जोड़ पाए हैं

कर-कर के इंकलाब, एन्क्लेव ही जोड़ पाए हैं
छ: दशक के बाद भी अंग्रेज़ी कहाँ छोड़ पाए हैं

आपकी बात का क्या करेगा विश्वास कोई
जब आप ही अपनी बात को खुद न ओड़ पाए हैं

जब दिल हो और दिमाग हो, तो बात बिगड़ेगी ज़रूर
दिल और दिमाग की साँठ-गाँठ बिरले ही तोड़ पाए हैं

जो हो गया सो हो गया, आगे की सुध लीजिए
वक़्त की धार को बिड़ला भी न मोड़ पाए हैं

दिल्ली । 88004-20323
13 मार्च 2012

इससे जुड़ीं अन्य प्रविष्ठियां भी पढ़ें


1 comments:

कुमार said...

wah rahul ji aapki kalam me ek ajab hi jaadu sa dekhne ko mila h

Sirf chaar lafjon me kitna kuchh kah diya.... Meri ruh ko chhu gai aapki ye rachna...aage bhi aise hi nagme dete rahiyega...hum intzzar karenge...