Friday, May 15, 2026

चांद था तो मिली थी हमें रोशनी

चांद था तो मिली थी हमें रोशनी

चांदनी के बिना है कहाँ जिंदगी 


दिन का सूरज उगलता बड़ी आग है

आग समझेगी क्या है, कहां है ख़ुशी 


दिन ढले रात हो, रात ही रात हो

हाथ उठे तो मैंने दुआ ये ही की


आज तय कर लिया मैंने अपना भविष्य

वसीयत में किसी को फूटी कौड़ी न दी


दुख होगा मुझे क्यूँ और किस बात का 

बिजलियाँ भी गिरीं तो कुछ दे कर गईं 


राहुल उपाध्याय । 15 मई 2026 । सिएटल 


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