अधूरा प्यार भूलाने में
उमरिया पूरी लगती है
भले ही बेवफ़ा है वो
जिगर में आस पलती है
कहा है हम न आयेंगे
मगर ये आँख तकती है
उन्हें तब तक मैं चाहूँगा
ये जब तक साँस चलती है
किसे कह दूँ, किसे कह दूँ
वो मेरी ख़ास लगती है
राहुल उपाध्याय । 15 अगस्त 2026 । सिएटल

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