Friday, October 16, 2026

रंग

में चाहता हूँ 

कि रंग बदलें 

रंग इधर से उधर हों 

एक से ना रहें


सफेद, सफेद ना रहे 

नीला, नीला ना रहे 

लाल, लाल ना रहे 

पीला, पीला ना रहे 


कुछ इधर से उधर हो 

कुछ उधर से इधर हो 


लेकिन 

अब 

कपड़े रंग छोड़ते नहीं 

रंग इतने मज़बूत कर दिये गए हैं 

कि चाहकर भी नहीं बदले जा सकते

साबुन ऐसे आ गए हैं जो 

रंग उतरने नहीं देते

मशीनें ऐसी आ गई हैं 

जो जैसा है उसको वैसा ही रहने देती हैं


कभी-कभी 

मन करता है 

कि छोड़ दूँ 

ये शहरी जीवन 

और कूट दूँ 

इन कपड़ों को

किसी घाट पर


राहुल उपाध्याय । 16 अक्टूबर 2026 । सिएटल 



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