Monday, March 15, 2010

एक था पेड़

एक था पेड़
जो लहलहाता था आंगन में
अब जल रहा है
मेरे फ़ायर-प्लेस में

एक था पशु
जो विचरता था बाग में
अब पक रहा है
मेरे किचन में

एक थे पूर्वज
जिनकी अस्थियाँ
बन के जीवाश्म ईधन
जल रही हैं
मेरी कार में

ऊर्जा
न बनती है
न मिटती है
सूत्र यही सोच कर
करता हूँ मन शांत मैं

सिएटल । 425-445-0827
15 मार्च 2010
==============
फ़ायर-प्लेस = fire place
किचन = kitchen
जीवाश्म ईधन = fossil fuel

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relationship
nature


3 comments:

janki jethwani said...

मैनेआज आपका ब्लाग देखा ,पढा बहुत अच्छा लगा कि पहले क्योंनहीं देखा।चलिये,देर आए दुरुस्त आए।वाकई आप कमाल का लिखते हैं।

Udan Tashtari said...

एक थे पूर्वज
जिनकी अस्थियाँ
बन के जीवाश्म ईधन
जल रही हैं
मेरी कार में


-सोच बहुत दूर तक गई है!!

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

बहुत खूब. बीज कभी मरता नहीं, दुबारा पल्लवित होता है.