Friday, October 25, 2019

चिट्ठी कोई लिखता नहीं है

चिट्ठी कोई लिखता नहीं है
बिन बुलाए कोई घर आता नहीं है
और पतझड़ है कि
रंग-बिरंगी संदेश घनेरे
बरसा रहा है 
दर पर मेरे
कुछ तो इतने आतुर
कि घुस आए घर में
क़दमों से लिपटे

रंग इतने कि इन्द्रधनुष लजाए
आकार इतने कि गिने  जाए 

इनसे मेरा क्या नाता है?
इनसे  मिलूँ तो इनका क्या जाता है?
क्यूँ इनका मैं फ़ोटो खींचूँ?
व्हाट्सैप के स्टेटस पे इन्हें लगाऊँ?
कैनवास पे मढ़ के दीवार सजाऊँ?

इनसे नहीं कोई नाता मेरा
तभी तो  इन्होंने मैंने इनको
आज तलक कोई ताना मारा

जब आते हैं
अच्छे लगते हैं
जब जाते हैं
सपने लगते हैं
मधुरसरससुवाससुहाने
प्रियकर इतने जितने  प्रियकर से भी प्रियकर गाने

चिट्ठी कोई लिखता नहीं है
बिन बुलाए कोई घर आता नहीं है
और पतझड़ है कि ...

राहुल उपाध्याय  25 अक्टूबर 2019  सिएटल

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