पहले शहर के बाहर
एक भव्य
टंकी हुआ करती थी
फिर
एक दौर ऐसा आया
कि हर घर की छत पर
सिंटेक्स की काली टंकी
नज़र आने लगी
कालांतर में
हर किचन में
एक आर-ओ का
रिवाज़ चल पड़ा
अब शनै: शनै:
इंसान ऊँट बनने लगा है
फ़र्क़ सिर्फ़ इतना है
कि पानी की थैली
पेट में न हो कर
पीठ पर है
दिल्ली |99588 - 90072
4 अक्टूबर 2010
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सिंटेक्स = Sintex
किचन = kitchen
आर-ओ = RO, or reverse osmosis
Monday, October 4, 2010
इंसान ऊँट बनने लगा है
Posted by Rahul Upadhyaya at 12:12 AM
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1 comments:
एकदम सही कहा आपने ....
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