सशक्त महिला ऐसी नगर में इक आई
संस्था की बन गई एक और
इकाई
राहुल उपाध्याय । 11 सितम्बर 2022 । सिएटल
सशक्त महिला ऐसी नगर में इक आई
संस्था की बन गई एक और
इकाई
राहुल उपाध्याय । 11 सितम्बर 2022 । सिएटल
इतवारी पहेली:
सशक्त महिला ऐसी नगर में ## ##
संस्था की बन गई एक और
###
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर।
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 18 सितम्बर को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 11 सितम्बर 2022 । सिएटल
यादों में बिछड़े यार की कितना सुकून है
चैन कहाँ मिलेगा वो जो मिलता है प्रेम में
हाथों में आईना नहीं कलम है धारदार
लिखने लगे हैं फ़ैसले संग-ओ-सलीब के
ढलने को वस्ल की रात हो तो चढ़ता फ़ितूर है
उजालों को जा के बोल दूँ कि आए वो देर से
ग़लती नहीं की आपने कि दिल चुरा लिया
दिल की तो आरज़ू यही कि ख़ुशबू में साँस ले
अच्छा ही है कि मरने पे सड़ता शरीर है
प्रेम छटाँक भर भी नहीं रहता है देह से
राहुल उपाध्याय । 16 सितम्बर 2022 । सिएटल
इतवारी पहेली:
सशक्त महिला ऐसी नगर में ## ##
संस्था की बन गई एक और
###
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर।
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 18 सितम्बर को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 11 सितम्बर 2022 । सिएटल
गुज़रा है कोई
पर रोया नहीं कोई
गीता के जैसे ज्ञानी हैं सब
बुरी भी नहीं बिलकुल थी वो
कि मरने से जिसके किसी को राहत मिली हो
क्या है वजह कि
हम रोते नहीं
रोना तो क्या
तिल भर भी दुख होता नहीं
क्या यही था जुर्म कि वो एक लम्बे समय तक टिकी रही
काम में कभी कोई कमी न रही
न लड़ी, न झगड़ी, न किसी के आड़े आई
अच्छा ही है कि कोई भी अमर नहीं
राहुल उपाध्याय । 8 सितम्बर 2022 । सिएटल
हज़ारों चुनाव जीतें हैं हम
हज़ारों चुनाव जीतेंगे हम
आज अगर हारे हैं हम
कल को ज़रूर जीतेंगे हम
हम जो निकट आए कुछ तो है दम
लम्बा सफ़र कुछ हुआ तो है कम
अगली पीढ़ी आगे बढ़े
इसलिए किया आज है श्रम
इस देश से उस देश तक
पग-पग पल-पल छाएँगे हम
दिल ने जो चाहा सदा करते हैं हम
जहां भर की बातों से न डरते हैं हम
कभी रहें दब के छल से, कपट से
अब हम हैं रखते मिल के कदम
इस राह की मंज़िल है जो
दमख़म से पाएँगे हम
राहुल उपाध्याय । 8 सितम्बर 2022 । सिएटल
क्यों पढ़ता हूँ कहानियाँ
जिनमें होता है मेरा सुख-दु:ख
क्यों पढ़ता हूँ कविताएँ
जिनमें होता है मेरा सुख-दु:ख
क्यों देखता हूँ फ़िल्में
जिनमें होता है मेरा सुख-दु:ख
क्या जीवन जीना ही काफ़ी नहीं है
जो मैं उन पलों को दोबारा जीता हूँ?
कहानियाँ पढ़ कर
कविताएँ पढ़ कर
फ़िल्में देख कर
मैं इसी जन्म में पुनर्जीवित हो जाता हूँ
एक ही जन्म में कई जन्मों को जी लेता हूँ
राहुल उपाध्याय । 5 सितम्बर 2022 । सिएटल