Saturday, September 17, 2022

इतवारी पहेली: 2022/09/18



सशक्त महिला ऐसी नगर में इक आई

संस्था की बन गई एक और 

इकाई 


राहुल उपाध्याय । 11 सितम्बर 2022 । सिएटल 








Re: इतवारी पहेली: 2022/09/11



On Sat, Sep 10, 2022 at 11:20 PM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


सशक्त महिला ऐसी नगर में ## ##

संस्था की बन गई एक और 

### 


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya



आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 18 सितम्बर को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 11 सितम्बर 2022 । सिएटल 















Friday, September 16, 2022

यादों में बिछड़े यार की कितना सुकून है

यादों में बिछड़े यार की कितना सुकून है

चैन कहाँ मिलेगा वो जो मिलता है प्रेम में 


हाथों में आईना नहीं कलम है धारदार 

लिखने लगे हैं फ़ैसले संग-ओ-सलीब के 


ढलने को वस्ल की रात हो तो चढ़ता फ़ितूर है 

उजालों को जा के बोल दूँ कि आए वो देर से 


ग़लती नहीं की आपने कि दिल चुरा लिया 

दिल की तो आरज़ू यही कि ख़ुशबू में साँस ले


अच्छा ही है कि मरने पे सड़ता शरीर है

प्रेम छटाँक भर भी नहीं रहता है देह से


राहुल उपाध्याय । 16 सितम्बर 2022 । सिएटल 




Saturday, September 10, 2022

इतवारी पहेली: 2022/09/11


इतवारी पहेली:


सशक्त महिला ऐसी नगर में ## ##

संस्था की बन गई एक और 

### 


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya



आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 18 सितम्बर को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 11 सितम्बर 2022 । सिएटल 















Thursday, September 8, 2022

गुज़रा है कोई

गुज़रा है कोई 

पर रोया नहीं कोई 

गीता के जैसे ज्ञानी हैं सब

बुरी भी नहीं बिलकुल थी वो

कि मरने से जिसके किसी को राहत मिली हो


क्या है वजह कि 

हम रोते नहीं 

रोना तो क्या 

तिल भर भी दुख होता नहीं 

क्या यही था जुर्म कि वो एक लम्बे समय तक टिकी रही

काम में कभी कोई कमी न रही

न लड़ी, न झगड़ी, न किसी के आड़े आई


अच्छा ही है कि कोई भी अमर नहीं 


राहुल उपाध्याय । 8 सितम्बर 2022 । सिएटल 


हज़ारों चुनाव जीतें हैं हम

हज़ारों चुनाव जीतें हैं हम

हज़ारों चुनाव जीतेंगे हम

आज अगर हारे हैं हम

कल को ज़रूर जीतेंगे हम


हम जो निकट आए कुछ तो है दम

लम्बा सफ़र कुछ हुआ तो है कम

अगली पीढ़ी आगे बढ़े

इसलिए किया आज है श्रम

इस देश से उस देश तक

पग-पग पल-पल छाएँगे हम


दिल ने जो चाहा सदा करते हैं हम

जहां भर की बातों से न डरते हैं हम

कभी रहें दब के छल से, कपट से

अब हम हैं रखते मिल के कदम

इस राह की मंज़िल है जो

दमख़म से पाएँगे हम


राहुल उपाध्याय । 8 सितम्बर 2022 । सिएटल 




Monday, September 5, 2022

क्यों पढ़ता हूँ कहानियाँ

क्यों पढ़ता हूँ कहानियाँ 

जिनमें होता है मेरा सुख-दु:ख


क्यों पढ़ता हूँ कविताएँ 

जिनमें होता है मेरा सुख-दु:ख


क्यों देखता हूँ फ़िल्में 

जिनमें होता है मेरा सुख-दु:ख


क्या जीवन जीना ही काफ़ी नहीं है 

जो मैं उन पलों को दोबारा जीता हूँ?


कहानियाँ पढ़ कर

कविताएँ पढ़ कर

फ़िल्में देख कर

मैं इसी जन्म में पुनर्जीवित हो जाता हूँ 

एक ही जन्म में कई जन्मों को जी लेता हूँ 


राहुल उपाध्याय । 5 सितम्बर 2022 । सिएटल