Thursday, December 6, 2007

life की file


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

जब journey complete हो जाती है
तब life की file delete हो जाती है

धन दौलत
इज़्ज़त शोहरत
देह काया
धन माया
मौत के बाद obsolete हो जाती है

Dean से पहचान हो
पैसों की खान हो
नदारद ईमान हो
अगर ऐसे इंसान हो
तो बिन पढ़े लिखे D. Litt. हो जाती है

पापी पेट के मारे
मिटे वर्ण-भेद सारे
डिग्री मिले
नौकरी मिले
इसलिए हर जाति दलित हो जाती है

अंग्रेज़ी बोलने से
संगीत पर डोलने से
टी-वी देखने से
मन के द्वार खोलने से
सुना है संस्कृति deplete हो जाती है

सिएटल
6 दिसम्बर 2007

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