Wednesday, May 27, 2009

टर्मिनल पेशेंट

कुत्ते हैं
लेकिन एक भी कुत्ता
यहाँ भोंकता नहीं है
पेड़ हैं
लेकिन एक भी पेड़
यहाँ कचरा करता नहीं है

शांति और सफ़ाई के
इस वातावरण में
मैं रहता हूँ ऐसे
जैसे अस्पताल में
रहता हो कोई

खाता हूँ
पीता हूँ
पढ़ता हूँ
सोता हूँ

मनोरंजन के लिए
कभी-कभार देख लेता हूँ टी-वी
बमबारी की ख़बरें देख कर
ख़ुद को रोक पाता नही हूँ
उठाता हूँ रिमोट
और बदल देता हूँ चैनल

मैं
कचरे के डब्बे में बंद
एक सड़ता हुआ पत्ता नहीं हूँ
मैं
मालकिन की गोद में
सोता हुआ एक कुत्ता नहीं हूँ

मैं हूँ इन सबसे अलग

मैं हूँ इन सबसे अलग
एक टर्मिनल पेशेंट
ये अलग बात है कि
दिखने में ऐसा
मैं लगता नहीं हूँ

सिएटल 425-445-0827
27 मई 2009
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टर्मिनल पेशेंट =terminal patient;
टी-वी = TV; रिमोट = remote ; चैनल = channel

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2 comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

बहुत मार्मिक कविता!

श्यामल सुमन said...

संवेदनशील और खुद के अस्तित्व के लिए संघर्ष का भाव। वाह।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com