Sunday, August 5, 2012

बिजली का होना, न होना

पिछले दिनों, जब भारत में बिजली नहीं थी
किसी के भी जीवन पर गिरी बिजली नहीं थी

स्कूल खुले थे
बच्चे हँसे थे
खाना पका था
बर्तन मंजे थे
कपड़े धुले थे
कपड़े सूखे थे
दुकानें खुलीं थीं
बसें चलीं थीं

फ़ेसबुक की अपडेट्स में भी न आई कमी थी
किसी की भी अपडेट में कोई शिकायत नहीं थी

निर्भरता ही नैनों में है नीर भरती
और दुनिया है कि समृद्धि का ढोंग रचती

सही मायनों में देखिए तो है बस वो ही आज़ाद
जो किसी बात पर भी किसी का है नहीं मोहताज

सिएटल । 513-341-6798
5 अगस्त 2012

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8 comments:

Anonymous said...

bakhwas!! Grow up dude

Anonymous said...

badiya hai Sir!!

Main bhi nahaya tha,
Dadhi banaya tha
Sundaass gaya tha
haath dhoya tha

Kaccha dhula tha
Chaddi sukhe the
Maggi khaya tha
aur phir aapka poem pada tha!!

Bijli nahi thi
woh maike jo gayi thi !!

Wah!! Wah!! Wah!!

Madan Saxena said...

बहुत सराहनीय प्रस्तुति.
बहुत सुंदर बात कही है इन पंक्तियों में.

http://madan-saxena.blogspot.in/
http://mmsaxena.blogspot.in/
http://madanmohansaxena.blogspot.in/

Candy Gupta said...

Too good.

Candy Gupta said...

Too good

Anonymous said...

ek alag soch...

Anonymous said...

Nirbharta hi nainon mein hai neer bharti - ek gehri baat kahi hai aapne!

Aur vaise bhi, bijli koi iPad thodi hai ki uske kho jaane ka darr ho :)

Anonymous said...

Rahul:

A positive twist on the blackout. Do not let Shinde or Moily read it otherwise they will get even more complacent!

Kamal