Thursday, November 10, 2016

अहित में भी हित निहित है

रावण पठ्ठा जीत गया

सीता दी गईं त्याग

बहकी-बहकी बातें कर रहें

हिलेरी समर्थक हो निराश


विधि के विधान को 

कब समझ सके हम और आप

राम जैसे पुत्र के होते

दशरथ ने किया संताप


अहित में भी हित निहित है

समझ लो यदि ये दर्शन 

कर्म की राह में फल की चाह

नहीं बनेगी अड़चन


राष्ट्रपति हैं दूर वाशिंगटन में 

अपने आसपास तुम देखो

घर-मोहल्ला-स्कूल-नगरपालिका 

इनके सुधार की सोचो


और बार-बार यूँ हाथ उठा के

ईश्वर से भी नहीं माँगो 

हाथ बढ़ाओ, गले लगाओ

ट्रम्प समर्थक को भी इंसां मानो


10 नवम्बर 2016

सिएटल | 425-445-0827

tinyurl.com/rahulpoems 


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