Monday, March 25, 2019

जिनसे हम आज़ाद हुए

जिनसे हम आज़ाद हुए
वे इतने सभ्य निकले 
कि नई पीढ़ी 
उन्हें ही गले लगा बैठी

और जिस भाई से उन्होंने 
हमें जुदा किया
उससे सम्बन्ध इतने बिगड़े
कि उससे बड़ा कोई दुश्मन नहीं 

यानी जाते-जाते भी
इतना करम कर गए
कि आस्तीन के साँप को
आस्तीन से जुदा कर गए?

ऐसा नहीं कि 
वे पहले असभ्य थे
और बाद में सभ्य हुए

वे जैसे थे
वैसे ही रहे
बस रिश्ता बदल गया

स्वामित्व ख़त्म होते ही
सम्बन्ध सँवर जाते हैं
बिगड़ते नहीं 

और जहाँ बराबरी का रिश्ता हो
और दोनों बराबरी करने पर उतर आए
तो सम्बन्ध बिगड़ जाते हैं 

राहुल उपाध्याय 25 मार्च 2019 सिएटल

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