Saturday, April 20, 2019

मेरे घर आईं मेरी प्यारी माँ

मेरे घर आईं मेरी प्यारी माँ 
करके कई सरहदें पार

उनकी पूजा में सेवा का है भाव
उनके भजनों में प्रभु का है गान
भोग ऐसे कि जैसे हों मिष्ठान 
घण्टी बजे तो लगे छेड़े सितार 

उनके आने से मेरे जीवन को
मिल गया ध्येयमिल गई है राह
देख-भाल कर के उनकी जी नहीं भरता
कर लूँ मैं चाहे कितनी बार

जिन्होंने रखा था कभी मेरा ख़याल 
उनका रखूँ मैं बन के मशाल
ढाल उनकी मैंमैं उनका साथी हूँ
साथ उनके हूँ सातों वार

पूछा उनसे कि पहले क्यों नहीं आईं
हँस के बोली कि मैं हूँ तेरा प्यार
मैं तेरे दिल में थी हमेशा से
घर में आई हूँ आज पहली बार

(साहिर से क्षमायाचना सहित)
राहुल उपाध्याय  20 अप्रैल 2019  सिएटल

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2 comments:

शिवम् मिश्रा said...

ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 21/04/2019 की बुलेटिन, " जोकर, मुखौटा और लोग - ब्लॉग बुलेटिन“ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

अनीता सैनी said...

बहुत सुन्दर