मैं तलाकशुदा हूँ
मुझसे मिलते रहा करो
मैं तुम्हारा दुःख-दर्द
ख़ूब समझता हूँ
क़ानून के दाँव-पेंच
समझा सकता हूँ
अकेलेपन में कितना आनंद है
दिखा सकता हूँ
तुम्हें अपनी आज़ादी का रास्ता
बता सकता हूँ
—
मैं तलाकशुदा हूँ
मुझसे मिलते रहा करो
तुम जब चाहो
मुझसे बात कर सकती हो
बेहिचक
मैं तुमसे चिपकूँगा नहीं
पीछे भी नहीं पड़ूँगा
जितनी मदद चाहिए
उतनी मदद भी कर दूँगा
बिना किसी अपेक्षा के
—-
मैं तलाकशुदा हूँ
मुझसे मिलते रहा करो
मेरा जीवन देख कर
तुम अपना विचार बदल दोगे
और एक सुखद जीवन
व्यतीत करोगे
राहुल उपाध्याय । 28 अक्टूबर 2026 । सिएटल

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