Saturday, October 10, 2020

इतवारी पहेली: 2020/10/11

इतवारी पहेली:


देश पर है जिनकी अमिट छाप, ### ##

पूरी तरह से सार्थक है नाम उनका ####


दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya 


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 18 अक्टूबर को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 11 अक्टूबर 2020 । सिएटल

हल: अमित आभ/अमिताभ



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Thursday, October 8, 2020

तेरे मेरे बीच में

https://youtu.be/XpJLpkxsutM 


तेरे मेरे बीच में 

कैसा है ये टेंशन अंजाना

मैंने नहीं जाना 

तूने नहीं जाना 


कितनी ज़ुबानें बोले लोग हमजोली 

क्यूँ नहीं बोले प्रेम की बोली

बोले जो शमा परवाना 


नींद न आए मुझे चैन न आए

लाख जतन करूँ समझ न आए

लड़ता है क्यूँ ज़माना


(आनंद बक्षी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 8 अक्टूबर 2020 । सिएटल 



मन तड़पत


मूवी होऽऽऽ

मन तड़पत मूवी दरसन को आज
मोरे उस बिन बिगड़े सकल काज
विनती करत, हूँ, रखियो लाज

कोरोना काल का मैं हूँ जोगी
मूवी रिलीज़ न जाने कब होगी
सुन मोरे व्याकुल मन की बात

बिन मूवी गान कहाँ से पाऊँ
दीजो गान वही सुन गाऊँ
सब मूवी जन पे तुम्हारा राज

(शकील बदायूनी से क्षमायाचना सहित)
राहुल उपाध्याय । 7 अक्टूबर 2020 । सिएटल

Saturday, October 3, 2020

इतवारी पहेली: 2020/10/04


इतवारी पहेली:


फिर से भारत माँ पर पोती ### ##

चिता की लकड़ी लेख चिंता # ## ##


दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya 


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 11 अक्टूबर को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 4 अक्टूबर 2020 । सिएटल

उत्तर: कालिख गई/का लिख गई 

जुर्म किया तो डरना क्या

जुर्म किया तो डरना क्या

जुर्म किया तो वकील भी है

किसी के बाप से डरना क्या


आज करेंगे मन की मर्जी 

जान भी जाए चाहे ज़माना

मौत वही जो मीडिया बेचे 

बाकी लोगों का मरना क्या


हमने जो ठानी हो के रहेगी

ये यही इसी रात चिता में जलेगी 

इसका जीना, इसका मरना 

इसके हक़ में करना क्या 


क्या बिगाड़ेगा कानून हमारा

चारों तरफ़ हैं पावर हमारा 

डरते नहीं जब किसी खुदा से

बन्दों से भला डरना क्या


(शकील बदायूनी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 3 अक्टूबर 2020 । सिएटल 


संज्ञा-सर्वनाम

मैं कौन हूँ? मैं क्या हूँ?

किस संज्ञा-सर्वनाम में खो अपनी पहचान दूँ?


जब ध्वनि नहीं, ध्यान था

तब भी मैं विद्यमान था

अब अनगिनत रंग हैं 

अनगिनत रूप हैं 

इस अक्स को क्यों कोई निरर्थक नाम दूँ?


मैं सूक्ष्म हूँ, विशाल हूँ 

मैं धरती हूँ, आकाश हूँ 

मैं प्रकट में हूँ, नेपथ्य में हूँ 

मैं सत्य में हूँ, असत्य में हूँ 

इस अनंत को क्यों कोई संकुचित नाम दूँ?


मैं कल हूँ, मैं आज हूँ

मैं ज्ञात हूँ, मैं राज़ हूँ 

मैं पंख हूँ, मैं परवाज़ हूँ 

न अंत हूँ, न आग़ाज़ हूँ 

किसी सीमा में इसे क्यों बाँध दूँ?


मैं कौन हूँ? मैं क्या हूँ?

किसी संज्ञा-सर्वनाम में क्यों खो अपनी पहचान दूँ?


राहुल उपाध्याय । 3 अक्टूबर 2020 । सिएटल 


Friday, October 2, 2020

जिस देश में निर्भया मरती है

https://youtu.be/wBhjvD-OHww 


न होंठों पे सच्चाई रहती है

न सड़कों पे सफ़ाई रहती है

हम उस देश के वासी हैं

जिस देश में निर्भया मरती है


ज़्यादा नहीं थोड़े ही दिन

जनता आक्रोश में रहती है

फिर अपने-अपने घरों में बंद

क्रिकेट ही देखा करती है


करोड़ों की है आबादी और

दो-चार ही आवाज़ उठती है

हम उस देश के वासी हैं

जिस देश में निर्भया मरती है


कुछ लोग जो ज़्यादा जानते है

विकास के आँकड़े बखानते हैं

कोई मर जाए तो इनको क्या

मृतकों की क़ीमत आँकते हैं


पाँच-पाँच लाख देकर सरकार

कर्म अपना पूरा करती है

हम उस देश के वासी हैं

जिस देश में निर्भया मरती है


नेता जो हमारे होते हैं

वो हवाई दौरा करते हैं

ज़मीं के हालात, ज़मीं के लोग

उन सबको को कहाँ पहचानते है


कुर्सी की महज़ है राजनीति

कुर्सी से ही चिपकी रहती है

हम उस देश के वासी हैं

जिस देश में निर्भया मरती है


(शैलेन्द्र से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 15 दिसम्बर 2019 । सिएटल