Tuesday, January 11, 2022

शीशा टूटा

शीशा टूटा

और हम दो से तीन हुए


जितना टूटा

उतना बिखरा

उतना पनपा


मैं और मेरे अक्स

काफ़ी हैं

आज़ादी का जश्न मनाने के लिए

ग़ुलामी की बू मिटाने के लिए

अकेलेपन का दर्द सहने के लिए

जेलर की उपस्थिति मिस करने के लिए 


आज़ादी की क़ीमत 

सिर्फ़ भगत सिंह ही नहीं चुकाते हैं 

कई बार 

ख़ुद को भी दाँव पर लगाना पड़ता है 


राहुल उपाध्याय । 11 जनवरी 2022 । सिएटल 




कितना आसान है

कितना आसान है 

पसंद-नापसंद करना

आज कुछ 

तो कल कुछ कहना


कौन टिका है 

अपने मूल्यों पर आख़िर 

ढाई आख़र में 

फिर वो वजन ही कहाँ है?


है प्यार अलग 

और रिश्ता अलग

रिश्तों में बंध कर

वो रहता नहीं है 


बदलना है शाश्वत 

और बदलते सभी हैं

तुम भी बदलोगे 

ये सोचा न था 


जब उतरती है शाम

होता है कुछ-कुछ 

ग़लत मत समझना 

ये प्यार नहीं है 


अच्छा हुआ 

मैं बीमार हो गया 

दूध का दूध 

और पानी का पानी हो गया 


राहुल उपाध्याय । 11 जनवरी 2022 । सिएटल 


मैं तो समझता था कि

मैं तो समझता था कि

तुम्हें भुलाने में ज़माने लगेंगे


कुछ ही दिन हुए हैं 

और मुझे कुछ भी याद नहीं 

तुम्हारा नाम, उम्र, जन्मदिन, फ़ोन नम्बर 

तुम्हारा हँसना-खिलखिलाना

तुम्हारे

बालों की ख़ुशबू 

होंठों का स्वाद

गाल पे तिल

नाक पे ग़ुस्सा 

हमारे मिलने की तारीख़ 

हमारे ब्रेकअप की रात

वो छोटा सा पर्स

वो तिरछे से बाल

वो कानों की बाली

कुछ भी याद नहीं 


मिलोगी कभी तो पूछना मुझसे 

मैं कुछ नहीं बताऊँगा 

कुछ नहीं बता पाऊँगा 


मैं तो समझता था कि …


राहुल उपाध्याय । 11 जनवरी 2022 । सिएटल 




Saturday, January 8, 2022

इतवारी पहेली: 01/09/2022


इतवारी पहेली:


गीत वही अच्छा जिसका हो ## #%#

रैली वहीं अच्छी जहाँ हो ###


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya 


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 9 जनवरी को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 9 जनवरी 2022 । सिएटल 
















Re: इतवारी पहेली: 01/02/2022



शनि, 1 जन॰ 2022 को अ 11:58 पर को Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> ने लिखा:

इतवारी पहेली:


शिरडी ही नहीं हर ### ##% हैं

जहाँ-जहाँ राहुल, ## ### है 


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya 


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 9 जनवरी को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 2 जनवरी 2022 । सिएटल 
















Thursday, January 6, 2022

उल्टा सीधा एक समान #18

उल्टा सीधा एक समान #18

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मलयालम, नवीन, नवजीवन आदि ऐसे शब्द हैं जो उल्टा सीधा एक समान हैं। बाएँ से दाएँ भी वही हैं जो दाएँ से बाएँ हैं। 


यह तो हुए शब्द। ऐसे ही शब्दों के समूह, यानी जुमले भी हो सकते हैं। जैसे कि:


नाहक है कहना। 


दिया गया शब्द आगे-पीछे-बीच में कहीं भी आ सकता है। 


आज का शब्द है:


सबर


राहुल उपाध्याय । 7 जनवरी 2022 । सिएटल









जनमानस से जो मन की बात करते हैं

जनमानस से जो

मन की बात करते हैं 

उन्हें जनमानस से

आज ये डर कैसा?


जनता जनार्दन 

जो उनका जन्मदिन मनाती है 

जयघोष करती है

जिनके गुणगान करते

और जिनके वीडियो फ़ॉरवर्ड करते

थकती नहीं है

वह आज उनकी

जान की प्यासी कैसे बन गई?

वो तो हमेशा हार-फूल लिए

इनके चरण धो कर

पीने को तैयार रहती है 


जिनके लिए इन्होंने 

देश का गौरव बढ़ाया 

सही मायने में आज़ादी दिलाई

एक्सप्रेस-वे बनाए

धार्मिक स्थल बनवाए

फ़्री में टीके लगवाए

वे कैसे इनके दुश्मन हो सकते हैं?

वे तो जान जोखिम में डालकर 

इनकी रक्षा करेंगे

कहीं चोर की दाढ़ी में

तिनका तो नहीं?

आख़िर क्यों वे जनता के बीच 

भयभीत महसूस करते हैं?


क्या वे सिर्फ़ ओलंपिक मेडल

विजेताओं के साथ ही 

हँस-बोल सकते हैं?


यह तो सुनहरा मौक़ा था

जनता को गले लगाने का

उनसे रू-ब-रू होने का

उनसे जुड़ने का

सबका दिल जीतने का


बजाय इसके

वे उन पर झूठा इलज़ाम 

लगा आए

और ख़ुद की नज़रों में भी 

गिर गए


जो जनता का संरक्षक है

जिसका छप्पन इंची सीना है

उसे यह कहना क़तई शोभा नहीं देता कि धन्यवाद मैं ज़िंदा लौट आया


जब वे खुद सुरक्षित नहीं है 

तो जनता को क्या ख़ाक 

सुरक्षित रखेंगे?


राहुल उपाध्याय । 6 जनवरी 2022 । सिएटल