Thursday, January 6, 2022

जनमानस से जो मन की बात करते हैं

जनमानस से जो

मन की बात करते हैं 

उन्हें जनमानस से

आज ये डर कैसा?


जनता जनार्दन 

जो उनका जन्मदिन मनाती है 

जयघोष करती है

जिनके गुणगान करते

और जिनके वीडियो फ़ॉरवर्ड करते

थकती नहीं है

वह आज उनकी

जान की प्यासी कैसे बन गई?

वो तो हमेशा हार-फूल लिए

इनके चरण धो कर

पीने को तैयार रहती है 


जिनके लिए इन्होंने 

देश का गौरव बढ़ाया 

सही मायने में आज़ादी दिलाई

एक्सप्रेस-वे बनाए

धार्मिक स्थल बनवाए

फ़्री में टीके लगवाए

वे कैसे इनके दुश्मन हो सकते हैं?

वे तो जान जोखिम में डालकर 

इनकी रक्षा करेंगे

कहीं चोर की दाढ़ी में

तिनका तो नहीं?

आख़िर क्यों वे जनता के बीच 

भयभीत महसूस करते हैं?


क्या वे सिर्फ़ ओलंपिक मेडल

विजेताओं के साथ ही 

हँस-बोल सकते हैं?


यह तो सुनहरा मौक़ा था

जनता को गले लगाने का

उनसे रू-ब-रू होने का

उनसे जुड़ने का

सबका दिल जीतने का


बजाय इसके

वे उन पर झूठा इलज़ाम 

लगा आए

और ख़ुद की नज़रों में भी 

गिर गए


जो जनता का संरक्षक है

जिसका छप्पन इंची सीना है

उसे यह कहना क़तई शोभा नहीं देता कि धन्यवाद मैं ज़िंदा लौट आया


जब वे खुद सुरक्षित नहीं है 

तो जनता को क्या ख़ाक 

सुरक्षित रखेंगे?


राहुल उपाध्याय । 6 जनवरी 2022 । सिएटल 







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