Tuesday, September 2, 2008

तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे

तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
हाँ तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
जब कभी भी पढ़ोगे कविता मेरी
सच देख कर तुम बिलबिलाओगे
हाँ तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
हो तुम मुझे यूँ ...

वो एन-आर-आई वो ईश्वर की बातें
जिनमें कोसे थे रिसते रिश्ते नाते
उन कविताओं की याद आएगी
जब खयालों में मुझको लाओगे
हाँ तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
हो तुम मुझे यूँ ...

मैं कविता में तुमको लिखता था
जब भी तुमको मनाना होता था
और सहारा लिया था पैरोडी का
वो नगमें किस तरह भुलाओगे
हाँ तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
हो तुम मुझे यूँ ...

मुझको पढ़े बिना क़रार न था
एक ऐसा भी दौर गुज़रा है
झूठ मानो तो देख लो स्टाटिस्टिक्स
मैं कहूंगा तो रूठ जाओगे
हाँ तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
हो तुम मुझे यूँ ...

सिएटल,
2 सितम्बर 2008
(हसरत जयपुरी से क्षमायाचना सहित)
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स्टाटिस्टिक्स = statistics

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4 comments:

manvinder bhimber said...

arree apne to sabhi kuch piro diya.... khoobsurat

seema gupta said...

मैं कविता में तुमको लिखता था
जब भी तुमको मनाना होता था
और सहारा लिया था पैरोडी का
वो नगमें किस तरह भुलाओगे
हाँ तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
हो तुम मुझे यूँ ...
" ha ha ha ha great experiment, liked it too much, well done"

Regards

COMMON MAN said...

wah-wah bahut achcha

Yogesh said...

wakai kabil-e-tareef
Bahut achhe...

a totally new re-creation of "Tum mujhe yu bhulaa na paaoge"

Awesome...