Saturday, November 10, 2012

खूबसूरत जज़बातों का अहसास

किसी की मूंगफली
किसी की चाट
किसी के खूबसूरत जज़बातों का अहसास


यही तो है जो
लेता है श्वास
रहता है साथ
मुझे तुमसे
देता है बांध


अहसासों का बांध
बांधता भी है
तो
यदा-कदा बहता भी है


बह के कभी
बन जाता है खार
बन जाता नहर
किसी वादी के कोने में जाता ठहर
ताकि
चावल उगें
फूल खिलें
किसी के सोए
अरमां जगें


किसी की मूंगफली
किसी की चाट
किसी के खूबसूरत जज़बातों का अहसास


यही तो है जो
लेता है श्वास ...


10 नवम्बर 2012
सिएटल ।
513-341-6798
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खार = न नदी, न नहर, इन दोनों से परे एक छोटा बहाव जो गाँव से हो कर गुज़रता है, और जिसमें बचपन में मैं खूब नहाया हूँ

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2 comments:

Anonymous said...

"अहसासों का बांध
बांधता भी है
तो
यदा-कदा बहता भी है"

कितनी सुन्दर बात कही है...

"खार" कभी देखा तो नहीं पर नीचे दी description से imagine किया जा सकता है। नदी और नहर से छोटा - शायद बहुत subtle अहसासों की तरह?

ई. प्रदीप कुमार साहनी said...

बहुत अच्छी बात कही आपने |