Monday, January 27, 2020

नारियल का तेल पिघलने लगा है

नारियल का तेल पिघलने लगा है
मौसम का प्रकोप बढ़ने लगा है

ग़म होते तो ख़ुशियाँ भी होतीं
चित्त हमारा अब थमने लगा है

सफ़र में है कुछ ऐसी कशिश
मंज़िल से डर लगने लगा है

कहने को अब कुछ भी नहीं
सोते-जागते दिल कहने लगा है

बैठे-बैठे सो जाता है 'राहुल'
और सोते-सोते जगने लगा है

राहुल उपाध्याय । 27 जनवरी 2020 । सिएटल

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