Saturday, August 22, 2026

ग़ालिब हुआ

ग़ालिब हुआ और यह भाव ग़ालिब हुआ 

कि कुछ भी न वाजिब हुआ 


कोई इधर गया, कोई उधर गया 

कोई भी न मेरी जानिब हुआ 


न मिलता है वो, न करता सलाम 

जब से वो शख़्स साहिब हुआ 


हुई ज़िंदगी पूरी तरह से तबाह 

जब से है कोड वाइब हुआ 


जब से हुए हैं नरेन्दर मोदी हमारे 

खाना बिना ब्राइब हुआ


राहुल उपाध्याय । 22 अगस्त 2026 । सिएटल 











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2 comments:

Ravindra Singh Yadav said...

आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर सोमवार 24 अगस्त 2026 को लिंक की गयी है....

http://halchalwith5links.blogspot.in
पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!


!

सुशील कुमार जोशी said...

वाह