Friday, January 2, 2026

अपराध जिसे कहते हैं

अपराध जिसे कहते हैं 

गांधी ही से होता है 

वकील था वो लेकिन 

अब मौन वो योद्धा है 


चलता है यहाँ सब कुछ 

ज़िम्मेदार नहीं कोई 

बकना है जो बक दो

चुनाव ही तो होना है


आँगन में चले आते हैं 

पतझड़ के कई पत्ते 

कचरा इन्हें समझूँ 

या बरसा ये सोना है 


घर से थे चले तड़के 

कॉलेज में कहीं पढ़ने

तालीम ने कहा हमसे 

अब छोड़ जो छोड़ा है 


अंधा न कोई मजनूँ 

अंधी न कोई लैला 

है प्यार मगर जैसे

इक पल का खिलौना है 


राहुल उपाध्याय । 2 जनवरी 2026 । सिएटल