Thursday, January 22, 2026

ज़िंदगी

हर तरह से ज़िंदगी है बस मेरी ज़िंदगी 

इसको पाने को कभी न कोई फ़ीस भरी


न मिली कहीं से, न दी किसी ने

नैसर्गिक है जैसे बहती नदी 


ये होती कहाँ है, ये उगती कहाँ है

बनाती नहीं इसे मशीन कोई 


ये ख़्वाब, ये हसरतें, ये जज़्बात मेरे

इनके ही ईंधन से सदा ये फली


आती है, जाती है, स्वयं ज़िंदगी 

इसके आगे कभी न मेरी चली


दे दूँ किसी को मन बहुत हुआ

पर हाथ में न आए ये उलझन बड़ी 


राहुल उपाध्याय । 22 जनवरी 2026 । दिल्ली 




Monday, January 19, 2026

पता नहीं

पता नहीं 

क्या पहनती थीं

सेंडल

चप्पल 

या जूतियाँ 

सूट

टॉप

या साड़ियाँ 


पता नहीं 

कैसे बाँधती थीं बाल 

लगाती थी लिपस्टिक 

या पहनती थीं बालियाँ 


पता नहीं 

कैसी दिखती थी वो


(देखने को तो देख लूँ 

हज़ारों सेल्फियां

बचा के रखी हैं

जो गूगल पे मैंने 

दिखा देगा मुझको

एक-एक पिक्सल वो उसके

और उगा देगा

काँटों का बगीचा 

यादों का सैलाब 

कहाँ की गलती 

कहाँ थे ग़लत) 


याद है लेकिन 

उसकी मुस्कान 

रूठना उसका

और टप-टप 

बहते वो आँसू 


पता नहीं कैसी 

होगी वो आज


क्या लड़ रही होगी 

आज भी उखड़ी प्रथाओं से

क्या जूझ भी रही होगी

कुछ अपनी व्यथाओं से

क्या प्यार होगा उसे

आज भी उससे 

जिसकी बाँहों में उसे

प्यार मिला था 

जीवन जीने का

आधार मिला था 


परित्यक्त थी

मैंने राह दिखाई 

जीवन जीने की

ज्योत जगाई


आई थी मेरे जीवन में धम से

छू के मुझे 

मुझको बदलने

छू के चल दी

उन्मुक्त गगन में 


याद है गीत मुझे 

पहले मिलन का


क्या यही प्यार है?


राहुल उपाध्याय । 20 जनवरी 2026 । दिल्ली 


Sunday, January 18, 2026

बड़ी से बड़ी मूर्तियां

बड़ी से बड़ी मूर्तियां 

खड़ी हैं चारों ओर

युवकों को रोज़गार नहीं 

भगदड़ का है शोर 


भगदड़ का है शोर 

कालिख में नहाए जनता 

पर्यावरण को रख ताक पर

बन रहा है पईसा 


बन रहा है पईसा

मिलावट जोरदार 

खा-खा के आदमी को

हो गए रोग चार


हो गए रोग चार

जिनका नहीं उपचार

अस्पताल के नाम पर

बस मंदिर हैं तैयार 


राहुल उपाध्याय । 19 जनवरी 2026 । सिएटल 


औपचारिक

अब हम बिना निमंत्रण 

किसी के यहाँ नहीं जाते हैं

और वे भी 

एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाने से

बाज नहीं आते हैं 


अब उनमें फ़ोटो और वीडियो 

जो शेयर किए जाते हैं 

उन्हें लाइक करना

लाज़मी हो जाता है 


बाद में

लिखित में

मेजबान को

थैंक्यू बोलना

अनिवार्य हो जाता है 

क्योंकि मुँह पर बोलने में

वो मज़ा नहीं 

जो बाद में सार्वजनिक 

रूप से दिया जाता है 


थोड़ा-बहुत 

चैटजीपीटी का भी

इस्तेमाल हो जाए

तो चार चाँद लग जाते हैं 


हम 

औपचारिक बनकर 

कितने गर्व से भर जाते हैं 


राहुल उपाध्याय । 18 जनवरी 2026 । दिल्ली 




Saturday, January 17, 2026

इतवारी पहेली: 2026/01/18

इतवारी पहेली:


न जाने किसका फ़ादर या ## ## है

लेकिन उसमें तनिक भी न #^## है


(पहली पंक्ति का पहला शब्द अंग्रेज़ी का है)


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है। जैसे कि मंगल —> #^##


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 25 जनवरी 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 18 जनवरी 2026 । दिल्ली 


Friday, January 16, 2026

नैन

कभी वो किसी के साथ होती है 

कभी मैं किसी के साथ 

हम चाहते हुए भी एक-दूसरे से

बात नहीं कर पाते हैं 

यही सोचकर ख़ुश हो जाते हैं 

कि हम कितनी क़िस्मत वाले हैं 

कि किन-किन हालातों से गुज़र के

हम छुप-छुप के नैन लड़ाते हैं 


राहुल उपाध्याय । 17 जनवरी 2026 । पुष्कर 





कभी जाप किया

कभी जाप किया, कभी नाम लिया 

जग में रह कर सब काम किया 


कभी जाग गया, कभी सो भी गया 

जग में रह कर सब भोग लिया 


कभी इश्क़ किया, कभी साथ दिया 

ख़ुद को सांचों में ढाल लिया


अच्छा-बुरा कुछ सोचा नहीं 

जो ठीक लगा उसे साध लिया 


कब होगा अंत कुछ ज्ञात नहीं

वक़्त के हाथों सब छोड़ दिया 


राहुल उपाध्याय । 16 जनवरी 2026 । दिल्ली 

Wednesday, January 7, 2026

पूछो न कैसे मैंने एप्प बनाई

पूछो न कैसे मैंने एप्प बनाई 

ना कोई डेव है, ना कोई पी-एम 

बिन क्यू-ए ही मैंने एप्प बनाई 


इक मिला कर्सर, इक कोपायलट

दोनों ने बना दी मेरी एप्प ये झटपट

हर्षत-गर्जत बाँछें खिल आईं


ना कोई यूज़र, ना कोई मार्केट

बिन फंड्स कैसे होगी यूएट 

तड़पत-तरसत आँख भर आई


राहुल उपाध्याय । 7 जनवरी 2026 । सिएटल 

Sunday, January 4, 2026

इतवारी पहेली: 2026/01/04

इतवारी पहेली:

नहीं मिलेगा दुनिया में ऐसा कोई ##
जहाँ हो कृष्ण को हाँ और राम # #

इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर।

जैसे कि:

हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की

ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।

Https://tinyurl.com/RahulPaheliya

आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 11 जनवरी 2026 को - उत्तर बता दूँगा।

राहुल उपाध्याय । 4 जनवरी 2025 । सिएटल

Re: इतवारी पहेली: 2025/12/28



On Sun, Dec 28, 2025 at 12:27 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


बारिश से बचने के हैं कुल # ### 

उनमें से एक है जाओ नीचे ### #


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 4 जनवरी 2025 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 28 दिसम्बर 2025 । सिएटल 


Friday, January 2, 2026

खोज रही है जल जलमय अंखियाँ

का करूँ जल भी रास न आए 

खोज रही है जल 

जलमय अखियाँ 

पास ना पाए


जब भी कोई नेता आए 

मनवा मोरा काँपे 

का बतलाऊँ 

का समझाऊँ 

नैन के ये धारे

है मतवारे 

हाल हमारे

छुपे न छुपाए 

का का सुनाऊँ 

कैसे उजड़ी है बगिया


भोर भई और साँझ ढली रे

सूरज भी डूबे जाए

ये जग सारा

देखे तमाशा

दसियो रील बनाए

मैं घबराऊँ

डर-डर जाऊँ

कोई ना प्यास बुझाए

का के बुलाऊँ 

कहूँ बदले ये दुनिया 


राहुल उपाध्याय । 2 जनवरी 2026 । सिएटल 



अपराध जिसे कहते हैं

अपराध जिसे कहते हैं 

गांधी ही से होता है 

वकील था वो लेकिन 

अब मौन वो योद्धा है 


चलता है यहाँ सब कुछ 

ज़िम्मेदार नहीं कोई 

बकना है जो बक दो

चुनाव ही तो होना है


आँगन में चले आते हैं 

पतझड़ के कई पत्ते 

कचरा इन्हें समझूँ 

या बरसा ये सोना है 


घर से थे चले तड़के 

कॉलेज में कहीं पढ़ने

तालीम ने कहा हमसे 

अब छोड़ जो छोड़ा है 


अंधा न कोई मजनूँ 

अंधी न कोई लैला 

है प्यार मगर जैसे

इक पल का खिलौना है 


राहुल उपाध्याय । 2 जनवरी 2026 । सिएटल