Friday, January 2, 2026

खोज रही है जल जलमय अंखियाँ

का करूँ जल भी रास न आए 

खोज रही है जल 

जलमय अखियाँ 

पास ना पाए


जब भी कोई नेता आए 

मनवा मोरा काँपे 

का बतलाऊँ 

का समझाऊँ 

नैन के ये धारे

है मतवारे 

हाल हमारे

छुपे न छुपाए 

का का सुनाऊँ 

कैसे उजड़ी है बगिया


भोर भई और साँझ ढली रे

सूरज भी डूबे जाए

ये जग सारा

देखे तमाशा

दसियो रील बनाए

मैं घबराऊँ

डर-डर जाऊँ

कोई ना प्यास बुझाए

का के बुलाऊँ 

कहूँ बदले ये दुनिया 


राहुल उपाध्याय । 2 जनवरी 2026 । सिएटल 



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1 comments:

सुशील कुमार जोशी said...

मंगलकामनाएं नव वर्ष की