का करूँ जल भी रास न आए
खोज रही है जल
जलमय अखियाँ
पास ना पाए
जब भी कोई नेता आए
मनवा मोरा काँपे
का बतलाऊँ
का समझाऊँ
नैन के ये धारे
है मतवारे
हाल हमारे
छुपे न छुपाए
का का सुनाऊँ
कैसे उजड़ी है बगिया
भोर भई और साँझ ढली रे
सूरज भी डूबे जाए
ये जग सारा
देखे तमाशा
दसियो रील बनाए
मैं घबराऊँ
डर-डर जाऊँ
कोई ना प्यास बुझाए
का के बुलाऊँ
कहूँ बदले ये दुनिया
राहुल उपाध्याय । 2 जनवरी 2026 । सिएटल

1 comments:
मंगलकामनाएं नव वर्ष की
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