"क्या तुम मुझसे प्यार करते हो?"
पूछा था उसने
और मैं जवाब तुरंत नहीं दे पाया था
देता भी कैसे?
अगर कभी किसी ने मुझसे प्यार किया होता
या मैंने किसी से
तब तो मुझे पता भी होता कि
प्यार किस चिड़िया का नाम है
"किस सोच में पड़ गए?
जल्दी बताओ, तुम मुझसे प्यार करते हो या नहीं?"
अक्सर ऐसे प्रश्नों का उत्तर रटा-रटाया होता है
जैसे कि नौकरी के इंटरव्यूह के वक्त
"वीकेंड पे काम करोगे?"
"जी, साब।"
"प्रोग्रामिंग आती है?"
"जी, साब।"
"ट्रेवेल करोगे? हफ़्तों-हफ़्तों घर से दूर रहोगे?"
"जी, साब।"
लेकिन इस बार उत्तर सोच-समझ कर देना चाहता था
क्योंकि मुझे नौकरी में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी
होती भी कैसे?
शादी जो हो चुकी है
दो बच्चे हैं
और उम्र ढल रही है
"अरे बाबा, क्यों टाईम खा रहे हो?
जल्दी से कहो ना, हाँ या ना?"
वो सवाल कुछ इस अंदाज में पूछ रही थी
जैसे जिरह के वक्त वकील गवाह से लीडिंग क्यूश्चन पूछे
और विपक्षी वकील फौरन कहे
"ऑब्जेक्शन माई लार्ड, मेरे गवाह को बहकाया जा रहा है"
जब सवाल के अंदर ही अपेक्षित जवाब मौजूद हो
तो जवाब देना मुश्किल हो जाता है
जैसे अपनी मर्जी की कोई कीमत ही नहीं!
इस बार
मैं अड़ गया
और बहुत सोच-विचार के बाद
इस नतीजे पर पहुँचा कि
हम प्यार उसी से करते हैं
जिसके खो जाने का डर हो
और इस संदर्भ में
अगर मैं किसी से
प्यार करता हूँ
तो मेरे आई-पॉड से
और इस देश से,
जिसकी आब-ओ-हवा का
मैं आदी हो चुका हूँ
इंसान?
इंसान को खोने का क्या डर?
जो आया है
वो एक दिन जाएगा
सो जाएगा
जो आज जागता है
वो कल सो जाएगा
इसमें इतना हैरान-परेशान होने की क्या बात है?
विधि का विधान है
वो तो हो के रहेगा
लेकिन आई-पॉड?
आज है और कल नहीं?
ये कहाँ की तुक है?
इसे बहुत सहेज कर
सम्हाल कर
रखता हूँ
कहीं कोई खरोंच न लग जाए
इसलिए कवर में रखता हूँ
किसी गलत इंसान के हाथ न लग जाए
इसलिए सदा अपने साथ रखता हूँ
और देश?
अगर देश-निकाला हो गया
तो समझ लीजिए जीते-जी मौत हो गई
जिसके लिए इतने पापड़ बेले हैं
उसको ऐसे कैसे जाने दूँ?
जान दे दूँगा पर इसे जाने न दूँगा
यही तो मेरा अस्तित्व है
यही तो मेरी पहचान है
यह है तो मैं हूँ
यह नहीं
तो मैं कुछ भी नहीं
सिएटल | 425-898-9325
9 जून 2010
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वीकेंड = weekend; प्रोग्रामिंग = programming;
ट्रेवेल = travel; टाईम = time;
लीडिंग क्यूश्चन = leading question;
ऑब्जेक्शन माई लार्ड = Objection, My Lord!
आई-पॉड = iPod; कवर = cover
Wednesday, June 9, 2010
क्या तुम मुझसे प्यार करते हो?
Posted by Rahul Upadhyaya at 12:51 AM
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Labels: August Read, relationship
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2 comments:
बढिया रचना है बधाई।
bahut khoob sir...
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