एक लंच की क़ीमत में
चार बनियान लिए जा सकते हैं
समझ नहीं आता है कि
क्या कपड़े सस्ते हो गए हैं
या लंच महँगा
किसकी किससे तुलना करूँ
बड़ा पेचीदा सवाल है
मैं इकॉनोमिक्स में
हमेशा कमज़ोर रहा
कहीं भी, कुछ भी
मिक्स कर देता हूँ
और मेरे प्रकाशक ने भी
मेरी किताब की क़ीमत
चार बनियान जितनी ही लगाई है
राहुल उपाध्याय । 8 अप्रैल 2026 । सिएटल

0 comments:
Post a Comment