Tuesday, April 14, 2026

प्रतिमा

कल एक प्रतिमा लगी 

जहां पहले से एक प्रतिमा थी


किसकी थी, कौन था, हमें क्या पता? 

हमने जानने की कोशिश भी नहीं की

करके भी क्या करते? 


जिसकी लगाई 

उसे तो हम जानते हैं

बचपन से पढ़ते आ रहे हैं


इतना जानते हुए भी 

तीन वाक्य से ज्यादा नहीं बोल पाएंगे 

कि उन्होंने अमेरिका में जाकर 

अपने देश का डंका बजाया था

बचपन में भगवान को नहीं मानते थे

फिर परमहंस के चेले बन गए 

और दुनिया भर को ज्ञान बांटा 


समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति होने के कारण

हमारा उत्तरदायित्व बनता है कि 

हम कुछ ऐसे काम करते रहें 

जिनसे लोगों को लगे कि 

हमने कुछ बढ़िया किया

चाहे कोई पलट कर 

फिर देखे तक नही


सॉफ्टवेयर का काम बहुत हो गया

अब थोड़ा लोहा-लंगड़ भी संभाल लिया जाए

कुछ दिन बाद देवी-देवता भी 

सड़क पर आ जाएँगे 

तब जाकर हमारा सपना पूरा होगा 


राहुल उपाध्याय । 14 अप्रैल 2026 । सिएटल 




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