मैं आया इधर से, वो गए उधर से
मिलना भी चाहते तो कैसे मिलते?
तन्हा-तन्हा कहाँ रहता है कोई
पूर्वाग्रह भी तो साथ रहते हैं सबके
लम्हों की कीमत न समझा ये दिल
सदा सेफ़ खेला कल के डर से
न गाड़ी की, न आए वो पैदल
घर पर रहे, न निकले वो घर से
न पूछा, न पोंछे, आंसू के धारे
नैन बिचारे बरसे तो बरसे
राहुल उपाध्याय । 27 अप्रैल 2026 । सिएटल

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