Thursday, April 2, 2026

उथल-पुथल

ये जो मन की 

उथल-पुथल है 

अच्छी है

पता चलता है कि

मैं जीवित हूँ 


उसका मुझसे रूठ जाना

संकेत है कि

मैंने कुछ अपने मन का किया


उसका किसी से जुड़ जाना

संकेत है कि

मुझे अभी और 

सँवरना है

सुधरना है 

निखरना है 

खतरे मोल लेना है 


वो मिलती नहीं 

मगर मिलती ज़रूर है 

इसे आधा ख़ाली कहूँ 

कि आधा भरा

इसी उधेड़बुन में

सोता हूँ 

जगता हूँ 

स्वप्न देखता हूँ 

जगने के ख़्वाब देखता हूँ 


जीवन

न 'गाइड' है

न 'हम दिल दे चुके सनम'

या 'सिलसिला'

कि ऊँट 

किसी करवट तो बैठेगा 


जीवन की कहानी 

कभी ख़त्म नहीं होती 

न सुखांत में

न दुखांत में

चलती रहती है 


धोखा देने वाला 

धोखा देता रहता है 

पकड़ा नहीं जाता

सज़ा नहीं पाता

क्रम चलता रहता है


ये उथल-पुथल 

अच्छी है


राहुल उपाध्याय । 2 अप्रैल 2026 । सेन फ्रांसिस्को 

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