तुम्हारी खुशबू से मेरा घर महक रहा है
यह मेरा-तुम्हारा ही मुझे बस खटक रहा है
तुम आए तो दिल को सुकून मिला
बहारों को जैसे ‘समन’ मिला
खिले फूल, मुस्कुराई फिजा
हाथों को नहीं तो क्या
सांसों को तो तुम्हारा वजूद मिला
राहुल उपाध्याय । 16 अप्रैल 2026 । सिएटल
तुम्हारी खुशबू से मेरा घर महक रहा है
यह मेरा-तुम्हारा ही मुझे बस खटक रहा है
तुम आए तो दिल को सुकून मिला
बहारों को जैसे ‘समन’ मिला
खिले फूल, मुस्कुराई फिजा
हाथों को नहीं तो क्या
सांसों को तो तुम्हारा वजूद मिला
राहुल उपाध्याय । 16 अप्रैल 2026 । सिएटल
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