हैं रंगीन सभी, कोई रंगहीन नहीं
नवजात शिशु होता गमगीन नहीं
भूख-प्यास लगे शिशु रोता है
किंतु होता वो गमगीन नहीं
ये प्यार-वफा, शिकवा-शिकवे
हैं बेबुनियाद, कोई जमीन नहीं
अभ्यास करो, अरदास नहीं
अरदास से चलती मशीन नहीं
हो पेरिस, लंदन, या सैलाना
कौन सी जगह जो हसीन नहीं
राहुल उपाध्याय । 20 अप्रैल 2026 । सिएटल

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