Saturday, April 4, 2026

चराग ढूँढ लिया

चराग ढूंढ लिया 

बुझते चिराग ने 

दुनिया ये जल रही है 

बुझते चिराग से


सुन के हज़ार क़िस्से 

हमने ये आज माना 

हर बार ही नए हैं 

क़िस्से ये प्यार के


मुझसे ख़फ़ा है आज जो 

बरसो के मीत है 

कहते हैं आप ही क्यूँ 

दुख औरों के काटते


कहता नहीं था लेकिन

कहता हूँ आज सब से

करना है प्यार कर लो 

रख के दिमाग़ घर पे


पति और पत्नी दोनों बस 

काम के लिए हैं 

इक आशिक़ी वो शय है 

जो झोली में प्यार भर दे


राहुल उपाध्याय । 4 अप्रैल 2026 । रोग रिवर (बाग़ी नदी), ओरेगन


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1 comments:

Digvijay Agrawal said...

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में सोमवार 06 एप्रिल, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!