Thursday, April 7, 2022

राज़दार रहें सब राज़दार

कितने शवों को

कितनी बार

छोड़ा मैंने 

कर के प्यार


अंत समय में

आई बुद्धि 

ये नहीं मेरी

असली हस्ती

छोड़ा जल्दी 

बदबूदार


होश आया तो

होंठ सूखे थे

बंधु-बाँधव से

तार टूटे थे

कह ना पाया

कुछ भी यार


अगला अपाइंटमेंट 

था फिर रेडी

चड़ गया वेदी

भेड़ की भाँति 

छोड़ चित्कार

भरी किलकार


आवागमन का

चलता दौर

इसके आगे

कुछ नहीं और

राज़दार रहें

सब राज़दार 


राहुल उपाध्याय । 7 अप्रैल 2022 । सिएटल 




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