Tuesday, September 27, 2022

वो हैं मासूम

वो हैं मासूम

मासूमियत का पता देते हैं 

हम तो आशिक़ हैं

आशकी का मज़ा लेते हैं 


वक्त आए जो कभी 

सब ख़त्म हुआ पाते हैं 

कभी सेल्फ़ी तो 

कभी ❤️ से हवा देते हैं 


नए ज़माने के नए रंग

कहाँ मालूम हमको

वो बताते हैं और हम

सर को हिला देते हैं 


वो हैं कमसिन और 

हैं ज्ञान की खान मगर

उनकी महफ़िल में 

हम आदाब बजा देते हैं 


हाँ ये रिश्ता है दूर का

फ़ासले का सही

ये क्या कम है कि

वो दीदार करा देते हैं 


राहुल उपाध्याय । 27 सितम्बर 2022 । सिएटल 

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