मुझे मिलना है तुमसे
मिलना है तुमसे
पर अब कहां फिर मिल सकूंगी
तुम किसी और के हो के भी
न किसी और के हो
कभी-कभी तो लगता है कि
नहीं इस दौर के हो
मैं हूं राधा
और तुम किशन हो मेरे
सात जन्मों का नहीं
जन्मों-जन्मांतर का है साथ हमारा
बांधेंगे हमें क्या सात वो फेरे
जहाँ तुम रहोगे
वहाँ मैं रहूँगी
स्थूल काया का
कोई भरोसा नहीं
नौकरी करेगी
घर संभालेगी
इधर-उधर भटका करेगी
जहाँ तुम रहोगे
वहाँ मैं रहूँगी
मुझे मिलना है तुमसे
मिलना है तुमसे
पर अब कहां फिर मिल सकूंगी
राहुल उपाध्याय । 16 अप्रैल 2026 । सिएटल
