इतवारी पहेली:
गेंद गिरती है क्योंकि हर तरफ ### है
रोज़ी हँसती है क्योंकि पति, #, ## है
(पहली पंक्ति का शब्द अंग्रेज़ी का है। दूसरी पंक्ति का दोनों शब्द अंग्रेज़ी के हैं)
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 1 नवम्बर 2026 को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 25 अक्टूबर 2026 । सिएटल
Sunday, November 1, 2026
Re: इतवारी पहेली: 2026/10/25
Posted by Rahul Upadhyaya at 6:48 AM
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Wednesday, October 28, 2026
तलाक़
मैं तलाकशुदा हूँ
मुझसे मिलते रहा करो
मैं तुम्हारा दुःख-दर्द
ख़ूब समझता हूँ
क़ानून के दाँव-पेंच
समझा सकता हूँ
अकेलेपन में कितना आनंद है
दिखा सकता हूँ
तुम्हें अपनी आज़ादी का रास्ता
बता सकता हूँ
—
मैं तलाकशुदा हूँ
मुझसे मिलते रहा करो
तुम जब चाहो
मुझसे बात कर सकती हो
बेहिचक
मैं तुमसे चिपकूँगा नहीं
पीछे भी नहीं पड़ूँगा
जितनी मदद चाहिए
उतनी मदद भी कर दूँगा
बिना किसी अपेक्षा के
—-
मैं तलाकशुदा हूँ
मुझसे मिलते रहा करो
मेरा जीवन देख कर
तुम अपना विचार बदल दोगे
और एक सुखद जीवन
व्यतीत करोगे
राहुल उपाध्याय । 28 अक्टूबर 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 5:22 AM
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Monday, October 26, 2026
ग्रीन कार्ड दे दो
ट्रम्प साहिब
ग्रीन कार्ड दे दो
कर दो काम ज़रा सा
ऐ दिल दीवाने, खेल है क्या जाने
दर्द भरी ये राह कहाँ से
हम लोगों ने पाई
हो गई है रुसवाई
टूट गया मैं
टूट के मैं हूँ
तुमको हाल सुनाता
कर दो काम ज़रा सा
याद दिलानी है
एक कहानी है
आज जो तुमको याद नहीं है
या शायद नहीं भूले
हो तुम कैसे जीते
वोट दिलाएं हमने तुमको
फिर भी हाल बुरा सा
कर दो काम ज़रा सा
बरसों बीत गए
हमको आए यूएस
छुरी बन के
गर्दन पे चल दीं
वीपी वैन्स की बातें
मारे हमको ताने
तुम संग एक विनती हमारी
समझो दीन की भाषा
कर दो काम ज़रा सा
राहुल उपाध्याय । 26 अक्टूबर 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 8:30 AM
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Saturday, October 24, 2026
इतवारी पहेली: 2026/10/25
इतवारी पहेली:
गेंद गिरती है क्योंकि हर तरफ ### है
रोज़ी हँसती है क्योंकि पति, #, ## है
(पहली पंक्ति का शब्द अंग्रेज़ी का है। दूसरी पंक्ति का दोनों शब्द अंग्रेज़ी के हैं)
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
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राहुल उपाध्याय । 25 अक्टूबर 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 10:40 PM
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Thursday, October 22, 2026
हैं ग़ालिब कहाँ
हैं ग़ालिब यहाँ
कि हैं ग़ालिब वहाँ
किसको पता
हैं ग़ालिब कहाँ
लिखने लगो
तो लिखते रहो
समझे ने समझे
कोई तेरी ज़ुबाँ
ये ज़मीं बँट गई
आसमाँ बँट गया
कितने खेमों में
बँट गया जहाँ
है बंजर कहीं
कहीं मंज़र नया
ज़मीं पे छाया
ये कैसा समाँ
आँसू भी कहाँ
हैं अपने मेरे
ये भी अपनों ने
दिए हैं हाँ
राहुल उपाध्याय । 22 अक्टूबर 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 7:17 AM
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Friday, October 16, 2026
रंग
में चाहता हूँ
कि रंग बदलें
रंग इधर से उधर हों
एक से ना रहें
सफेद, सफेद ना रहे
नीला, नीला ना रहे
लाल, लाल ना रहे
पीला, पीला ना रहे
कुछ इधर से उधर हो
कुछ उधर से इधर हो
लेकिन
अब
कपड़े रंग छोड़ते नहीं
रंग इतने मज़बूत कर दिये गए हैं
कि चाहकर भी नहीं बदले जा सकते
साबुन ऐसे आ गए हैं जो
रंग उतरने नहीं देते
मशीनें ऐसी आ गई हैं
जो जैसा है उसको वैसा ही रहने देती हैं
कभी-कभी
मन करता है
कि छोड़ दूँ
ये शहरी जीवन
और कूट दूँ
इन कपड़ों को
किसी घाट पर
राहुल उपाध्याय । 16 अक्टूबर 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 8:44 AM
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Wednesday, October 14, 2026
कभी इस पर लिख
कभी इस पर लिख
कभी उस पर लिख
हर बात पर
सबको पका के लिख
कोई पढ़ रहा हो
तो उसे दे बता
तेरी धमनियों में
बहता रक्त नहीं
कुछ करने को
तेरे पास वक़्त नहीं
क्रांति हो तो
कोई और लाए
तू तो बस अपना
फ़ोन चलाए
क्यूँ जुटे नहीं
क्यूँ मरे नहीं
क्यूँ वीरता के
क़िस्से गढ़े नहीं
है तीज-त्योहार
तो नृत्य कर
भजन गा-गा के
जाम कर
कुछ खा मीठा
कुछ खिला मीठा
बेमौके पर न
सेहत की बात कर
तू दीप जला
तू घर सजा
परंपरा से हटकर
न कुछ और कर
जो चल रहा
उसे चलाए जा
कभी इस पर लिख
कभी उस पर लिख
हर बात पर
सबको पका के लिख
राहुल उपाध्याय । 14 अक्टूबर 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 5:29 PM
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