Thursday, July 9, 2026

करूँ भला

करूँ भला तो निमित्त हूँ केवल

हो जाए गुनाह तो दोष है मेरा 


वो बच गया भीषण स्ट्रोक से एक दिन

ईश्वर दयालु है, उसने बचा लिया 


तड़प के मर गई बच्ची अस्पताल में

सारा क़सूर दरिंदों का ही है 


बनाया मंदिर, राम आ गए

पर किसी काम के नहीं 

सीसीटीवी न हो तो 

चोर हाथ ही न आए


दिन-रात खड़े 

न जाने क्या देखते हैं 

नाक की सीध में 

कुछ हो तो देख भी ले

इधर-उधर भला वो कहाँ देखते हैं 


राहुल उपाध्याय । 9 जुलाई 2026 । सिएटल 




मैं न होता

मैं न होता तो खुदा भी न होता

भला भी न होता, बुरा भी न होता


अपने हाथों से बहुत कुछ लिखा है मैंने

प्रेस न होती तो कुछ लिखा भी न होता


आए दिन यहाँ होते झगड़े बहुत हैं 

अकल न होती तो कोई लड़ा भी न होता


दंड देने को हम सब कबसे तैयार बैठे हैं

देते नसीहत तो लफड़ा खड़ा भी न होता


अपनों को कब तक हम बचाते फिरेंगे

हम होते हरिश्चंद्र बाल बाँका भी ना होता


राहुल उपाध्याय । 9 जुलाई 2026 । सिएटल 











Sunday, July 5, 2026

Re: इतवारी पहेलीः 2026/06/28

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On Sun, Jun 28, 2026 at 4:11 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


चेतन के चक्कर में उसने मार दिया ### को

जाकर ऊँचाई पर धकेला मंगेतर # ## को


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 5 जुलाई 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 28 जून 2026 । सिएटल 


Sunday, June 28, 2026

इतवारी पहेलीः 2026/06/28

इतवारी पहेली:


चेतन के चक्कर में उसने मार दिया ### को

जाकर ऊँचाई पर धकेला मंगेतर # ## को


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 5 जुलाई 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 28 जून 2026 । सिएटल 


Sunday, June 21, 2026

डीपी में नही

डीपी में नहीं

पासवर्ड में है वो

मेरी प्रेयसी, मेरी जान

मेरे दिल में रहती है


ना सेल्फी है कोई

ना तस्वीर कोई

मेरी जान मेरी आँखों में रहती है


मेरी आँखों की चमक

मेरे कपड़ों के रंग

मेरे घर की सुगंध

इन सब में विद्यमान रहती है

मेरी प्रेयसी 

मेरे साथ 

दिन-रात रहती है


राहुल उपाध्याय । 21 जून 2026 । सिएटल 

Sunday, June 14, 2026

मोहब्बत की डगर मुस्किल

मोहब्बत की डगर मुश्किल

मोहब्बत करके देखेंगे

भले ही दूर हो मंज़िल 

मोहब्बत करके देखेंगे


तुम्हारी करके हम तारीफ़ 

तुम्हारा दिल जीत ही लेंगे

कभी तुम आओ तो ग़ाफ़िल 

मोहब्बत करके देखेंगे


नफ़रतों के दौर में ऐ दिल

सुना तू गीत मोहब्बत के

कभी तो पिघलेंगे संग दिल

मोहब्बत करके देखेंगे


तुम्हें भी हो लगाव हमसे

कहाँ तक ये मुनासिब है

अगरचे हम नहीं क़ाबिल

मोहब्बत करके देखेंगे


कहाँ तुमने कहा हमसे 

कि हमसे मिल नहीं सकते

यही तो है मेरा हासिल

मोहब्बत करके देखेंगे


राहुल उपाध्याय । 14 जून 2026 । सिएटल 

साइकिल चला रही है

साइकिल चला रही है, 

ईंधन बचा रही है

खटना ही जिंदगी है, 

खटती ही जा रही है


देखो पी-एम

गए विदेश 

लेकर के साथ मेलोडी

देखेगा कौन

पूछेगा कौन

जनता के दुख दर्द की

मरती है रोज़ थोक में 

मरती ही जा रही है


आगे चुनाव 

पीछे चुनाव 

हर रोज़ चुनाव-चुनाव 

इसको खैरात, 

उसको खैरात, 

हर तरफ़ खैरात-खैरात

सट्टा लगा रही है 

सत्ता बचा रही है


आए पी-एम 

गए पी-एम 

ऐसे नहीं है देखे

सर पे है ताज 

हाथ में है माइक 

गड़ते हैं झूठे क़िस्से 

सुनती वो जा रही है

सुनती ही जा रही है


राहुल उपाध्याय । 14 जून 2026 । सिएटल