Monday, July 13, 2026

पढ़ लिख के

पढ़ लिख के 

हमने किया क्या है? 

कभी खुद को 

तो कभी सबको गधा कहा है


जो जानते हैं 

वे दुखी हैं

जो अनजान है

खुश ही दिखा है


आते-जाते मौसमों में 

एक बारिश ही है 

जिसकी ज़रूरत 

हर कोई समझता है


ये दुनिया की समझदारी 

हमें न रास आई

कभी शांति का 

तो कभी युद्ध का दिया मशवरा है


क्या है ये दुनिया, 

क्या है ये जीवन

सोचा जो कभी 

तो बिगड़ा खुद का हाजमा है


राहुल उपाध्याय । 13 जुलाई 2026 । सिएटल 





Saturday, July 11, 2026

इतवारी पहेली: 2026/07/12

इतवारी पहेली:


राधा ने गाँव में गोबर से दीवार # ## 

और देखते रह गए राम, श्याम, ###


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 19 जुलाई 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 12 जुलाई 2026 । सिएटल 


Thursday, July 9, 2026

करूँ भला

करूँ भला तो निमित्त हूँ केवल

हो जाए गुनाह तो दोष है मेरा 


वो बच गया भीषण स्ट्रोक से एक दिन

ईश्वर दयालु है, उसने बचा लिया 


तड़प के मर गई बच्ची अस्पताल में

सारा क़सूर दरिंदों का ही है 


बनाया मंदिर, राम आ गए

पर किसी काम के नहीं 

सीसीटीवी न हो तो 

चोर हाथ ही न आए


दिन-रात खड़े 

न जाने क्या देखते हैं 

नाक की सीध में 

कुछ हो तो देख भी ले

इधर-उधर भला वो कहाँ देखते हैं 


राहुल उपाध्याय । 9 जुलाई 2026 । सिएटल 




मैं न होता

मैं न होता तो खुदा भी न होता

भला भी न होता, बुरा भी न होता


अपने हाथों से बहुत कुछ लिखा है मैंने

प्रेस न होती तो कुछ लिखा भी न होता


आए दिन यहाँ होते झगड़े बहुत हैं 

अकल न होती तो कोई लड़ा भी न होता


दंड देने को हम सब कबसे तैयार बैठे हैं

देते नसीहत तो लफड़ा खड़ा भी न होता


अपनों को कब तक हम बचाते फिरेंगे

हम होते हरिश्चंद्र बाल बाँका भी ना होता


राहुल उपाध्याय । 9 जुलाई 2026 । सिएटल 











Sunday, July 5, 2026

Re: इतवारी पहेलीः 2026/06/28

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On Sun, Jun 28, 2026 at 4:11 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


चेतन के चक्कर में उसने मार दिया ### को

जाकर ऊँचाई पर धकेला मंगेतर # ## को


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 5 जुलाई 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 28 जून 2026 । सिएटल 


Sunday, June 28, 2026

इतवारी पहेलीः 2026/06/28

इतवारी पहेली:


चेतन के चक्कर में उसने मार दिया ### को

जाकर ऊँचाई पर धकेला मंगेतर # ## को


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 5 जुलाई 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 28 जून 2026 । सिएटल 


Sunday, June 21, 2026

डीपी में नही

डीपी में नहीं

पासवर्ड में है वो

मेरी प्रेयसी, मेरी जान

मेरे दिल में रहती है


ना सेल्फी है कोई

ना तस्वीर कोई

मेरी जान मेरी आँखों में रहती है


मेरी आँखों की चमक

मेरे कपड़ों के रंग

मेरे घर की सुगंध

इन सब में विद्यमान रहती है

मेरी प्रेयसी 

मेरे साथ 

दिन-रात रहती है


राहुल उपाध्याय । 21 जून 2026 । सिएटल