चाँदनी रात भर क्यों लुभाती रही
गीत प्रेम के मुझको सुनाती रही
राज़ की बात कोई मैं करता नहीं
राज़ अपने वो मुझको बताती रही
कह दिया था जिसे लौट जा बेवफ़ा
आके चरणों में वो शीश नवाती रही
जानता मैं नहीं क्या है मन में उधर
रह-रह के यही बात सताती रही
क्या करुँ, क्या नहीं, सोचता रह गया
प्यार में शक़ की बू क्यों आती रही
राहुल उपाध्याय । 13 सितम्बर 2026 । सिएटल
