Friday, July 31, 2026

क्या हुआ क्या नहीं

क्या हुआ क्या नहीं 

कुछ हमें पता नहीं


ये चाल थी कि मौन रहे 

या हुई ख़ता पता नहीं 


कि हर तरीक़ा जायज़ है 

युद्ध में ये पचा नहीं


कि हो गया घायल कोई 

तो कोई घर से निकला नहीं 


हो गया तमाशा खतम 

राहुल तू घबरा नहीं 


लोग भूल जाएंगे इसे

ज़ख़्म ये गहरा नहीं 


राहुल उपाध्याय । 31 जुलाई 2026 । सिएटल 


Sunday, July 26, 2026

इतवारी पहेली: 2026/07/26

इतवारी पहेली:


दाल-चावल के लिए चाहिए दो ### 

दाल पका पत्नी ले, चावल पका ## #


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 2 अगस्त 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 26 जुलाई 2026 । सिएटल 


Re: इतवारी पहेली: 2026/07/19

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On Sun, Jul 19, 2026 at 12:09 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


सौ सूखी हैं, # ## हैं

लड़ रहा बस ### है


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 26 जुलाई 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 19 जुलाई 2026 । सिएटल 


Saturday, July 25, 2026

दिल तो न था

दिल तो न था पर जाना पड़ा 

ख़ामियाज़ा किसी को उठाना पड़ा


जर्जर है महल शायद बदलेगा कल फ़िलहाल तो जालों को हटाना पड़ा


ये तिनका था पीठ पे किसी ऊँट के 

बढ़ गया बोझ तो बिठाना पड़ा


बरसों से दुनिया में बदला ही क्या है ग़रीबों को जान से जाना पड़ा


लीक से हटकर कभी कुछ किया ही नहीं बार-बार अनशन को आज़माना पड़ा


राहुल उपाध्याय । 25 जुलाई 2026 । सिएटल 






Friday, July 24, 2026

घोंसला

घोंसला एक आज फिर से टूटा


नीड़ का निर्माण फिर से होगा


चलो किसी का पिंजरा तो छूटा 


छत और दीवारें

बहुत ज़रूरी हैं 


यह ज़रूरी तो नहीं कि 

वह एक जेल हो


जहाँ 

उड़ने की

जुड़ने की

बढ़ने की

आज़ादी न हो


राहुल उपाध्याय । 24 जुलाई 2026 । सिएटल 



कहाँ जा रहा था

कहाँ जा रहा था 

कहाँ आ गया 

गुलज़ार और प्रदीप को छोड़ 

नारेबाज़ी पा गया


ये कौन सा तरीक़ा है 

ये कौन सा मज़ाक है 

सुन्दर-सुन्दर रील के बदले 

कोहराम क्यों छा गया

 

क्या इसीलिए मैं विदेश आया था

इसलिए आई-फोन लिया था 

कि एक दिन पलट के देखूँ 

कौन से शहर में 

कौन क़हर ढा रहा


ये अलगोरिदम क्यों फ़ेल हुए 

ये सीन क्यों लीक हुए

मुझे मेरे पहाड़ों के 

उछलती नदियों के 

दूध से श्वेत झरनों के 

सीन चाहिए 


कहाँ जा रहा था 

कहाँ आ गया


राहुल उपाध्याय । 24 जुलाई 2026 । सिएटल 


Sunday, July 19, 2026

इतवारी पहेली: 2026/07/19

इतवारी पहेली:


सौ सूखी हैं, # ## हैं

लड़ रहा बस ### है


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 26 जुलाई 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 19 जुलाई 2026 । सिएटल