Sunday, May 24, 2026

इतवारी पहेलीः 2026/05/24

इतवारी पहेली:


इस पार चाय है, उस ## # है

इधर महफ़िल जमी है, उधर #%# है


(पहली पंक्ति का दूसरा शब्द अंग्रेज़ी का है। दूसरी पंक्ति का शब्द भी अंग्रेज़ी का है)


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 31 मई 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 24 मई  2026 । सिएटल 


Re: इतवारी पहेली: 2026/05/17

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On Sat, May 16, 2026 at 10:47 PM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


कहाँ कौन मरता है किसी # ## से

कहाँ सब कैद होता है किसी ### से


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 24 मई 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 17 मई  2026 । सिएटल 


Friday, May 22, 2026

वह जब मिलती है

वह जब मिलती है

तो सजता-धजता हूँ

वरना यूं ही चलता रहता हूँ


वह साज है मेरी जिंदगी का

जिसकी धुन पे मैं मचलता हूँ


वह नूर है मेरी आंखों का

उसे मैं ही तो समझता हूँ


मुझे मौत का क्यों ही खौफ हो

मैं जो रोज़ उस पे मरता हूँ


बिछड़ भी गए, कभी किसी मोड़ पर किसी मोड़ पर फिर उससे मिलता हूँ


ये जो ब्लॉग आदि मैं लिखता हूँ

ये सब इसलिए कि 

वो भी जान ले कि 

दिन भर मैं क्या करता हूँ


ये जो रील आदि मैं बनाता हूँ

ये सब इसलिए कि 

वो भी देख ले कि

दिन भर मैं कहाँ घूमता हूँ


राहुल उपाध्याय । 22 मई 2026 । सिएटल 







Saturday, May 16, 2026

इतवारी पहेली: 2026/05/17

इतवारी पहेली:


कहाँ कौन मरता है किसी # ## से

कहाँ सब कैद होता है किसी ### से


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 24 मई 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 17 मई  2026 । सिएटल 


Re: इतवारी पहेली: 2026/05/10

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On Sun, May 10, 2026 at 1:10 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


किसी ने सुनाई गज़ल ### #

तो किसी ने सड़क छाप ## ##


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 17 मई 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 10 मई  2026 । सिएटल 


पति-पत्नी और वो दो

मुदस्सर अजीज द्वारा निर्देशित एवं आयुष्मान खुराना, सारा अली खान, रकुलप्रीत सिंह और वाकिमा गब्बी द्वारा अभिनीत फिल्म "पति पत्नी और वो 2" बहुत ही अच्छी है, बहुत ही मजेदार है। एक अच्छी कॉमेडी फ़िल्म है, जिसमें सब कुछ बढ़िया है। सारे कलाकार अच्छे हैं, सारे किरदार अच्छे हैं। किसी में भी कोई बुराई नहीं है, कोई भी खलनायक नहीं है। सब अपना काम अपनी तरह से बढ़िया करते हैं। इतनी साफ-सुथरी कॉमेडी फ़िल्म है कि मजा ही आ गया।


जब देखने गया तो सोच रहा था इसमें कोई अश्लील हरकतें होंगी, कुछ द्विअर्थी संवाद होंगे, पर पूरी तरह से बहुत ही अच्छी फिल्म बनी है। सबसे अच्छी बात ये लगी कि ये सिर्फ बनारस और इलाहाबाद के आसपास ही घूमती है। एनआरआई लोगों के चक्कर में कहीं विदेश, पुर्तगाल या इटली या अमेरिका या इंग्लैंड में शूट नहीं की गई, सारी की सारी यहाँ की गई। गाने ना होते तो अच्छा होता, गानों ने कोई इसमें योगदान नहीं दिया है, और कहानी में थोड़ा अवरोध भी उत्पन्न होता है। इतने अच्छे किरदार हैं। विजय राज का किरदार भी बहुत ही सुंदर है, और इतने-इतने ट्विस्ट हैं, इतने-इतने मोड़ आते हैं कहानी में कि हर बार मजा ही आ जाता है। यह फ़िल्म जरूर देखनी चाहिए, पूरा पैसा वसूल। 



Friday, May 15, 2026

चांद था तो मिली थी हमें रोशनी

चांद था तो मिली थी हमें रोशनी

चांदनी के बिना है कहाँ जिंदगी 


दिन का सूरज उगलता बड़ी आग है

आग समझेगी क्या है, कहां है ख़ुशी 


दिन ढले रात हो, रात ही रात हो

हाथ उठे तो मैंने दुआ ये ही की


आज तय कर लिया मैंने अपना भविष्य

वसीयत में किसी को फूटी कौड़ी न दी


दुख होगा मुझे क्यूँ और किस बात का 

बिजलियाँ भी गिरीं तो कुछ दे कर गईं 


राहुल उपाध्याय । 15 मई 2026 । सिएटल