पी-एम ही तो हैं
न मसीहा कोई
व्रत किसी इंसान का
जा के तोड़ आए क्यूँ
वांगचुक मियाँ के बग़ैर
कौन से काम बंद हैं
रोइए ज़ार ज़ार क्या
कीजिए हाए हाए क्यूँ
जिनका यश है चारों ओर
नभ में जयजयकार है
सड़क पे लेटे आदमी पे
ध्यान उनका जाए क्यूँ
जग में आएंगे और कई
एंकर, वाचक और कवि
सबकी अपनी दुकान है
जात से अपनी जाए क्यूँ
जबसे खुली ये आँख है
देखे हैं विरोध अनगिनत
हमने न कोई विरोध किया
हाथ ये हम जलाए क्यूँ
राहुल उपाध्याय । 15 जुलाई 2026 । सिएटल
