Friday, August 28, 2026

बेर

मैं बेर तोड़ने गया था

मित्र हाथ आ गया 


वह अजनबी था

मैंने बेर तोड़ना सिखाया 

वह मित्र बन गया 



आज कुछ 

मीठी 

रसीली

नरम

ब्लैक बेरियाँ

काँटों से छुड़ाई 

उन्हें उनके चंगुल से

आज़ाद किया 


यह अलग बात है कि 

अब मैं उन्हें अपने 

अंग लगाऊँगा 


अपने शरीर का

ख़ून बढ़ाऊँगा 

उन्हें 

खा जाऊँगा


अक्सर 

आज़ादी की क़ीमत

ऐसे ही चुकाई जाती है 


राहुल उपाध्याय । 28 अगस्त 2026 । सिएटल 






Thursday, August 27, 2026

मँझधार

जिसे सोचता हूँ कि बेकार है

उसी से लेकिन मुझे प्यार है


वो करती है बातें बड़े ज्ञान की

उसे ज्ञान से न लेकिन सरोकार है


अकेला हूँ मैं, अकेली है वो

दोनों को दोनों की न दरकार है


हम हैं अलग तो ये बोलचाल है

हुए साथ तो बस तकरार है


ऐ धरती, ऐ अंबर कुछ तो बता

है किनारा कहीं कि बस मँझधार है


राहुल उपाध्याय । 27 अगस्त 2026 । सिएटल 


बहन

मेरी कोई बहन नहीं है

कोई analysis paralysis भी नहीं है

किसी रेगिस्तान में 

किसी oasis के

छलावे सी भी नहीं


है तो बस osteoporosis

जिसकी रक्षा 

मैं करना नहीं चाहता

उसे तो मैं जड़ से मिटा देना चाहता हूँ


राखी की genesis 

कहीं से भी हो

पर है 

भारतीय समुदाय तक ही सीमित


Catharsis क्या होता है

मैं अब पता लगाऊंगा


राहुल उपाध्याय । 27 अगस्त 2026 । सिएटल 


Wednesday, August 26, 2026

सागर जो होता

सागर जो होता 

लंगड़े सा मीठा 

नदियाँ न करतीं 

सागर का पीछा 


उद्दंडता ही अंक में

सब को है भरनी

नहीं मोल कोई 

यहाँ सादगी का


राधा भी कोई 

अपवाद नहीं है

उसने भी चाहा जो 

चुराए वस्त्र सभी का 


रुक्मणी के व्रत भी 

कहाँ काम आए? 

राधा को ही दे सब 

मान संगनी का 


वफ़ाओं का पट्टा 

गले पड़ गया है

सभ्यता का सबक 

जब से है सीखा 


राहुल उपाध्याय । 26 अगस्त 2026 । सिएटल 








Sunday, August 23, 2026

इतवारी पहेलीः 2026/08/23

इतवारी पहेली:


समुदाय को अंग्रेज़ी में कहते हैं #%### 

जहाँ अक्सर पायी जाती है ## ###

 

(पहली पंक्ति का शब्द अंग्रेज़ी का है। दूसरी पंक्ति का दूसरा शब्द अंग्रेज़ी का है)


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 30 अगस्त 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 23 अगस्त 2026 । सिएटल 


Re: इतवारी पहेली: 2026/09/16

Uploaded Image


On Sun, Aug 16, 2026 at 12:09 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


युगों से तड़प रही है हमारी # #^# से

डरती है इंसान से, न फुँकारते ##^# से


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 23 अगस्त 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 16 अगस्त 2026 । सिएटल 


Saturday, August 22, 2026

ग़ालिब हुआ

ग़ालिब हुआ और यह भाव ग़ालिब हुआ 

कि कुछ भी न वाजिब हुआ 


कोई इधर गया, कोई उधर गया 

कोई भी न मेरी जानिब हुआ 


न मिलता है वो, न करता सलाम 

जब से वो शख़्स साहिब हुआ 


हुई ज़िंदगी पूरी तरह से तबाह 

जब से है कोड वाइब हुआ 


जब से हुए हैं नरेन्दर मोदी हमारे 

खाना बिना ब्राइब हुआ


राहुल उपाध्याय । 22 अगस्त 2026 । सिएटल