Saturday, September 26, 2026

कल

मैंने कल पहना 

तो फ़िट नहीं आया

कहीं-कहीं 

कुछ-कुछ 

मरा-मरा सा था

बासी सा 

रंग फीके पड़ गए थे

कहीं-कहीं से

सिलाई भी उधड़ गई थी 


कल 

जैसा कल था 

आज क्यों नही है?

मेरी स्मृति से

मेल क्यों नहीं खाता?


राहुल उपाध्याय । 26 अगस्त 2026 । सिएटल 

(https://aboshupadhyaya.substack.com/p/make-believe?r=1z8h44&utm_medium=ios से प्रेरित)


Tuesday, September 22, 2026

चीटिंग

जब बात हमारी हो

तो हम वकील बन जाते हैं 


जब दूसरों की हो

तो जज


—


चीटिंग करना

कोई गुनाह नहीं है

चाहे वो परीक्षा के दौरान हो

या रिश्तों में


वरना

कोई पुलिस कार्यवाही होती

कोई जेल जाता


उल्टा

उन्हें सम्मानित किया जाता है 

चाहे वो

धर्मेंद्र हो

बोनी कपूर हो

या कुकु कोहली


राहुल उपाध्याय । 22 सितम्बर 2026 । सिएटल 



Monday, September 21, 2026

देश का फ्यूचर

संडे को झंडे

मंडे को डंडे

देश के फ्यूचर का

ऐसा है रन-वे


क्रिकेट देखो

नेटफ़्लिक्स देखो

समय बचे तो

हर-हर गंगे


दिये जलाओ 

भजन भी गाओ

ज़ोर-ज़ोर से बजाओ

मंदिरों में घंटे


पढ़ना-लिखना 

गँवारो का काम है

तुम तो जुटाओ

दो-चार गुंडे 


हमसे तो कुछ 

होता नहीं है

सब कुछ करेगा 

तुकाराम मुंडे


सब कुछ तो बढ़िया 

चल ही रहा है 

लेने हमें क्यूँ 

बार-बार पंगे


नौकरी तो नहीं 

मिलेगी लेकिन 

ईश्वर तो मिलेंगे 

अगर जो ढूँढें


राहुल उपाध्याय । 21 सितम्बर 2026 । सिएटल 





Sunday, September 20, 2026

चाँद

आज रात चाँद सीटी बजाता मिला

गली के उस मोड़ पर

जहाँ मेरा जाना मना था

पता चला वह भी उसे देख रही थी 

खिड़कियों से इशारे कर रही थी 

मैं तो जल-भुन के राख हो गया 

सुना कि उसने रात भर खिड़की भी नहीं बंद की


इश्क़ की दीवानगी 

मेरी जानिब होती

तो कुछ और ही बात होती 


राहुल उपाध्याय । 20 सितम्बर 2026 । सिएटल 


Saturday, September 19, 2026

कन्या सोच, सोच, सोच

काहे ज़िद कर रही 

काहे को पढ़ रही 

करके घर के काम 

कन्या सोच, सोच, सोच

कन्या सोच, सोच, सोच


ये जग सारा 

दिखता प्यारा

देता खूब निचोड़ 

कन्या सोच, सोच, सोच

कन्या सोच, सोच, सोच


लगा के हल्दी 

कर ना गलती 

बचा तू अपना नाम 

कन्या सोच, सोच, सोच

कन्या सोच, सोच, सोच


तेरा घर नहीं 

तेरा दर नहीं 

बस हैं तेरे काम 

कन्या सोच, सोच, सोच

कन्या सोच, सोच, सोच


कहाँ तू जाएगी 

कहाँ बच पाएगी 

हर कोई करे शिकार 

कन्या सोच, सोच, सोच

कन्या सोच, सोच, सोच


राहुल उपाध्याय । 19 सितंबर 2026 । सिएटल 



Thursday, September 17, 2026

भिखारी

हम कब तब भिखारी बने रहेंगे?


एक तरफ़ तो हम 

पूरे ज़ोर-शोर से

दान देने को लालायित रहते हैं 


यहाँ इस मंदिर को इतना दिया

उस ग़रीब की इतनी मदद की

उस कोष में इतना डाला

केयर फंड में इतना


जब टैक्स 

देने की बारी आती है

तो भिखारी सी हालत हो जाती है 


करोड़ कमाया 

चालीस लाख सरकार ले गई 

साठ लाख से क्या होगा?


महँगे से महँगा

फ़ोन हाथ में है 

बेटा आइस क्रीम खानी है?

शौक़ से खाओ

स्पाइडर मैन देखनी है 

ज़रूर देखना 

पॉपकॉर्न भी ले लेना

कोकाकोला मत भूलना


सरकार 

इन सब पर हिस्सा माँगे

तो एक कौड़ी भी ज़्यादा लगती है 


राहुल उपाध्याय । 16 सितम्बर 2026 । सिएटल 




Sunday, September 13, 2026

चाँदनी

चाँदनी रात भर क्यों लुभाती रही  

गीत प्रेम के मुझको सुनाती रही

 

राज़ की बात कोई मैं करता नहीं 

राज़ अपने वो मुझको बताती रही 


कह दिया था जिसे लौट जा बेवफ़ा

आके चरणों में वो शीश नवाती रही


जानता मैं नहीं क्या है मन में उधर 

रह-रह के यही बात सताती रही 


क्या करुँ, क्या नहीं, सोचता रह गया 

प्यार में शक़ की बू क्यों आती रही 


राहुल उपाध्याय । 13 सितम्बर 2026 । सिएटल