पढ़ लिख के
हमने किया क्या है?
कभी खुद को
तो कभी सबको गधा कहा है
जो जानते हैं
वे दुखी हैं
जो अनजान है
खुश ही दिखा है
आते-जाते मौसमों में
एक बारिश ही है
जिसकी ज़रूरत
हर कोई समझता है
ये दुनिया की समझदारी
हमें न रास आई
कभी शांति का
तो कभी युद्ध का दिया मशवरा है
क्या है ये दुनिया,
क्या है ये जीवन
सोचा जो कभी
तो बिगड़ा खुद का हाजमा है
राहुल उपाध्याय । 13 जुलाई 2026 । सिएटल
