आज रात चाँद सीटी बजाता मिला
गली के उस मोड़ पर
जहाँ मेरा जाना मना था
पता चला वह भी उसे देख रही थी
खिड़कियों से इशारे कर रही थी
मैं तो जल-भुन के राख हो गया
सुना कि उसने रात भर खिड़की भी नहीं बंद की
इश्क़ की दीवानगी
मेरी जानिब होती
तो कुछ और ही बात होती
राहुल उपाध्याय । 20 सितम्बर 2026 । सिएटल
