कभी पेरिस
तो कभी सबरीमाला में
हम बदनाम होते हैं
धर्म के नाम पर
क्यों ऐसे काम होते हैं
कभी चूड़ी
कभी बिंदी
कभी सिन्दूर
मल दिया जाता है
क्या हम
किसी की जागीर हैं
जो हम पे झंडे
गाड़ दिए जाते हैं
वे चौक पे
चौपाल करने जाते हैं
हम क्यों
चौका-बर्तन करने के लिए
छोड़ दिए जाते हैं
वे खाते हैं पहले
सोते हैं पहले
जगते हैं बाद में
हम क्यों हमेशा
पीछे रह जाते हैं
राहुल उपाध्याय । 10 सितम्बर 2026 । सिएटल
