Friday, October 16, 2026

रंग

में चाहता हूँ 

कि रंग बदलें 

रंग इधर से उधर हों 

एक से ना रहें


सफेद, सफेद ना रहे 

नीला, नीला ना रहे 

लाल, लाल ना रहे 

पीला, पीला ना रहे 


कुछ इधर से उधर हो 

कुछ उधर से इधर हो 


लेकिन 

अब 

कपड़े रंग छोड़ते नहीं 

रंग इतने मज़बूत कर दिये गए हैं 

कि चाहकर भी नहीं बदले जा सकते

साबुन ऐसे आ गए हैं जो 

रंग उतरने नहीं देते

मशीनें ऐसी आ गई हैं 

जो जैसा है उसको वैसा ही रहने देती हैं


कभी-कभी 

मन करता है 

कि छोड़ दूँ 

ये शहरी जीवन 

और कूट दूँ 

इन कपड़ों को

किसी घाट पर


राहुल उपाध्याय । 16 अक्टूबर 2026 । सिएटल 



Wednesday, October 14, 2026

कभी इस पर लिख

कभी इस पर लिख

कभी उस पर लिख 

हर बात पर 

सबको पका के लिख


कोई पढ़ रहा हो

तो उसे दे बता

तेरी धमनियों में

बहता रक्त नहीं 

कुछ करने को

तेरे पास वक़्त नहीं 

क्रांति हो तो

कोई और लाए

तू तो बस अपना

फ़ोन चलाए

क्यूँ जुटे नहीं 

क्यूँ मरे नहीं 

क्यूँ वीरता के 

क़िस्से गढ़े नहीं 


है तीज-त्योहार 

तो नृत्य कर

भजन गा-गा के

जाम कर

कुछ खा मीठा

कुछ खिला मीठा

बेमौके पर न

सेहत की बात कर

तू दीप जला

तू घर सजा

परंपरा से हटकर

न कुछ और कर

जो चल रहा

उसे चलाए जा


कभी इस पर लिख

कभी उस पर लिख 

हर बात पर 

सबको पका के लिख


राहुल उपाध्याय । 14 अक्टूबर 2026 । सिएटल 



Monday, October 12, 2026

छोड़ देना

मैं जब भी कहीं जाता हूँ 

ख़ुद को वहीं छोड़ आता हूँ 


बहुत ध्यान रखता हूँ 

कि सब पैक कर लूँ 


फ़ोन

चार्जर 

लैपटॉप 

लैपटॉप का चार्जर 

टूथब्रश 

पासपोर्ट 


नहीं कर पाता हूँ पैक 

तो ख़ुद को 


अपना नाम भी तो नहीं लिखता 

चैकलिस्ट में 

और बैग में जगह भी नहीं रहती एयरलाइन 

एक्स्ट्रा आइटम अलाउ भी नहीं करती 

ले भी लिया तो 

शायद बहुत ज़्यादा चार्ज करेगी 


न जाने कितनी जगह 

मैं ख़ुद को छोड़ आया हूँ 


राहुल उपाध्याय । 12 अक्टूबर 2026 । ऑस्टिन 

Sunday, October 11, 2026

Re: इतवारी पहेली: 2026/10/04

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On Sun, Oct 4, 2026 at 1:29 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


चाहे हो शिवानी, चाहे हो ### 

बात मेरी नहीं, हमेशा अपनी # ##


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 11 अक्टूबर 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 4 अक्टूबर 2026 । सिएटल 


Saturday, October 10, 2026

चिंगारी

चिंगारी कोई भड़के तो जनमानस मज़ा उठाए

अप्रिय घटना न घटे तो कैसे कोई फोन चलाए

जनतंत्र जो आग बुझाए, जो सबका ख़्याल रखे

उसे हर कोई चाहे, उसे हर कोई जिताए


माना युवा के आगे नहीं चलता ज़ोर किसी का

लोगों का दोष नहीं है ये दोष है और किसी का

भाड़े पर जो लोगों को जोड़े उसे कौन जताए

कि हंगामा ही करना है तो हमें बख़्श दो हाए


हमसे मत पूछो कैसे चलता है आंदोलन सब का

वोटों की बात नहीं है ये किस्सा है हसरत का

जिन्हें काम है काज है करना वो न भीड़ लगाए

जो भीड़ को आग में झोंके उन्हें कौन जिताए


न जाने क्या हो जाता, जाने वो क्या कर जाते 

बंदोबस्त था तो बच गए वरना कितने मर जाते

सोचो तो व्यवस्था के दम पे घर कितने बचाए

‘गर विरोध है करना तो राष्ट्रपति को आप बताए


(आनंद बख़्शी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 10 अक्टूबर 2026 । सिएटल

कहाँ तक दुःख गिनाऊँ

कहाँ तक दुःख गिनाऊँ?

नाना का दुःख मनाऊँ

कि नाकाबंदी का?


मेडल का जश्न मनाऊँ 

कि बँधुआ मज़दूरों को

ढाढ़स मैं दिलाऊँ?


बढ़ते शेयर पे मैं इतराऊँ 

कि महँगाई का रोना गाऊँ?


हर तरफ़ है चिंता 

हर तरफ़ है खुशी 

किसे छोड़ूँ? 

किसे अपनाऊँ?

या लम्बी चादर तान सो जाऊँ?

या बस

दिमाग का दही कर जाऊँ?


राहुल उपाध्याय । 10 अक्टूबर 2026 । सिएटल 


Saturday, October 3, 2026

इतवारी पहेली: 2026/10/04

इतवारी पहेली:


चाहे हो शिवानी, चाहे हो ### 

बात मेरी नहीं, हमेशा अपनी # ##


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 11 अक्टूबर 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 4 अक्टूबर 2026 । सिएटल