Sunday, September 20, 2026

चाँद

आज रात चाँद सीटी बजाता मिला

गली के उस मोड़ पर

जहाँ मेरा जाना मना था

पता चला वह भी उसे देख रही थी 

खिड़कियों से इशारे कर रही थी 

मैं तो जल-भुन के राख हो गया 

सुना कि उसने रात भर खिड़की भी नहीं बंद की


इश्क़ की दीवानगी 

मेरी जानिब होती

तो कुछ और ही बात होती 


राहुल उपाध्याय । 20 सितम्बर 2026 । सिएटल 


Saturday, September 19, 2026

कन्या सोच, सोच, सोच

काहे ज़िद कर रही 

काहे को पढ़ रही 

करके घर के काम 

कन्या सोच, सोच, सोच

कन्या सोच, सोच, सोच


ये जग सारा 

दिखता प्यारा

देता खूब निचोड़ 

कन्या सोच, सोच, सोच

कन्या सोच, सोच, सोच


लगा के हल्दी 

कर ना गलती 

बचा तू अपना नाम 

कन्या सोच, सोच, सोच

कन्या सोच, सोच, सोच


तेरा घर नहीं 

तेरा दर नहीं 

बस हैं तेरे काम 

कन्या सोच, सोच, सोच

कन्या सोच, सोच, सोच


कहाँ तू जाएगी 

कहाँ बच पाएगी 

हर कोई करे शिकार 

कन्या सोच, सोच, सोच

कन्या सोच, सोच, सोच


राहुल उपाध्याय । 19 सितंबर 2026 । सिएटल 



Thursday, September 17, 2026

भिखारी

हम कब तब भिखारी बने रहेंगे?


एक तरफ़ तो हम 

पूरे ज़ोर-शोर से

दान देने को लालायित रहते हैं 


यहाँ इस मंदिर को इतना दिया

उस ग़रीब की इतनी मदद की

उस कोष में इतना डाला

केयर फंड में इतना


जब टैक्स 

देने की बारी आती है

तो भिखारी सी हालत हो जाती है 


करोड़ कमाया 

चालीस लाख सरकार ले गई 

साठ लाख से क्या होगा?


महँगे से महँगा

फ़ोन हाथ में है 

बेटा आइस क्रीम खानी है?

शौक़ से खाओ

स्पाइडर मैन देखनी है 

ज़रूर देखना 

पॉपकॉर्न भी ले लेना

कोकाकोला मत भूलना


सरकार 

इन सब पर हिस्सा माँगे

तो एक कौड़ी भी ज़्यादा लगती है 


राहुल उपाध्याय । 16 सितम्बर 2026 । सिएटल 




Sunday, September 13, 2026

चाँदनी

चाँदनी रात भर क्यों लुभाती रही  

गीत प्रेम के मुझको सुनाती रही

 

राज़ की बात कोई मैं करता नहीं 

राज़ अपने वो मुझको बताती रही 


कह दिया था जिसे लौट जा बेवफ़ा

आके चरणों में वो शीश नवाती रही


जानता मैं नहीं क्या है मन में उधर 

रह-रह के यही बात सताती रही 


क्या करुँ, क्या नहीं, सोचता रह गया 

प्यार में शक़ की बू क्यों आती रही 


राहुल उपाध्याय । 13 सितम्बर 2026 । सिएटल 




इतवारी पहेली: 2026/09/13

इतवारी पहेली:


भगवान के भक्त #^# # हैं

रोज़ बिकते रोली और #^## हैं


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 20 सितम्बर 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 13 सितम्बर 2026 । सिएटल 


Re: इतवारी पहेली: 2026/09/06

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On Sun, Sep 6, 2026 at 1:54 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


नीम करौली बाबा के पास सिर्फ़ #%## था

कहते हैं उन बाबाजी में फिर भी न ## ## था


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 13 सितम्बर 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 6 सितम्बर 2026 । सिएटल 


Thursday, September 10, 2026

कभी पेरिस

कभी पेरिस 

तो कभी सबरीमाला में 

हम बदनाम होते हैं 

धर्म के नाम पर 

क्यों ऐसे काम होते हैं


कभी चूड़ी 

कभी बिंदी 

कभी सिन्दूर 

मल दिया जाता है 

क्या हम 

किसी की जागीर हैं 

जो हम पे झंडे 

गाड़ दिए जाते हैं


वे चौक पे 

चौपाल करने जाते हैं 

हम क्यों 

चौका-बर्तन करने के लिए 

छोड़ दिए जाते हैं


वे खाते हैं पहले 

सोते हैं पहले 

जगते हैं बाद में 

हम क्यों हमेशा 

पीछे रह जाते हैं


राहुल उपाध्याय । 10 सितम्बर 2026 । सिएटल