Sunday, November 1, 2026

Re: इतवारी पहेली: 2026/10/25

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On Sat, Oct 24, 2026 at 10:40 PM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


गेंद गिरती है क्योंकि हर तरफ ### है

रोज़ी हँसती है क्योंकि पति, #, ## है


(पहली पंक्ति का शब्द अंग्रेज़ी का है। दूसरी पंक्ति का दोनों शब्द अंग्रेज़ी के हैं)


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 1 नवम्बर 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 25 अक्टूबर 2026 । सिएटल 


Wednesday, October 28, 2026

तलाक़

मैं तलाकशुदा हूँ 

मुझसे मिलते रहा करो


मैं तुम्हारा दुःख-दर्द

ख़ूब समझता हूँ 

क़ानून के दाँव-पेंच 

समझा सकता हूँ 

अकेलेपन में कितना आनंद है

दिखा सकता हूँ 

तुम्हें अपनी आज़ादी का रास्ता 

बता सकता हूँ 


—


मैं तलाकशुदा हूँ 

मुझसे मिलते रहा करो


तुम जब चाहो

मुझसे बात कर सकती हो 

बेहिचक 

मैं तुमसे चिपकूँगा नहीं 

पीछे भी नहीं पड़ूँगा 

जितनी मदद चाहिए 

उतनी मदद भी कर दूँगा 

बिना किसी अपेक्षा के


—-


मैं तलाकशुदा हूँ 

मुझसे मिलते रहा करो


मेरा जीवन देख कर

तुम अपना विचार बदल दोगे 

और एक सुखद जीवन 

व्यतीत करोगे 


राहुल उपाध्याय । 28 अक्टूबर 2026 । सिएटल 






Monday, October 26, 2026

ग्रीन कार्ड दे दो

ट्रम्प साहिब

ग्रीन कार्ड दे दो

कर दो काम ज़रा सा


ऐ दिल दीवाने, खेल है क्या जाने

दर्द भरी ये राह कहाँ से

हम लोगों ने पाई

हो गई है रुसवाई 

टूट गया मैं

टूट के मैं हूँ

तुमको हाल सुनाता 

कर दो काम ज़रा सा


याद दिलानी है

एक कहानी है

आज जो तुमको याद नहीं है

या शायद नहीं भूले

हो तुम कैसे जीते

वोट दिलाएं हमने तुमको

फिर भी हाल बुरा सा

कर दो काम ज़रा सा


बरसों बीत गए

हमको आए यूएस

छुरी बन के

गर्दन पे चल दीं 

वीपी वैन्स की बातें

मारे हमको ताने

तुम संग एक विनती हमारी

समझो दीन की भाषा 

कर दो काम ज़रा सा


राहुल उपाध्याय । 26 अक्टूबर 2026 । सिएटल



Saturday, October 24, 2026

इतवारी पहेली: 2026/10/25

इतवारी पहेली:


गेंद गिरती है क्योंकि हर तरफ ### है

रोज़ी हँसती है क्योंकि पति, #, ## है


(पहली पंक्ति का शब्द अंग्रेज़ी का है। दूसरी पंक्ति का दोनों शब्द अंग्रेज़ी के हैं)


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 1 नवम्बर 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 25 अक्टूबर 2026 । सिएटल 


Thursday, October 22, 2026

हैं ग़ालिब कहाँ

हैं ग़ालिब यहाँ 

कि हैं ग़ालिब वहाँ 

किसको पता 

हैं ग़ालिब कहाँ 


लिखने लगो 

तो लिखते रहो 

समझे ने समझे 

कोई तेरी ज़ुबाँ


ये ज़मीं बँट गई 

आसमाँ बँट गया 

कितने खेमों में 

बँट गया जहाँ 


है बंजर कहीं 

कहीं मंज़र नया

ज़मीं पे छाया 

ये कैसा समाँ 


आँसू भी कहाँ 

हैं अपने मेरे

ये भी अपनों ने

दिए हैं हाँ 


राहुल उपाध्याय । 22 अक्टूबर 2026 । सिएटल 


Friday, October 16, 2026

रंग

में चाहता हूँ 

कि रंग बदलें 

रंग इधर से उधर हों 

एक से ना रहें


सफेद, सफेद ना रहे 

नीला, नीला ना रहे 

लाल, लाल ना रहे 

पीला, पीला ना रहे 


कुछ इधर से उधर हो 

कुछ उधर से इधर हो 


लेकिन 

अब 

कपड़े रंग छोड़ते नहीं 

रंग इतने मज़बूत कर दिये गए हैं 

कि चाहकर भी नहीं बदले जा सकते

साबुन ऐसे आ गए हैं जो 

रंग उतरने नहीं देते

मशीनें ऐसी आ गई हैं 

जो जैसा है उसको वैसा ही रहने देती हैं


कभी-कभी 

मन करता है 

कि छोड़ दूँ 

ये शहरी जीवन 

और कूट दूँ 

इन कपड़ों को

किसी घाट पर


राहुल उपाध्याय । 16 अक्टूबर 2026 । सिएटल 



Wednesday, October 14, 2026

कभी इस पर लिख

कभी इस पर लिख

कभी उस पर लिख 

हर बात पर 

सबको पका के लिख


कोई पढ़ रहा हो

तो उसे दे बता

तेरी धमनियों में

बहता रक्त नहीं 

कुछ करने को

तेरे पास वक़्त नहीं 

क्रांति हो तो

कोई और लाए

तू तो बस अपना

फ़ोन चलाए

क्यूँ जुटे नहीं 

क्यूँ मरे नहीं 

क्यूँ वीरता के 

क़िस्से गढ़े नहीं 


है तीज-त्योहार 

तो नृत्य कर

भजन गा-गा के

जाम कर

कुछ खा मीठा

कुछ खिला मीठा

बेमौके पर न

सेहत की बात कर

तू दीप जला

तू घर सजा

परंपरा से हटकर

न कुछ और कर

जो चल रहा

उसे चलाए जा


कभी इस पर लिख

कभी उस पर लिख 

हर बात पर 

सबको पका के लिख


राहुल उपाध्याय । 14 अक्टूबर 2026 । सिएटल