दिक़्क़त लंका में नहीं थी
दिक़्क़त अयोध्या में थी
दिक़्क़त अयोध्या में नहीं थी
दिक़्क़त महल में थी
दिक़्क़त महल में नहीं थी
दिक़्क़त परिवार में थी
दिक़्क़त परिवार में नहीं थी
दिक़्क़त पति-पत्नी में थी
राहुल उपाध्याय । 12 मार्च 2026 । सिएटल
दिक़्क़त लंका में नहीं थी
दिक़्क़त अयोध्या में थी
दिक़्क़त अयोध्या में नहीं थी
दिक़्क़त महल में थी
दिक़्क़त महल में नहीं थी
दिक़्क़त परिवार में थी
दिक़्क़त परिवार में नहीं थी
दिक़्क़त पति-पत्नी में थी
राहुल उपाध्याय । 12 मार्च 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 9:17 AM
आपका क्या कहना है??
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तुम्हें चाहिए था पालतू
तो रख लेती कुत्ता ही
मैं हूँ एक जीवित आदमी
मुझे चाहिए आज़ादी
तुम चाहो मैं ध्यान करूँ
मैं चाहूँ उड़ान भरूँ
तुम चाहो मैं घर में बैठूँ
मुझे नापनी दुनिया सारी
जीवन का निचोड़ यही है
तू-तू मैं-मैं होगी ही
गले मिलने से विचार मिलेंगे
सोच है बिलकुल बचकानी
आगे पीछे और मिलेंगे
तुमको भी और मुझको भी
खुशियों के दिन चार मिलेंगे
फिर उतरेगी ख़ुमारी
राहुल उपाध्याय । 11 मार्च 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 9:26 AM
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इतवारी पहेली:
व्हिस्की स्ट्राँग और ## ## है
उज्जैन में विश्वविद्यालय #%## है
(पहली पंक्ति का पहला शब्द अंग्रेज़ी का है।)
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है। जैसे कि मंगल —> #^##
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 15 मार्च 2026 को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 8 मार्च 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 5:05 AM
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इतवारी पहेली:
बालों को रंग करना है? # #?
चिंता मत करो, लगाओ ##
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है। जैसे कि मंगल —> #^##
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 8 मार्च 2026 को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 1 मार्च 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 5:04 AM
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कोई चीज़ अब हैरान नहीं करती है
तन-बदन में भी आग नहीं लगती है
टूट चुके हैं जादू कई
आ गई है समझदारी अब
क्या हुआ जो बात न हुई
क्या साँस भी कभी रुकती है
पागल था, जो पागल हुआ
दिल दिया और दर्द लिया
लौटाने का कोई रिवाज़ नहीं
भलमनसाहत पे दुनिया चलती है
(आँख में किसी की जादू था
बात में किसी की अल्हड़पन)
मर चुका था, मिट चुका था
हर किसी की अदा पे मैं
अब जा के मैं जागा हूँ
ज़िंदगी कभी तो सुधरती है
राहुल उपाध्याय । 7 मार्च 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 9:09 AM
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न अपना लगता है, न पराया लगता है
हर कोई बस सताया लगता है
न जाने किस-किस से क्या कह बैठे
कुछ खिचड़ी था पकाया लगता है
कुछ छोड़ गए, कुछ छूट गए
किसी ने मुझे बचाया लगता है
वैसे तो उसमें विश्वास नहीं है
पर आपको किसीने बनाया लगता है
कहने को कह देतीं दीवारें लेकिन
यह घर फिर आज सजाया लगता है
बँट रही हैं किताबें राहुल की आजकल
नया-नया कुछ छपाया लगता है
राहुल उपाध्याय । 6 मार्च 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 4:44 AM
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इतवारी पहेली:
बालों को रंग करना है? # #?
चिंता मत करो, लगाओ ##
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है। जैसे कि मंगल —> #^##
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
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राहुल उपाध्याय । 1 मार्च 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 2:27 AM
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