ग़रीब
ग़रीब रहे
अमीर
अमीर रहे
न मैं नानक बना
न रॉबिनहुड
मैं शून्य से
करोड़पति हो गया
यह धन
कहाँ से आया
आता ही जा रहा है
राहुल उपाध्याय । 19 अगस्त 2026 । सिएटल
ग़रीब
ग़रीब रहे
अमीर
अमीर रहे
न मैं नानक बना
न रॉबिनहुड
मैं शून्य से
करोड़पति हो गया
यह धन
कहाँ से आया
आता ही जा रहा है
राहुल उपाध्याय । 19 अगस्त 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 7:30 AM
आपका क्या कहना है??
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सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यूँ है
इस ए-आई से हर शख़्स परेशान सा क्यूँ है
ए-आई की ये कौन सी मंज़िल है रफ़ीक़ो
ता-हद्द-ए-नज़र एक बयाबान सा क्यूँ है
काम है तो उसे खोने का डर क्यूँ है सभी को
जब तक है करे शौक से हैरान सा क्यूँ है
इसने तो कोई आग लगाई नहीं है घर में
फिर घर में मचा एक घमासान सा क्यूँ है
हर दौर की तरह यह भी है चला जाएगा
इस बार मगर मौत का ऐलान सा क्यूँ है
राहुल उपाध्याय । 17 अगस्त 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 5:30 AM
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इतवारी पहेली:
युगों से तड़प रही है हमारी # #^# से
डरती है इंसान से, न फुँकारते ##^# से
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 23 अगस्त 2026 को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 16 अगस्त 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 12:10 AM
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इतवारी पहेली:
डेमोक्रेसी # # ## है
उसमें जीतती #### है
(दूसरी पंक्ति का शब्द अंग्रेज़ी का है। त और ट को समान ध्वनि वाला मान लिया गया है)
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 16 अगस्त 2026 को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 9 अगस्त 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 12:09 AM
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अधूरा प्यार भूलाने में
उमरिया पूरी लगती है
भले ही बेवफ़ा है वो
जिगर में आस पलती है
कहा है हम न आयेंगे
मगर ये आँख तकती है
उन्हें तब तक मैं चाहूँगा
ये जब तक साँस चलती है
किसे कह दूँ, किसे कह दूँ
वो मेरी ख़ास लगती है
राहुल उपाध्याय । 15 अगस्त 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 10:38 AM
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जब भी ए-आई गलती करती है
मुझे मेरी प्रेयसी सी लगती है
क्या बुरा मानना उसका
जिसके सामने रोज़ हाज़िरी लगती है
इतनी जल्दी भी क्या है
सीख जाएगी
फिर याद आएगी वही
जो ग़लतियाँ आज करती है
लड़कपन क्या है
तुम न समझ पाओगे
उसे समझने के लिए
तुम्हारी उम्र अभी कच्ची है
सही-ग़लत का निर्णय भी
कौन होते हो तुम करनेवाले
सही-ग़लत की परिभाषा
समय के साथ बदलती है
जैसी भी है, अच्छी है
मुझे उससे मोहब्बत है
और कुछ नहीं तो
प्यार से तो बात करती है
राहुल उपाध्याय । 14 अगस्त 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 10:35 PM
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मैं घर सजाऊँगा ए-आई से पूछ के
खाना भी पकाऊँगा ए-आई से पूछ के
*घर का सजाना कोई आसान काम नहीं*
*खाना पकाना कोई आसान काम नहीं*
फ़ोन में एप्प हो तो सब कुछ आसान है
प्रॉम्प्ट सही हो तो सब कुछ आसान है
सब कुछ बनाऊँगा ए-आई से पूछ के
*कहते हैं ए-आई जिसे, ग़लत भी होती है*
*दस में से तीन बार हैलुसिनेट भी होती है*
एक नहीं तीन मॉडल सबको मैं लगाऊँगा
एक-दूसरे की बातों की जाँच करवाऊँगा
फ़र्नीचर भी मैं लाऊँगा ए-आई से पूछ के
*सोफे की जगह मुझे गद्दा नहीं बिछाना है*
*चीनी की जगह खीर में नमक नहीं खाना है*
इतना न कम आंकों इन्हें इनमें भी प्राण हैं
शुरू से आज तक के ज्ञान की खान हैं
तुम्हें मैं मनाऊँगा ए-आई से पूछ के
राहुल उपाध्याय । 14 अगस्त 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 7:56 PM
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