Saturday, April 4, 2026

चराग ढूँढ लिया

चराग ढूंढ लिया 

बुझते चिराग ने 

दुनिया ये जल रही है 

बुझते चिराग से


सुन के हज़ार क़िस्से 

हमने ये आज माना 

हर बार ही नए हैं 

क़िस्से ये प्यार के


मुझसे ख़फ़ा है आज जो 

बरसो के मीत है 

कहते हैं आप ही क्यूँ 

दुख औरों के काटते


कहता नहीं था लेकिन

कहता हूँ आज सब से

करना है प्यार कर लो 

रख के दिमाग़ घर पे


पति और पत्नी दोनों बस 

काम के लिए हैं 

इक आशिक़ी वो शय है 

जो झोली में प्यार भर दे


राहुल उपाध्याय । 4 अप्रैल 2026 । रोग रिवर (बाग़ी नदी), ओरेगन


Thursday, April 2, 2026

उथल-पुथल

ये जो मन की 

उथल-पुथल है 

अच्छी है

पता चलता है कि

मैं जीवित हूँ 


उसका मुझसे रूठ जाना

संकेत है कि

मैंने कुछ अपने मन का किया


उसका किसी से जुड़ जाना

संकेत है कि

मुझे अभी और 

सँवरना है

सुधरना है 

निखरना है 

खतरे मोल लेना है 


वो मिलती नहीं 

मगर मिलती ज़रूर है 

इसे आधा ख़ाली कहूँ 

कि आधा भरा

इसी उधेड़बुन में

सोता हूँ 

जगता हूँ 

स्वप्न देखता हूँ 

जगने के ख़्वाब देखता हूँ 


जीवन

न 'गाइड' है

न 'हम दिल दे चुके सनम'

या 'सिलसिला'

कि ऊँट 

किसी करवट तो बैठेगा 


जीवन की कहानी 

कभी ख़त्म नहीं होती 

न सुखांत में

न दुखांत में

चलती रहती है 


धोखा देने वाला 

धोखा देता रहता है 

पकड़ा नहीं जाता

सज़ा नहीं पाता

क्रम चलता रहता है


ये उथल-पुथल 

अच्छी है


राहुल उपाध्याय । 2 अप्रैल 2026 । सेन फ्रांसिस्को 

Monday, March 30, 2026

कल तलक साथ थे

कल तलक साथ थे 

आज दोनों जुदा 

दोनों ही खुश नहीं 

फिर हुआ क्या पता 


जाने क्या बात हुई 

जाने क्यों हैं ख़फ़ा 

उठ के वो चल दिए 

बदल लिया रास्ता 


बेवफ़ा वो नहीं 

बेवफ़ा वो तो है 

सोच के ही खुश है वो 

इलज़ाम झूठ ना लगा 


हर तरफ़ हैं खिल रहे 

फूल प्यार के सभी 

अब उन्हें क्या देखिए 

जब चल रहा ये मामला 


बात अपनी कही

या कही जहान की 

जज बन के आप ही 

दीजिए फ़ैसला 


राहुल उपाध्याय । 30 मार्च 2026 । कॉटनवुड, कैलिफ़ोर्निया 




Sunday, March 29, 2026

इतवारी पहेली: 2026/03/29

इतवारी पहेली:


कितनी महँगाई है इलाहाबाद यानी ##### में

कि बबलू सोता है घाट पर और ## ### में


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 5 अप्रैल 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 29 मार्च 2026 । सिएटल 


Re: इतवारी पहेली: 2026/03/22



On Sun, Mar 22, 2026 at 4:12 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


आक्रमण हुआ विफल, गिरे बम पानी में ### से

कुछ न कर पाए विमान जो आए थे #: ## से


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 29 मार्च 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 22 मार्च 2026 । सिएटल 


Friday, March 27, 2026

दवाईयों का असर

दवाईयों का असर इतना है 

कि जब तक पिता गुज़रते हैं 

आँसू सुख चुके होते हैं 

माँ के जाने की 

हम घड़ियाँ गिनते हैं 


दुख क्या है 

हम जानते नहीं

समझ नहीं पाते 


बचपन में कोई 

अप्रिय घटना 

घटती नहीं है 

जवानी घर से दूर 

दादा-दादी, नाना नानी को 

जाना है तो चले जाते हैं 


युद्ध में 

लाखो लोग मरते हैं 

तो मरते होंगे 

तेल जरूर महँगा हो गया है 

पर बस में जाने की 

नौबत अभी आई नहीं है


राहुल उपाध्याय । 27 मार्च 2026 । सिएटल 


Tuesday, March 24, 2026

देखा है तुमको खुश मैंने जबसे

देखा है तुमको ख़ुश मैंने जबसे 

रहने लगा हूँ मैं दुखी तबसे 


आते नहीं हैं फ़ोन अब तुम्हारे 

मिलते नहीं क्यों दिल अब हमारे 

कह दो, हाँ, कह दो

आख़िर क्या कमी है 

सुनने को तत्पर कान मेरे कबसे


लड़ते नहीं थे, लड़ने लगे हैं 

भिड़ते नहीं थे, भिड़ने लगे हैं 

मिला ये मोहब्बत का 

रंग कैसा घटिया 

पूछने लगा हूँ आजकल रब से


कहना बहुत है आज मुझे तुमसे 

जज़्बात तूफ़ाँ और शब्द गुमसुम हैं 

शब्दों के जाल में

कहाँ तक घुमाऊँ 

निकलते नहीं लफ़्ज़ आज मेरे लब से


राहुल उपाध्याय । 24 मार्च 2026 । सिएटल