Sunday, March 29, 2026

इतवारी पहेली: 2026/03/29

इतवारी पहेली:


कितनी महँगाई है इलाहाबाद यानी ##### में

कि बबलू सोता है घाट पर और ## ### में


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 5 अप्रैल 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 29 मार्च 2026 । सिएटल 


Re: इतवारी पहेली: 2026/03/22



On Sun, Mar 22, 2026 at 4:12 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


आक्रमण हुआ विफल, गिरे बम पानी में ### से

कुछ न कर पाए विमान जो आए थे #: ## से


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 29 मार्च 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 22 मार्च 2026 । सिएटल 


Friday, March 27, 2026

दवाईयों का असर

दवाईयों का असर इतना है 

कि जब तक पिता गुज़रते हैं 

आँसू सुख चुके होते हैं 

माँ के जाने की 

हम घड़ियाँ गिनते हैं 


दुख क्या है 

हम जानते नहीं

समझ नहीं पाते 


बचपन में कोई 

अप्रिय घटना 

घटती नहीं है 

जवानी घर से दूर 

दादा-दादी, नाना नानी को 

जाना है तो चले जाते हैं 


युद्ध में 

लाखो लोग मरते हैं 

तो मरते होंगे 

तेल जरूर महँगा हो गया है 

पर बस में जाने की 

नौबत अभी आई नहीं है


राहुल उपाध्याय । 27 मार्च 2026 । सिएटल 


Tuesday, March 24, 2026

देखा है तुमको खुश मैंने जबसे

देखा है तुमको ख़ुश मैंने जबसे 

रहने लगा हूँ मैं दुखी तबसे 


आते नहीं हैं फ़ोन अब तुम्हारे 

मिलते नहीं क्यों दिल अब हमारे 

कह दो, हाँ, कह दो

आख़िर क्या कमी है 

सुनने को तत्पर कान मेरे कबसे


लड़ते नहीं थे, लड़ने लगे हैं 

भिड़ते नहीं थे, भिड़ने लगे हैं 

मिला ये मोहब्बत का 

रंग कैसा घटिया 

पूछने लगा हूँ आजकल रब से


कहना बहुत है आज मुझे तुमसे 

जज़्बात तूफ़ाँ और शब्द गुमसुम हैं 

शब्दों के जाल में

कहाँ तक घुमाऊँ 

निकलते नहीं लफ़्ज़ आज मेरे लब से


राहुल उपाध्याय । 24 मार्च 2026 । सिएटल 




Monday, March 23, 2026

बेशक मुझको गले न लगाओ

बेशक मुझको गले न लगाओ

ना कोई नफ़रत, ना कोई प्यार हो

दोस्त के जैसे ही हाथ बढ़ाओ


तुमको जो कहना है मुझसे ही कहना 

ख़्वाब में आके मुझे तंग न करना 

घर पर, दर पर कभी तो आओ


चलते-चलते 'गर मिल जाओ 

नैन चुरा के न आगे बढ़ जाओ 

देखो मुझको, थोड़ा मुस्काओ 


दोस्ती-यारी, इक जिम्मेवारी 

चलती नहीं है बीच नर और नारी 

तर्क-वितर्क सब फिर से बताओ


राहुल उपाध्याय । 23 मार्च 2026 । सिएटल

Sunday, March 22, 2026

इतवारी पहेली: 2026/03/22

इतवारी पहेली:


आक्रमण हुआ विफल, गिरे बम पानी में ### से

कुछ न कर पाए विमान जो आए थे #: ## से


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 29 मार्च 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 22 मार्च 2026 । सिएटल 


Friday, March 20, 2026

पाँव कहीं के कहीं

पाँव कहीं के कहीं पड़ते हैं उसके

टेक्स्ट भी करती है तो करती है डरके 

कहीं और कोई कुछ समझ तो न लेगा? जो समझ रही हूँ मैं वो समझ तो न लेगा?


ये भावनाएँ मेरी ऐसी हैं क्यों?

क्यों नहीं कहती हूँ सब दिल खोल के मैं?

वो दूर है तो क्या सुरक्षित हूँ मैं?

ये दूरी ही क्या है क़रीबी का सबब?


ये धड़कन कम्बख़्त क्यूँ घटती नहीं? 

ये पसीने की बूंदें क्यूँ छुपती नहीं? 

ये दुपट्टा सँभालूँ कि दूध गैस से उतारूँ? 

क्या-क्या करूँ,  क्या-क्या सँभालूँ?


ये प्यार ऐसे तो होता नहीं है 

किताबों में तो ऐसा कभी पढ़ा नहीं है 

सामने हो इंसान तो समझ में भी आए आवाज़ की बेसिस पे तो ये होता नहीं है

लच्छेदार बातों की एक होती हूँ उम्र 

साल-दर-साल ये चलता नहीं 


क्यों होता है प्यार, क्यों होता है प्यार मिलता है सुकून, मिलता करार

और यही प्यार छीन लेता है सब्र-ओ-करार 


राहुल उपाध्याय । 20 मार्च 2026 । सिएटल