इतवारी पहेली:
चाहे हो शिवानी, चाहे हो ###
बात मेरी नहीं, हमेशा अपनी # ##
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 11 अक्टूबर 2026 को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 4 अक्टूबर 2026 । सिएटल
Sunday, October 11, 2026
Re: इतवारी पहेली: 2026/10/04
Posted by Rahul Upadhyaya at 4:13 AM
आपका क्या कहना है??
सबसे पहली टिप्पणी आप दें!
ऊपर क्लिक कर देखें कि इस कविता पर किसने क्या कहा?
Saturday, October 10, 2026
चिंगारी
चिंगारी कोई भड़के तो जनमानस मज़ा उठाए
अप्रिय घटना न घटे तो कैसे कोई फोन चलाए
जनतंत्र जो आग बुझाए, जो सबका ख़्याल रखे
उसे हर कोई चाहे, उसे हर कोई जिताए
माना युवा के आगे नहीं चलता ज़ोर किसी का
लोगों का दोष नहीं है ये दोष है और किसी का
भाड़े पर जो लोगों को जोड़े उसे कौन जताए
कि हंगामा ही करना है तो हमें बख़्श दो हाए
हमसे मत पूछो कैसे चलता है आंदोलन सब का
वोटों की बात नहीं है ये किस्सा है हसरत का
जिन्हें काम है काज है करना वो न भीड़ लगाए
जो भीड़ को आग में झोंके उन्हें कौन जिताए
न जाने क्या हो जाता, जाने वो क्या कर जाते
बंदोबस्त था तो बच गए वरना कितने मर जाते
सोचो तो व्यवस्था के दम पे घर कितने बचाए
‘गर विरोध है करना तो राष्ट्रपति को आप बताए
(आनंद बख़्शी से क्षमायाचना सहित)
राहुल उपाध्याय । 10 अक्टूबर 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 9:53 PM
आपका क्या कहना है??
सबसे पहली टिप्पणी आप दें!
ऊपर क्लिक कर देखें कि इस कविता पर किसने क्या कहा?
कहाँ तक दुःख गिनाऊँ
कहाँ तक दुःख गिनाऊँ?
नाना का दुःख मनाऊँ
कि नाकाबंदी का?
मेडल का जश्न मनाऊँ
कि बँधुआ मज़दूरों को
ढाढ़स मैं दिलाऊँ?
बढ़ते शेयर पे मैं इतराऊँ
कि महँगाई का रोना गाऊँ?
हर तरफ़ है चिंता
हर तरफ़ है खुशी
किसे छोड़ूँ?
किसे अपनाऊँ?
या लम्बी चादर तान सो जाऊँ?
या बस
दिमाग का दही कर जाऊँ?
राहुल उपाध्याय । 10 अक्टूबर 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 7:15 AM
आपका क्या कहना है??
सबसे पहली टिप्पणी आप दें!
ऊपर क्लिक कर देखें कि इस कविता पर किसने क्या कहा?
Saturday, October 3, 2026
इतवारी पहेली: 2026/10/04
इतवारी पहेली:
चाहे हो शिवानी, चाहे हो ###
बात मेरी नहीं, हमेशा अपनी # ##
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 11 अक्टूबर 2026 को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 4 अक्टूबर 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 11:29 PM
आपका क्या कहना है??
सबसे पहली टिप्पणी आप दें!
ऊपर क्लिक कर देखें कि इस कविता पर किसने क्या कहा?
Saturday, September 26, 2026
कल
मैंने कल पहना
तो फ़िट नहीं आया
कहीं-कहीं
कुछ-कुछ
मरा-मरा सा था
बासी सा
रंग फीके पड़ गए थे
कहीं-कहीं से
सिलाई भी उधड़ गई थी
कल
जैसा कल था
आज क्यों नही है?
मेरी स्मृति से
मेल क्यों नहीं खाता?
राहुल उपाध्याय । 26 अगस्त 2026 । सिएटल
(https://aboshupadhyaya.substack.com/p/make-believe?r=1z8h44&utm_medium=ios से प्रेरित)
Posted by Rahul Upadhyaya at 4:45 PM
आपका क्या कहना है??
सबसे पहली टिप्पणी आप दें!
ऊपर क्लिक कर देखें कि इस कविता पर किसने क्या कहा?
Tuesday, September 22, 2026
चीटिंग
जब बात हमारी हो
तो हम वकील बन जाते हैं
जब दूसरों की हो
तो जज
—
चीटिंग करना
कोई गुनाह नहीं है
चाहे वो परीक्षा के दौरान हो
या रिश्तों में
वरना
कोई पुलिस कार्यवाही होती
कोई जेल जाता
उल्टा
उन्हें सम्मानित किया जाता है
चाहे वो
धर्मेंद्र हो
बोनी कपूर हो
या कुकु कोहली
राहुल उपाध्याय । 22 सितम्बर 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 11:12 PM
आपका क्या कहना है??
सबसे पहली टिप्पणी आप दें!
ऊपर क्लिक कर देखें कि इस कविता पर किसने क्या कहा?
Monday, September 21, 2026
देश का फ्यूचर
संडे को झंडे
मंडे को डंडे
देश के फ्यूचर का
ऐसा है रन-वे
क्रिकेट देखो
नेटफ़्लिक्स देखो
समय बचे तो
हर-हर गंगे
दिये जलाओ
भजन भी गाओ
ज़ोर-ज़ोर से बजाओ
मंदिरों में घंटे
पढ़ना-लिखना
गँवारो का काम है
तुम तो जुटाओ
दो-चार गुंडे
हमसे तो कुछ
होता नहीं है
सब कुछ करेगा
तुकाराम मुंडे
सब कुछ तो बढ़िया
चल ही रहा है
लेने हमें क्यूँ
बार-बार पंगे
नौकरी तो नहीं
मिलेगी लेकिन
ईश्वर तो मिलेंगे
अगर जो ढूँढें
राहुल उपाध्याय । 21 सितम्बर 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 6:17 AM
आपका क्या कहना है??
3 पाठकों ने टिप्पणी देने के लिए यहां क्लिक किया है। आप भी टिप्पणी दें।
ऊपर क्लिक कर देखें कि इस कविता पर किसने क्या कहा?
