तुम्हें चाहिए था पालतू
तो रख लेती कुत्ता ही
मैं हूँ एक जीवित आदमी
मुझे चाहिए आज़ादी
तुम चाहो मैं ध्यान करूँ
मैं चाहूँ उड़ान भरूँ
तुम चाहो मैं घर में बैठूँ
मुझे नापनी दुनिया सारी
जीवन का निचोड़ यही है
तू-तू मैं-मैं होगी ही
गले मिलने से विचार मिलेंगे
सोच है बिलकुल बचकानी
आगे पीछे और मिलेंगे
तुमको भी और मुझको भी
खुशियों के दिन चार मिलेंगे
फिर उतरेगी ख़ुमारी
राहुल उपाध्याय । 11 मार्च 2026 । सिएटल
