इतवारी पहेली:
दाल-चावल के लिए चाहिए दो ###
दाल पका पत्नी ले, चावल पका ## #
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 2 अगस्त 2026 को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 26 जुलाई 2026 । सिएटल
Saturday, August 1, 2026
Re: इतवारी पहेली: 2026/07/26
Posted by Rahul Upadhyaya at 11:40 PM
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Friday, July 31, 2026
क्या हुआ क्या नहीं
क्या हुआ क्या नहीं
कुछ हमें पता नहीं
ये चाल थी कि मौन रहे
या हुई ख़ता पता नहीं
कि हर तरीक़ा जायज़ है
युद्ध में ये पचा नहीं
कि हो गया घायल कोई
तो कोई घर से निकला नहीं
हो गया तमाशा खतम
राहुल तू घबरा नहीं
लोग भूल जाएंगे इसे
ज़ख़्म ये गहरा नहीं
राहुल उपाध्याय । 31 जुलाई 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 9:31 PM
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Sunday, July 26, 2026
इतवारी पहेली: 2026/07/26
इतवारी पहेली:
दाल-चावल के लिए चाहिए दो ###
दाल पका पत्नी ले, चावल पका ## #
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
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सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 2 अगस्त 2026 को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 26 जुलाई 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 1:49 AM
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Re: इतवारी पहेली: 2026/07/19
इतवारी पहेली:
सौ सूखी हैं, # ## हैं
लड़ रहा बस ### है
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 26 जुलाई 2026 को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 19 जुलाई 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 1:48 AM
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Saturday, July 25, 2026
दिल तो न था
दिल तो न था पर जाना पड़ा
ख़ामियाज़ा किसी को उठाना पड़ा
जर्जर है महल शायद बदलेगा कल फ़िलहाल तो जालों को हटाना पड़ा
ये तिनका था पीठ पे किसी ऊँट के
बढ़ गया बोझ तो बिठाना पड़ा
बरसों से दुनिया में बदला ही क्या है ग़रीबों को जान से जाना पड़ा
लीक से हटकर कभी कुछ किया ही नहीं बार-बार अनशन को आज़माना पड़ा
राहुल उपाध्याय । 25 जुलाई 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 8:15 AM
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Friday, July 24, 2026
घोंसला
घोंसला एक आज फिर से टूटा
नीड़ का निर्माण फिर से होगा
चलो किसी का पिंजरा तो छूटा
छत और दीवारें
बहुत ज़रूरी हैं
यह ज़रूरी तो नहीं कि
वह एक जेल हो
जहाँ
उड़ने की
जुड़ने की
बढ़ने की
आज़ादी न हो
राहुल उपाध्याय । 24 जुलाई 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 11:35 PM
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कहाँ जा रहा था
कहाँ जा रहा था
कहाँ आ गया
गुलज़ार और प्रदीप को छोड़
नारेबाज़ी पा गया
ये कौन सा तरीक़ा है
ये कौन सा मज़ाक है
सुन्दर-सुन्दर रील के बदले
कोहराम क्यों छा गया
क्या इसीलिए मैं विदेश आया था
इसलिए आई-फोन लिया था
कि एक दिन पलट के देखूँ
कौन से शहर में
कौन क़हर ढा रहा
ये अलगोरिदम क्यों फ़ेल हुए
ये सीन क्यों लीक हुए
मुझे मेरे पहाड़ों के
उछलती नदियों के
दूध से श्वेत झरनों के
सीन चाहिए
कहाँ जा रहा था
कहाँ आ गया
राहुल उपाध्याय । 24 जुलाई 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 9:10 AM
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