जिसे सोचता हूँ कि बेकार है
उसी से लेकिन मुझे प्यार है
वो करती है बातें बड़े ज्ञान की
उसे ज्ञान से न लेकिन सरोकार है
अकेला हूँ मैं, अकेली है वो
दोनों को दोनों की न दरकार है
हम हैं अलग तो ये बोलचाल है
हुए साथ तो बस तकरार है
ऐ धरती, ऐ अंबर कुछ तो बता
है किनारा कहीं कि बस मँझधार है
राहुल उपाध्याय । 27 अगस्त 2026 । सिएटल
