Saturday, April 18, 2026

इतवारी पहेली: 2026/4/19

इतवारी पहेली:


जब भरत लौट रहे थे अयोध्या सर पर ### ##

सारे रास्ते कोई था खड़ा इधर, कोई था ## ###


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 26 अप्रैल 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 19 अप्रैल 2026 । सिएटल 


Re: इतवारी पहेली: 2026/04/11

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On Sun, Apr 12, 2026 at 1:24 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


शादी के लिए क्या चाहिए, #### # कुछ और 

शर्मा लाया पगड़ी, #%# ## कुछ और


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 12 अप्रैल 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 5 अप्रैल 2026 । सिएटल 


Friday, April 17, 2026

एक नीला आसमान

एक नीला आसमान 

मेरे भीतर भी है

चांद-सितारे ही नहीं 

सूरज भी है


यह धरती मेरी 

ब्रह्मांड मेरा


इन सबसे परे 

जिसे छू न सको 

वहीं तो अस्तित्व है मेरा

वही तो व्यक्तित्व है मेरा


राहुल उपाध्याय । 17 अप्रैल 2026 । सिएटल





Thursday, April 16, 2026

मुझे मिलना है तुमसे

मुझे मिलना है तुमसे

मिलना है तुमसे 

पर अब कहां फिर मिल सकूंगी


तुम किसी और के हो के भी 

न किसी और के हो

कभी-कभी तो लगता है कि 

नहीं इस दौर के हो


मैं हूं राधा 

और तुम किशन हो मेरे

सात जन्मों का नहीं

जन्मों-जन्मांतर का है साथ हमारा 

बांधेंगे हमें क्या सात वो फेरे


जहाँ तुम रहोगे

वहाँ मैं रहूँगी 


स्थूल काया का 

कोई भरोसा नहीं 

नौकरी करेगी

घर संभालेगी

इधर-उधर भटका करेगी


जहाँ तुम रहोगे

वहाँ मैं रहूँगी


मुझे मिलना है तुमसे

मिलना है तुमसे 

पर अब कहां फिर मिल सकूंगी


राहुल उपाध्याय । 16 अप्रैल 2026 । सिएटल 





वजूद

तुम्हारी खुशबू से मेरा घर महक रहा है

यह मेरा-तुम्हारा ही मुझे बस खटक रहा है


तुम आए तो दिल को सुकून मिला

बहारों को जैसे ‘समन’ मिला

खिले फूल, मुस्कुराई फिजा

हाथों को नहीं तो क्या 

सांसों को तो तुम्हारा वजूद मिला


राहुल उपाध्याय । 16 अप्रैल 2026 । सिएटल 

Tuesday, April 14, 2026

प्रतिमा

कल एक प्रतिमा लगी 

जहां पहले से एक प्रतिमा थी


किसकी थी, कौन था, हमें क्या पता? 

हमने जानने की कोशिश भी नहीं की

करके भी क्या करते? 


जिसकी लगाई 

उसे तो हम जानते हैं

बचपन से पढ़ते आ रहे हैं


इतना जानते हुए भी 

तीन वाक्य से ज्यादा नहीं बोल पाएंगे 

कि उन्होंने अमेरिका में जाकर 

अपने देश का डंका बजाया था

बचपन में भगवान को नहीं मानते थे

फिर परमहंस के चेले बन गए 

और दुनिया भर को ज्ञान बांटा 


समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति होने के कारण

हमारा उत्तरदायित्व बनता है कि 

हम कुछ ऐसे काम करते रहें 

जिनसे लोगों को लगे कि 

हमने कुछ बढ़िया किया

चाहे कोई पलट कर 

फिर देखे तक नही


सॉफ्टवेयर का काम बहुत हो गया

अब थोड़ा लोहा-लंगड़ भी संभाल लिया जाए

कुछ दिन बाद देवी-देवता भी 

सड़क पर आ जाएँगे 

तब जाकर हमारा सपना पूरा होगा 


राहुल उपाध्याय । 14 अप्रैल 2026 । सिएटल 




Sunday, April 12, 2026

ख़बर मिली है

खबर मिली है

खबर का क्या किया जाए? 

सबको खबर लग चुकी है

खबर देने का क्या फायदा? 

सब दुख व्यक्त कर ही चुके हैं

पाँच सौ शब्द का निबंध भी लिख चुके हैं

एक अच्छा सा फोटो भी लगा दिया गया है

अब बचा ही क्या मेरे लिए 

कुछ कहने को

कुछ करने को


खबर मिली है

पर कुछ करने को नहीं है

चलो अब सोया जाए


राहुल उपाध्याय । 12 अप्रैल 2026 । सिएटल