Sunday, September 6, 2026

इतवारी पहेली: 2026/09/06

इतवारी पहेली:


नीम करौली बाबा के पास सिर्फ़ #%## था

कहते हैं उन बाबाजी में फिर भी न ## ## था


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 13 सितम्बर 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 6 सितम्बर 2026 । सिएटल 


Friday, September 4, 2026

वफ़ादारी

वफ़ादारी 

सभ्यता की निशानी है 

या ग़ुलामी की 


नहीं जानता


पर इतना ज़रूर है 

कि वफ़ादार 

एक किरायेदार है 

जिसे मकान मालिक 

कभी भी निकाल सकता है 

किराया बढ़ा सकता है 

यहाँ यह मत करो 

वहाँ ये मत करो 

इतनी बजे बाद यह मत किया करो 

50 प्रतिबंध लगा सकता है 


कौन तुमसे मिल सकता है 

कौन नहीं 

सब वह तय करता है 


राहुल उपाध्याय । 4 सितम्बर 2026 । सिएटल 




Thursday, September 3, 2026

भाषा ये भाई नहीं

मूलियों का मूल्य नहीं

मूंगफली में मूंग नहीं

गांधारी पे गन नहीं

बैंगन पे बैन नहीं 

अजवाइन में वाइन नहीं

भाषा ये भाई नहीं


जामुन में जाम नहीं 

पाजेब में जेब नहीं

मंथन का मन नहीं 

धंधे में धन नहीं

चारपाई में पाई नहीं

भाषा ये भाई नहीं


सैंडल में सैंड नहीं 

टिन्डे में टिन नहीं

लौकी में लौ नहीं

भिन्डी भी भिन्न नहीं

टाइटल में टाई नहीं

भाषा ये भाई नहीं


ईमान का मान नहीं

संतों की संतान नहीं 

संतान भी संत नहीं

फ़र्ज़ी के फ़र्ज़ नहीं

ए-आई में आई नहीं

भाषा ये भाई नहीं


रोकड़ा न कभी रुके

दीपक से कुछ न पके

समोसा न मौसा दे

नाना न ना कहे

(समधन की नाक है)

ए-आई में आय नहीं

भाषा ये भाई नहीं


पर्दे के पर नहीं

सर्दी में सर नहीं

अरबी में अरब नहीं 

चीनी, पर चीनी नहीं 

वायलेंस में वाई नहीं 

भाषा ये भाई नहीं


घासलेट में घास नहीं 

चौके में चौक नहीं 

शक्कर पे शक नहीं 

बाइक पे बाई नहीं

वायरस में वाई नहीं

भाषा ये भाई नहीं


राहुल उपाध्याय । 3 सितंबर 2026 । सिएटल 

जाने वो कैसे लोग थे

जाने वो कैसे लोग थे 

जिनका ए-आई से काम बना

हमने तो जब करने को बोला

"नहीं कर सकता" ये कहा


इसको ही जीना कहते हैं

तो यूं ही जी लेंगे

सच ना कहेंगे

कूल-ऐड पी लेंगे

झूठ से अब घबराना कैसा? 

झूठ सौ बार सुना 


बिगड़ गया मेरा सारा बजट 

टोकन ले-ले के

कोई तो हो जो मेरी सुन ले 

और कुछ काम करे

फेबल-शेबल कुछ काम ना आए

ऐजेंट निष्प्राण पड़ा


जैसे-जैसे दिन बढ़ जाए

मेरी आस घटे

कभी कुछ कह दे

कभी कुछ सुन ले

सत्यानाश करे

इस रोग का कोई अंत नहीं है 

रोग बेजोड़ बड़ा


राहुल उपाध्याय । 2 सितंबर 2026 । सिएटल


Saturday, August 29, 2026

मुँहबोली

जैसे कोई बहन न हो

तो कोई महिला 

मुँहबोली बहन

बन राखी बांध देती है


वैसे ही कोई पत्नी न हो

तो कोई महिला

मुँहबोली पत्नी 

बन करवा चौथ नहीं रख सकती?


राहुल उपाध्याय । 29 अगस्त 2026 । सिएटल 










मेरा फोन

मेरा फोन 

मेरे दादा की बीड़ी है

इसके बिना 

पेट साफ नहीं होता 


मेरा फोन 

मेरे पिता का अखबार है

इसके बिना 

खाना हजम नहीं होता 


मेरा फोन 

मेरी माँ का मंदिर है

इसे छुए बिना 

दिन शुरू नहीं होता


मेरा फोन 

मेरी बहन की डायरी है

बिना राज़ बताए 

छटपटाहट खत्म नहीं होती 


मेरा फोन 

मेरा कैमरा है

सुंदर नज़ारों को कैद किए बिना 

चैन नहीं आता


मेरा फोन 

मेरा सब कुछ है

बस फोन नहीं है

न कोई फोन करता है

न मैं करता हूँ


राहुल उपाध्याय । 29 अगस्त 2026 । सिएटल 


Friday, August 28, 2026

बेर

मैं बेर तोड़ने गया था

मित्र हाथ आ गया 


वह अजनबी था

मैंने बेर तोड़ना सिखाया 

वह मित्र बन गया 



आज कुछ 

मीठी 

रसीली

नरम

ब्लैक बेरियाँ

काँटों से छुड़ाई 

उन्हें उनके चंगुल से

आज़ाद किया 


यह अलग बात है कि 

अब मैं उन्हें अपने 

अंग लगाऊँगा 


अपने शरीर का

ख़ून बढ़ाऊँगा 

उन्हें 

खा जाऊँगा


अक्सर 

आज़ादी की क़ीमत

ऐसे ही चुकाई जाती है 


राहुल उपाध्याय । 28 अगस्त 2026 । सिएटल