हम कब तब भिखारी बने रहेंगे?
एक तरफ़ तो हम
पूरे ज़ोर-शोर से
दान देने को लालायित रहते हैं
यहाँ इस मंदिर को इतना दिया
उस ग़रीब की इतनी मदद की
उस कोष में इतना डाला
केयर फंड में इतना
जब टैक्स
देने की बारी आती है
तो भिखारी सी हालत हो जाती है
करोड़ कमाया
चालीस लाख सरकार ले गई
साठ लाख से क्या होगा?
महँगे से महँगा
फ़ोन हाथ में है
बेटा आइस क्रीम खानी है?
शौक़ से खाओ
स्पाइडर मैन देखनी है
ज़रूर देखना
पॉपकॉर्न भी ले लेना
कोकाकोला मत भूलना
सरकार
इन सब पर हिस्सा माँगे
तो एक कौड़ी भी ज़्यादा लगती है
राहुल उपाध्याय । 16 सितम्बर 2026 । सिएटल
