एक नीला आसमान
मेरे भीतर भी है
चांद-सितारे ही नहीं
सूरज भी है
यह धरती मेरी
ब्रह्मांड मेरा
इन सबसे परे
जिसे छू न सको
वहीं तो अस्तित्व है मेरा
वही तो व्यक्तित्व है मेरा
राहुल उपाध्याय । 17 अप्रैल 2026 । सिएटल
एक नीला आसमान
मेरे भीतर भी है
चांद-सितारे ही नहीं
सूरज भी है
यह धरती मेरी
ब्रह्मांड मेरा
इन सबसे परे
जिसे छू न सको
वहीं तो अस्तित्व है मेरा
वही तो व्यक्तित्व है मेरा
राहुल उपाध्याय । 17 अप्रैल 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 2:35 PM
आपका क्या कहना है??
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ऊपर क्लिक कर देखें कि इस कविता पर किसने क्या कहा?
मुझे मिलना है तुमसे
मिलना है तुमसे
पर अब कहां फिर मिल सकूंगी
तुम किसी और के हो के भी
न किसी और के हो
कभी-कभी तो लगता है कि
नहीं इस दौर के हो
मैं हूं राधा
और तुम किशन हो मेरे
सात जन्मों का नहीं
जन्मों-जन्मांतर का है साथ हमारा
बांधेंगे हमें क्या सात वो फेरे
जहाँ तुम रहोगे
वहाँ मैं रहूँगी
स्थूल काया का
कोई भरोसा नहीं
नौकरी करेगी
घर संभालेगी
इधर-उधर भटका करेगी
जहाँ तुम रहोगे
वहाँ मैं रहूँगी
मुझे मिलना है तुमसे
मिलना है तुमसे
पर अब कहां फिर मिल सकूंगी
राहुल उपाध्याय । 16 अप्रैल 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 10:34 AM
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तुम्हारी खुशबू से मेरा घर महक रहा है
यह मेरा-तुम्हारा ही मुझे बस खटक रहा है
तुम आए तो दिल को सुकून मिला
बहारों को जैसे ‘समन’ मिला
खिले फूल, मुस्कुराई फिजा
हाथों को नहीं तो क्या
सांसों को तो तुम्हारा वजूद मिला
राहुल उपाध्याय । 16 अप्रैल 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 7:02 AM
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कल एक प्रतिमा लगी
जहां पहले से एक प्रतिमा थी
किसकी थी, कौन था, हमें क्या पता?
हमने जानने की कोशिश भी नहीं की
करके भी क्या करते?
जिसकी लगाई
उसे तो हम जानते हैं
बचपन से पढ़ते आ रहे हैं
इतना जानते हुए भी
तीन वाक्य से ज्यादा नहीं बोल पाएंगे
कि उन्होंने अमेरिका में जाकर
अपने देश का डंका बजाया था
बचपन में भगवान को नहीं मानते थे
फिर परमहंस के चेले बन गए
और दुनिया भर को ज्ञान बांटा
समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति होने के कारण
हमारा उत्तरदायित्व बनता है कि
हम कुछ ऐसे काम करते रहें
जिनसे लोगों को लगे कि
हमने कुछ बढ़िया किया
चाहे कोई पलट कर
फिर देखे तक नही
सॉफ्टवेयर का काम बहुत हो गया
अब थोड़ा लोहा-लंगड़ भी संभाल लिया जाए
कुछ दिन बाद देवी-देवता भी
सड़क पर आ जाएँगे
तब जाकर हमारा सपना पूरा होगा
राहुल उपाध्याय । 14 अप्रैल 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 6:57 PM
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खबर मिली है
खबर का क्या किया जाए?
सबको खबर लग चुकी है
खबर देने का क्या फायदा?
सब दुख व्यक्त कर ही चुके हैं
पाँच सौ शब्द का निबंध भी लिख चुके हैं
एक अच्छा सा फोटो भी लगा दिया गया है
अब बचा ही क्या मेरे लिए
कुछ कहने को
कुछ करने को
खबर मिली है
पर कुछ करने को नहीं है
चलो अब सोया जाए
राहुल उपाध्याय । 12 अप्रैल 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 1:39 AM
आपका क्या कहना है??
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इतवारी पहेली:
शादी के लिए क्या चाहिए, #### # कुछ और
शर्मा लाया पगड़ी, #%# ## कुछ और
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 12 अप्रैल 2026 को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 5 अप्रैल 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 1:26 AM
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इतवारी पहेली:
है डेटिंग एप मगर नाम है डरावनाः #^##
पसंद है सबको, नहीं जाता कोई ## ##
(पहली पंक्ति का शब्द अंग्रेज़ी का है। दूसरी पंक्ति का पहला शब्द भी अंग्रेज़ी का है)
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 12 अप्रैल 2026 को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 5 अप्रैल 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 1:24 AM
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