इतवारी पहेली:
चेतन के चक्कर में उसने मार दिया ### को
जाकर ऊँचाई पर धकेला मंगेतर # ## को
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं।
सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 5 जुलाई 2026 को - उत्तर बता दूँगा।
राहुल उपाध्याय । 28 जून 2026 । सिएटल
Sunday, July 5, 2026
Re: इतवारी पहेलीः 2026/06/28
Posted by Rahul Upadhyaya at 8:15 AM
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Sunday, June 28, 2026
इतवारी पहेलीः 2026/06/28
इतवारी पहेली:
चेतन के चक्कर में उसने मार दिया ### को
जाकर ऊँचाई पर धकेला मंगेतर # ## को
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)
जैसे कि:
हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं।
Https://tinyurl.com/RahulPaheliya
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राहुल उपाध्याय । 28 जून 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 4:11 AM
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Sunday, June 21, 2026
डीपी में नही
डीपी में नहीं
पासवर्ड में है वो
मेरी प्रेयसी, मेरी जान
मेरे दिल में रहती है
ना सेल्फी है कोई
ना तस्वीर कोई
मेरी जान मेरी आँखों में रहती है
मेरी आँखों की चमक
मेरे कपड़ों के रंग
मेरे घर की सुगंध
इन सब में विद्यमान रहती है
मेरी प्रेयसी
मेरे साथ
दिन-रात रहती है
राहुल उपाध्याय । 21 जून 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 1:45 PM
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Sunday, June 14, 2026
मोहब्बत की डगर मुस्किल
मोहब्बत की डगर मुश्किल
मोहब्बत करके देखेंगे
भले ही दूर हो मंज़िल
मोहब्बत करके देखेंगे
तुम्हारी करके हम तारीफ़
तुम्हारा दिल जीत ही लेंगे
कभी तुम आओ तो ग़ाफ़िल
मोहब्बत करके देखेंगे
नफ़रतों के दौर में ऐ दिल
सुना तू गीत मोहब्बत के
कभी तो पिघलेंगे संग दिल
मोहब्बत करके देखेंगे
तुम्हें भी हो लगाव हमसे
कहाँ तक ये मुनासिब है
अगरचे हम नहीं क़ाबिल
मोहब्बत करके देखेंगे
कहाँ तुमने कहा हमसे
कि हमसे मिल नहीं सकते
यही तो है मेरा हासिल
मोहब्बत करके देखेंगे
राहुल उपाध्याय । 14 जून 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 8:09 PM
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साइकिल चला रही है
साइकिल चला रही है,
ईंधन बचा रही है
खटना ही जिंदगी है,
खटती ही जा रही है
देखो पी-एम
गए विदेश
लेकर के साथ मेलोडी
देखेगा कौन
पूछेगा कौन
जनता के दुख दर्द की
मरती है रोज़ थोक में
मरती ही जा रही है
आगे चुनाव
पीछे चुनाव
हर रोज़ चुनाव-चुनाव
इसको खैरात,
उसको खैरात,
हर तरफ़ खैरात-खैरात
सट्टा लगा रही है
सत्ता बचा रही है
आए पी-एम
गए पी-एम
ऐसे नहीं है देखे
सर पे है ताज
हाथ में है माइक
गड़ते हैं झूठे क़िस्से
सुनती वो जा रही है
सुनती ही जा रही है
राहुल उपाध्याय । 14 जून 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 7:16 PM
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Sunday, June 7, 2026
Re: इतवारी पहेलीः 2026/05/31
इतवारी पहेली:
कहते हैं मुझसे मैं सोना न ###
मन करता है सुना खरी-## #
इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)
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हे हनुमान, राम, जानकी
रक्षा करो मेरी जान की
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राहुल उपाध्याय । 31 मई 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 5:35 AM
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Saturday, June 6, 2026
ये जिंदगी की है दौलत।
ये ज़िंदगी की है दौलत
ये ज़िंदगी की सज़ा भी
कहते हैं मोहब्बत जिसको
है खूबसूरत बला सी
पहले कहाँ थी ये आदत
हर रोज देखें किसी को
दिन-रात चिपके हैं फोन से,
जैसे हो प्रेयसी हमारी
अपने इन ख्वाबों के पीछे
हम क्यों सदा भागते हैं
जब सब कुछ है मन के भीतर
फिर क्यूँ है इक बदहवासी
हाथों से अपने ही आखिर
बनता-बिगड़ता है सब कुछ
फिर क्यूँ उठा के इनको
करते हैं एक दुआ भी
होता है हर रोज कोई
तमाशा जो चौंकाए हमको
तमाशों से रोचक है जीवन
तमाशा ही है ज़िंदगानी
राहुल उपाध्याय । 6 जून 2026 । सिएटल
Posted by Rahul Upadhyaya at 6:40 AM
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