Tuesday, April 7, 2026

जानता हूँ मैं तुम्हें

जानता हो मैं तुम्हें इतने क़रीब से

और लिख नहीं पाता तुम्हारी व्यथा 


मुझसे जुदा तो नहीं है

तुम्हारी व्यथा 

तुम्हारी कथा 

तुम्हारी ख़ता 


मैं ही हूँ कारक 

तुम्हारे हर उस जुर्म का

मैं ही हूँ कारक 

तुम्हारे हर उस पुण्य का


अहं ब्रह्मास्मी 

अहं कृष्णास्मी

अहं त्वमस्मी


मैं नहीं होता तो 

तुम्हें दुनिया भर का 

प्यार नहीं मिलता 

प्यार क्या है 

तुम्हें पता ही नहीं होता

तुम्हें नहीं समझ आता

प्यार की दीवानगी कैसी होती है 

रातों की नींद कैसे उड़ जाती है 

पाँव कहीं के कहीं क्यों पड़ते हैं 

दुनिया की लाज शर्म 

कहाँ दरकिनार हो जाती है 

सब कुछ कैसे नगण्य हो जाता है 

फ़ोन की घंटी क्यों प्रिय लगती है 

फ़ोन क्यों जी जान से प्यार हो जाता है

क्यों रात के दो बजे भी 

किसी से बात करना अच्छा लगता है 


क्यूँ किसी को बंधन में नहीं बाँधना है

फिर भी बाँधना है 

क्यूँ किसी से सिर्फ़ दिल का रिश्ता है

फिर भी छूने को दिल करता है 

क्यूँ किसी को दुआएँ देना

कि वह ख़ुश रहे

और जब वह खुश हो

किसी और के साथ 

तो दुखी होना


क्यूँ इश्क़ 

आग का दरिया है

सावन की घटा है 

ख़ुद ही इनाम

ख़ुद ही सज़ा है


मैं जानता हूँ तुम्हें 

जैसे मैं ख़ुद को जानता हूँ 

बस नहीं लिख सकता

तुम्हारी व्यथा 

तुम्हारी कथा 

तुम्हारी ख़ता 


राहुल उपाध्याय । 7 अप्रैल 2026 । सिएटल 




Sunday, April 5, 2026

मैं तुमसे प्यार नहीं करता

इतना तो सच है कि 

मैं तुमसे प्यार नहीं करता 

करता होता तो

किसी और से बात नहीं करता

किसी और से हाल नहीं पूछता 

किसी और का हाथ नहीं बटाता 

किसी और का दुख-सुख में साथ नहीं देता 

किसी और को अपने घर आने नहीं देता

किसी और के बुलाने पर उसके घर नहीं जाता

किसी और को एयरपोर्ट नहीं छोड़ता 

किसी और को प्यार नहीं करता


प्यार भी अजीब है

एक तो मिलता नहीं है 

दूजा मिलता है तो 

छप्पर फाड़ के मिलता है 


राहुल उपाध्याय । 5 अप्रैल 2026 ।  सिएटल 


Saturday, April 4, 2026

इतवारी पहेली: 2026/04/05

इतवारी पहेली:


है डेटिंग एप मगर नाम है डरावनाः #^##

पसंद है सबको, नहीं जाता कोई ## ##


(पहली पंक्ति का शब्द अंग्रेज़ी का है। दूसरी पंक्ति का पहला शब्द भी अंग्रेज़ी का है)


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 12 अप्रैल 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 5 अप्रैल 2026 । सिएटल 

Re: इतवारी पहेली: 2026/03/29



On Sun, Mar 29, 2026 at 12:01 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


कितनी महँगाई है इलाहाबाद यानी ##### में

कि बबलू सोता है घाट पर और ## ### में


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 5 अप्रैल 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 29 मार्च 2026 । सिएटल 


चराग ढूँढ लिया

चराग ढूंढ लिया 

बुझते चिराग ने 

दुनिया ये जल रही है 

बुझते चिराग से


सुन के हज़ार क़िस्से 

हमने ये आज माना 

हर बार ही नए हैं 

क़िस्से ये प्यार के


मुझसे ख़फ़ा है आज जो 

बरसो के मीत है 

कहते हैं आप ही क्यूँ 

दुख औरों के काटते


कहता नहीं था लेकिन

कहता हूँ आज सब से

करना है प्यार कर लो 

रख के दिमाग़ घर पे


पति और पत्नी दोनों बस 

काम के लिए हैं 

इक आशिक़ी वो शय है 

जो झोली में प्यार भर दे


राहुल उपाध्याय । 4 अप्रैल 2026 । रोग रिवर (बाग़ी नदी), ओरेगन


Thursday, April 2, 2026

उथल-पुथल

ये जो मन की 

उथल-पुथल है 

अच्छी है

पता चलता है कि

मैं जीवित हूँ 


उसका मुझसे रूठ जाना

संकेत है कि

मैंने कुछ अपने मन का किया


उसका किसी से जुड़ जाना

संकेत है कि

मुझे अभी और 

सँवरना है

सुधरना है 

निखरना है 

खतरे मोल लेना है 


वो मिलती नहीं 

मगर मिलती ज़रूर है 

इसे आधा ख़ाली कहूँ 

कि आधा भरा

इसी उधेड़बुन में

सोता हूँ 

जगता हूँ 

स्वप्न देखता हूँ 

जगने के ख़्वाब देखता हूँ 


जीवन

न 'गाइड' है

न 'हम दिल दे चुके सनम'

या 'सिलसिला'

कि ऊँट 

किसी करवट तो बैठेगा 


जीवन की कहानी 

कभी ख़त्म नहीं होती 

न सुखांत में

न दुखांत में

चलती रहती है 


धोखा देने वाला 

धोखा देता रहता है 

पकड़ा नहीं जाता

सज़ा नहीं पाता

क्रम चलता रहता है


ये उथल-पुथल 

अच्छी है


राहुल उपाध्याय । 2 अप्रैल 2026 । सेन फ्रांसिस्को 

Monday, March 30, 2026

कल तलक साथ थे

कल तलक साथ थे 

आज दोनों जुदा 

दोनों ही खुश नहीं 

फिर हुआ क्या पता 


जाने क्या बात हुई 

जाने क्यों हैं ख़फ़ा 

उठ के वो चल दिए 

बदल लिया रास्ता 


बेवफ़ा वो नहीं 

बेवफ़ा वो तो है 

सोच के ही खुश है वो 

इलज़ाम झूठ ना लगा 


हर तरफ़ हैं खिल रहे 

फूल प्यार के सभी 

अब उन्हें क्या देखिए 

जब चल रहा ये मामला 


बात अपनी कही

या कही जहान की 

जज बन के आप ही 

दीजिए फ़ैसला 


राहुल उपाध्याय । 30 मार्च 2026 । कॉटनवुड, कैलिफ़ोर्निया