Monday, August 29, 2022

मेरे सरकार, मेरे प्राण

मेरे सरकार, मेरे प्राण 

ये मेरी अरदास है तुझसे

तू मेरे पास ही रहना 

पलटना मुख ना मुझसे 


मैं तुझको भोग लगाऊँगा 

मैं तुझको गीत सुनाऊँगा

तू मेरे घर में ही रहना 

पलटना मुख ना मुझसे 

 

मैं तुझे रोज़ सजाऊँगा 

मैं तुझको रोज़ सुलाऊँगा 

तू मेरे साथ ही रहना 

पलटना मुख ना मुझसे 


मैं तुझसे और न माँगूँगा 

न तुझको और सताऊँगा 

तू मेरे दिल में ही रहना 

पलटना मुख ना मुझसे 


राहुल उपाध्याय । 29 अगस्त 2022 । सिएटल 

पछतावा

कैसे दिन आ गए हैं 

कि हमें किसी के दुख से

सुख मिलता है 

और सुखी को

दुखी करने में मज़ा आता है 

और उस पर यह कहने की हिमाक़त कि

सर्वे भवन्तु सुखिन:


अरे रोज़-रोज़ 

व्हाट्सएप पर इतना ज्ञान बघारनेवालों 

कुछ पछतावे के लिए भी 

समय निकाल लिया करो


राहुल उपाध्याय । 29 अगस्त 2022 । सिएटल 




Sunday, August 28, 2022

हमें दुख हुआ है कितना

हमें दुख हुआ है कितना 

ये हम नहीं जानते

मगर देख नहीं पाते

तुम्हारा विनाश 


सुना जग हँसाई का

सामाँ बन गए तुम 

घर-घर तमाशे का

सामाँ बन गए तुम

दुख भी यहाँ पे लगे

सुख से महान

ये दिल है उदास कितना

ये हम नहीं जानते 

मगर देख नहीं पाते

तुम्हारा विनाश 


गिरे पे हँसे लोग

तड़पता है दिल

बड़ी मुश्किलों से फिर

सम्हलता है दिल

क्या-क्या जतन करते हैं 

तुम्हें क्या पता

सुनें अट्टहास कितना

ये हम नहीं जानते 

मगर देख नहीं पाते

तुम्हारा विनाश 


राहुल उपाध्याय । 28 अगस्त 2022 । सिएटल 

Saturday, August 27, 2022

Re: इतवारी पहेली: 2022/08/21



On Sun, Aug 21, 2022 at 12:40 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


ये जो असबाब हैं मेरे ### # #

कलियुग में हर ### ## #


असबाब = सामान (घर-गृहस्थी)

(दो अक्षर वाला शब्द अंग्रेज़ी का है पर हिन्दी में प्रचलित है)


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya



आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 28 अगस्त को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 21 अगस्त 2022 । सिएटल 















इतवारी पहेली: 2022/08/28


इतवारी पहेली:


जिनके इष्ट न कृष्ण हैं, # ## #

आजकल ऐसे नारी और ## ## #


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya



आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 4 सितम्बर को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 28 अगस्त 2022 । सिएटल 















Friday, August 26, 2022

कर्मचारी

पहले 

उस घर में

दो लोग रहते थे 

अब

दो कर्मचारी रहते हैं 

जो कि

हर घंटे 

कुछ न कुछ 

कमाते हैं 


ऐसा नहीं कि

धन की कमी है 

बस

ख़ाली हाथ बैठे रहना

एक बीमारी है 


बीमारी का इलाज 

पैसा कमाना ही है 

यह नहीं कि

कुछ लिख ले

कुछ पढ़ ले

कुछ गा ले

कुछ बजा ले

कुछ बना ले

कुछ मिटा दे

किसी का हाथ बँटा दे

किसी के काम आ जाए

कोई पेड़ लगाए

कुछ सुनें 

कुछ सुनाए


राहुल उपाध्याय । 26 अगस्त 2022 । सिएटल 



मोहब्बत करनी है तुमसे

मोहब्बत करनी है तुमसे

मेरा ये दिल न मानेगा

चुराऊँगा तुम्हें तुमसे

मेरा ये दिल न मानेगा


जिसे देखो मुझे बोले

मैं तेरे पास ना आऊँ

मेरा दिल शाद है तुमसे

मेरा ये दिल न मानेगा 


अगर हो रात भी काली

भले हो दिन दुआओं के

जुड़े हर हाल में तुमसे

मेरा ये दिल न मानेगा 


करो तुम लाख ताक़ीदें

सुनाओ दस बुरी बातें 

ये कह दूँ आज मैं तुमसे

मेरा ये दिल न मानेगा 


अरे है आज आशिक़ ये

हज़ारों साल रहेगा ये

करेगा इश्क़ ये तुमसे

मेरा ये दिल न मानेगा 


राहुल उपाध्याय । 26 अगस्त 2022 । सिएटल 


Thursday, August 25, 2022

ऐ मेरे प्यारे किशन

ऐ मेरे प्यारे किशन

ऐ मेरे दिल के चमन

तुझको है परणाम 

तू ही मेरी आस्था 

तू ही मेरा आसरा

तू ही चारों धाम


माँ के हाथों में भी तू

पित-भ्राता सब में तू

तेरा ही हर सू चलन

चाँद-सूरज सब में तू

जिधर जाऊँ, उधर पाऊँ

हर जगह सब में हैं तू


आते-जाते बंधु-बांधव

नाम तेरा साथ है 

हर पहर न हो सुबह

हो भी जाती रात है

रात हो या बात कोई 

डरने की क्या बात है 


मेरे दामन में जो आए

सब तेरा परसाद है

हाथ फैला के क्या मैं माँगू

सर पे तेरा हाथ है

तुझसे ही है निशा प्यारी

तुझसे ही परभात है


राहुल उपाध्याय । 22 अगस्त 2022 । सिएटल 

https://youtu.be/V1O-i3xkNU0


Monday, August 22, 2022

ग़म बहुत बिकता है

मैंने देशभक्ति पर गीत लिखा 

जवाब आया 

बहुत देर हो गई

पन्द्रह अगस्त निकल गया


मैंने कृष्ण भजन लिखा 

जवाब आया 

बहुत देर हो गई

जन्माष्टमी निकल गई


मैंने दुख भरा गीत लिखा 

जवाब आया 

ये हुई न बात

मज़ा आ गया

तुम भी ख़ुश

हम भी ख़ुश 

वे भी ख़ुश 

ग़म बहुत बिकता है

पूरे साल बिकता है


राहुल उपाध्याय । 22 अगस्त 2022 । सिएटल 




Sunday, August 21, 2022

इतवारी पहेली: 2022/08/21


इतवारी पहेली:


ये जो असबाब हैं मेरे ### # #

कलियुग में हर ### ## #


असबाब = सामान (घर-गृहस्थी)

(दो अक्षर वाला शब्द अंग्रेज़ी का है पर हिन्दी में प्रचलित है)


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya



आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 28 अगस्त को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 21 अगस्त 2022 । सिएटल 















Thursday, August 18, 2022

है अपना भी कोई मत

किसी की माँ की

किसी के पिता की

तस्वीरें थीं डीपी पे

बुलडोज़र चलवाया

और उतरवा दीं मंत्री ने 


देशभक्ति की आड़ में

हमने क्या-क्या न गवाया

है पीर कहीं और कहीं 

हमने बताया 


कभी थाल तो कभी दीप

कभी डीपी लगाया

है अपना भी कोई मत

ये हुकूमत ने भुलाया 


जो होता है सड़क पे

हो घर पे 

क्या है ये ज़रूरी?

माँ-बाप से है प्यार 

तो क्या ये ख़ामी है मेरी?

क्यों शीश नवाना

नहीं हैं काफ़ी 

झंडा फहराना

क्यों हो गया हावी?


राहुल उपाध्याय । 18 अगस्त 2022 । सिएटल 





Wednesday, August 17, 2022

कभी पूरा, कभी अधूरा है चाँद

कभी पूरा, कभी अधूरा है चाँद 

रातों को रोशन करता है चाँद 


डरते-डराते मिलने आता है वो

मोहब्बत है तभी तो डरता है चाँद 


मिलता है मुझसे, भले छ: हाथ दूर

सजता-सँवरता-निखरता है चाँद 


पाता है जब भी, है लेता निकाल

मौक़े पे चौका धरता है चाँद 


है दाग़ उस पर, पर दिखता नहीं 

मुझी पर उजागर करता है चाँद 


जो दिखता नहीं, दिखाते नहीं 

दिखा कर मुझे ख़ुश रहता है चाँद 


24 घंटे में होते ग़ायब हैं टेक्स्ट 

महफ़ूज़ मुझको रखता है चाँद 


है उम्र एक नम्बर, सच ही तो है 

अंकों में कहाँ पड़ता है चाँद 


पढ़ कर तिथि समझ आती है बात

वरना मैं ये नहीं, कहता है चाँद 


दीवाने उसके हज़ारों हज़ार 

है फक्र मुझको ये मेरा है चाँद 


मिल जाए उसको जो चाहता है वो

ख़ुशी मेरी दुगनी जब हँसता है चाँद 


हो जाए दो एक, मोहब्बत हो पूरी

चाहत ये मेरी समझता है चाँद 


कितनी हैं बातें जो कही ही नहीं 

रग-रग में मेरी यूँ रमता है चाँद 


है शायर उसी का, शायरी उसी की

नग़मों से मेरे टपकता है चाँद 


है मकते में राहुल, ये कैसा क़हर 

क्यूँ बेनाम, गुमनाम रक्खा है चाँद 


राहुल उपाध्याय । 17 अगस्त 2022 । सिएटल 







मोहब्बत से मेरा हुआ नाम है

मोहब्बत से मेरा हुआ नाम है 

आँखों से उनकी पीया जाम है


न होती मोहब्बत न होता मैं शायर

मोहब्बत ने मुझको दिया काम है


इश्क़-मोहब्बत, यही तो है सब कुछ 

इसके सिवा क्या मेरा काम है 


मर जाऊँगा मैं पर रह जाएगा 

नग़मों में मेरा जो पैग़ाम है


सुनता कहाँ कोई मेरी ग़ज़ल 

पर जानते हैं राहुल मेरा नाम है 


राहुल उपाध्याय । 17 अगस्त 2022 । सिएटल 





वो अब ख़ुद को छुपाने लगे हैं

वो अब ख़ुद को छुपाने लगे हैं 

डीपी से भी डीपी हटाने लगे हैं 


मोहब्बत है तभी तो इंकार है

न करते हैं बातें, बताने लगे हैं 


ये कैसी मोहब्बत की मंज़िल है 

के मंजर सुहाने डराने लगे हैं 


वही सेल्फ़ियाँ, वही पाक नग़मे 

सुनो आज तो दिल दुखाने लगे हैं 


कहाँ से कहाँ तक कदम आ गए

मंज़िल से भी नज़रें चुराने लगे हैं 


राहुल उपाध्याय । 17 अगस्त 2022 । टोक्यो



हमारी उमर यूँ जवाँ हो गई


हमारी उमर यूँ जवाँ हो गई 

बढ़ी जा रही थी हवा हो गई 

न चिंता कोई न फ़िक्र ही है कोई 

माथे की शिकन भी फ़ना हो गई 


नज़र का इशारा नज़र आ रहा है 

हमें हुस्न के नज़दीक ला रहा है 

किधर के किधर पाँव पड़ने लगे हैं 

किशोर किशोरी के मन भा रहा है 

हमें जिसका कोई गुमां भी न था

वही आज हमको अता हो गई 


कहें क्या कि ख़ुद को हवा ही नहीं है 

ये क्या हो रहा है पता ही नहीं है 

ये दिल ढूँढता था दिन रात जिसको

हमें तो लगा था कि बना ही नहीं है 

फिर आया दिन आज ऐसा 

के नूर से चूर फ़िज़ा हो गई 


अभी और जिएँगे, अभी और मरेंगे 

मर-मर के उनपे बहुत हम जिएँगे 

वो जानेंगे नहीं प्यार होता है क्या

जब तक न उनको बता ख़ुद न देंगे 

हमारे ज़हन में ये ग़ुस्ताख़ियाँ 

न जाने कहाँ से निहां हो गईं


राहुल उपाध्याय । 16 अगस्त 2022 । टोक्यो 

Sunday, August 14, 2022

इतवारी पहेली: 2022/08/14


इतवारी पहेली:


जो आदी नहीं हैं सुनने # #

आ कर देखें आस-पास के ##


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। 


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya



आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 


सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 21 अगस्त को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 14 अगस्त 2022 । इन्दौर 















Saturday, August 13, 2022

यह मेरा तिरंगा है

यद्यपि पासपोर्ट अमेरिकन है 

हर कोशिका भारतीय है


मेलजोल मेरा धर्म 

रास्ते ज़िन्दगी 


तिरस्कृत होने का डर नहीं 

रंग से परहेज़ नहीं 

गानों का शौक़ है 


हैसियत कोई ख़ास नहीं 


राहुल उपाध्याय । 14 अगस्त 2022 । बेटमा (मध्य प्रदेश)


हवा टायर से निकल जाए

पहले दूध से घर चलता था

अब हवा टायर से निकल जाए

तो घर चलता है 

मोबाइल हैंग हो जाए तो

घर चलता है 


हरेक दुकान जब मैं तकता हूँ 

किसी के नुक़सान से वो चलती है 


बिजली न आए तो

इन्वर्टर बहुत बिकता है 

पानी अच्छा न हो तो

आर-ओ भी बहुत बिकता है 


हरेक दुकान जब मैं तकता हूँ 

किसी कमी की वजह से 

वो चलती है 


किसी कमी

किसी नुक़सान

किसी संकट से 

जो समाज चलता है 

बहन-बेटी की विदाई में

जो जमा होता है 

कैसी होगी वो खुशी

जिसमें सबका दु:ख 

मिला होता है 


राहुल उपाध्याय । 13 अगस्त 2022 । सरवन (मध्य प्रदेश)