Monday, October 12, 2026

छोड़ देना

मैं जब भी कहीं जाता हूँ 

ख़ुद को वहीं छोड़ आता हूँ 


बहुत ध्यान रखता हूँ 

कि सब पैक कर लूँ 


फ़ोन

चार्जर 

लैपटॉप 

लैपटॉप का चार्जर 

टूथब्रश 

पासपोर्ट 


नहीं कर पाता हूँ पैक 

तो ख़ुद को 


अपना नाम भी तो नहीं लिखता 

चैकलिस्ट में 

और बैग में जगह भी नहीं रहती एयरलाइन 

एक्स्ट्रा आइटम अलाउ भी नहीं करती 

ले भी लिया तो 

शायद बहुत ज़्यादा चार्ज करेगी 


न जाने कितनी जगह 

मैं ख़ुद को छोड़ आया हूँ 


राहुल उपाध्याय । 12 अक्टूबर 2026 । ऑस्टिन 

Sunday, October 11, 2026

Re: इतवारी पहेली: 2026/10/04

Uploaded Image

On Sun, Oct 4, 2026 at 1:29 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


चाहे हो शिवानी, चाहे हो ### 

बात मेरी नहीं, हमेशा अपनी # ##


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 11 अक्टूबर 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 4 अक्टूबर 2026 । सिएटल 


Saturday, October 10, 2026

चिंगारी

चिंगारी कोई भड़के तो जनमानस मज़ा उठाए

अप्रिय घटना न घटे तो कैसे कोई फोन चलाए

जनतंत्र जो आग बुझाए, जो सबका ख़्याल रखे

उसे हर कोई चाहे, उसे हर कोई जिताए


माना युवा के आगे नहीं चलता ज़ोर किसी का

लोगों का दोष नहीं है ये दोष है और किसी का

भाड़े पर जो लोगों को जोड़े उसे कौन जताए

कि हंगामा ही करना है तो हमें बख़्श दो हाए


हमसे मत पूछो कैसे चलता है आंदोलन सब का

वोटों की बात नहीं है ये किस्सा है हसरत का

जिन्हें काम है काज है करना वो न भीड़ लगाए

जो भीड़ को आग में झोंके उन्हें कौन जिताए


न जाने क्या हो जाता, जाने वो क्या कर जाते 

बंदोबस्त था तो बच गए वरना कितने मर जाते

सोचो तो व्यवस्था के दम पे घर कितने बचाए

‘गर विरोध है करना तो राष्ट्रपति को आप बताए


(आनंद बख़्शी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 10 अक्टूबर 2026 । सिएटल

कहाँ तक दुःख गिनाऊँ

कहाँ तक दुःख गिनाऊँ?

नाना का दुःख मनाऊँ

कि नाकाबंदी का?


मेडल का जश्न मनाऊँ 

कि बँधुआ मज़दूरों को

ढाढ़स मैं दिलाऊँ?


बढ़ते शेयर पे मैं इतराऊँ 

कि महँगाई का रोना गाऊँ?


हर तरफ़ है चिंता 

हर तरफ़ है खुशी 

किसे छोड़ूँ? 

किसे अपनाऊँ?

या लम्बी चादर तान सो जाऊँ?

या बस

दिमाग का दही कर जाऊँ?


राहुल उपाध्याय । 10 अक्टूबर 2026 । सिएटल 


Saturday, October 3, 2026

इतवारी पहेली: 2026/10/04

इतवारी पहेली:


चाहे हो शिवानी, चाहे हो ### 

बात मेरी नहीं, हमेशा अपनी # ##


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 11 अक्टूबर 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 4 अक्टूबर 2026 । सिएटल 


Saturday, September 26, 2026

कल

मैंने कल पहना 

तो फ़िट नहीं आया

कहीं-कहीं 

कुछ-कुछ 

मरा-मरा सा था

बासी सा 

रंग फीके पड़ गए थे

कहीं-कहीं से

सिलाई भी उधड़ गई थी 


कल 

जैसा कल था 

आज क्यों नही है?

मेरी स्मृति से

मेल क्यों नहीं खाता?


राहुल उपाध्याय । 26 अगस्त 2026 । सिएटल 

(https://aboshupadhyaya.substack.com/p/make-believe?r=1z8h44&utm_medium=ios से प्रेरित)


Tuesday, September 22, 2026

चीटिंग

जब बात हमारी हो

तो हम वकील बन जाते हैं 


जब दूसरों की हो

तो जज


—


चीटिंग करना

कोई गुनाह नहीं है

चाहे वो परीक्षा के दौरान हो

या रिश्तों में


वरना

कोई पुलिस कार्यवाही होती

कोई जेल जाता


उल्टा

उन्हें सम्मानित किया जाता है 

चाहे वो

धर्मेंद्र हो

बोनी कपूर हो

या कुकु कोहली


राहुल उपाध्याय । 22 सितम्बर 2026 । सिएटल 



Monday, September 21, 2026

देश का फ्यूचर

संडे को झंडे

मंडे को डंडे

देश के फ्यूचर का

ऐसा है रन-वे


क्रिकेट देखो

नेटफ़्लिक्स देखो

समय बचे तो

हर-हर गंगे


दिये जलाओ 

भजन भी गाओ

ज़ोर-ज़ोर से बजाओ

मंदिरों में घंटे


पढ़ना-लिखना 

गँवारो का काम है

तुम तो जुटाओ

दो-चार गुंडे 


हमसे तो कुछ 

होता नहीं है

सब कुछ करेगा 

तुकाराम मुंडे


सब कुछ तो बढ़िया 

चल ही रहा है 

लेने हमें क्यूँ 

बार-बार पंगे


नौकरी तो नहीं 

मिलेगी लेकिन 

ईश्वर तो मिलेंगे 

अगर जो ढूँढें


राहुल उपाध्याय । 21 सितम्बर 2026 । सिएटल 





Sunday, September 20, 2026

चाँद

आज रात चाँद सीटी बजाता मिला

गली के उस मोड़ पर

जहाँ मेरा जाना मना था

पता चला वह भी उसे देख रही थी 

खिड़कियों से इशारे कर रही थी 

मैं तो जल-भुन के राख हो गया 

सुना कि उसने रात भर खिड़की भी नहीं बंद की


इश्क़ की दीवानगी 

मेरी जानिब होती

तो कुछ और ही बात होती 


राहुल उपाध्याय । 20 सितम्बर 2026 । सिएटल 


Saturday, September 19, 2026

कन्या सोच, सोच, सोच

काहे ज़िद कर रही 

काहे को पढ़ रही 

करके घर के काम 

कन्या सोच, सोच, सोच

कन्या सोच, सोच, सोच


ये जग सारा 

दिखता प्यारा

देता खूब निचोड़ 

कन्या सोच, सोच, सोच

कन्या सोच, सोच, सोच


लगा के हल्दी 

कर ना गलती 

बचा तू अपना नाम 

कन्या सोच, सोच, सोच

कन्या सोच, सोच, सोच


तेरा घर नहीं 

तेरा दर नहीं 

बस हैं तेरे काम 

कन्या सोच, सोच, सोच

कन्या सोच, सोच, सोच


कहाँ तू जाएगी 

कहाँ बच पाएगी 

हर कोई करे शिकार 

कन्या सोच, सोच, सोच

कन्या सोच, सोच, सोच


राहुल उपाध्याय । 19 सितंबर 2026 । सिएटल 



Thursday, September 17, 2026

भिखारी

हम कब तब भिखारी बने रहेंगे?


एक तरफ़ तो हम 

पूरे ज़ोर-शोर से

दान देने को लालायित रहते हैं 


यहाँ इस मंदिर को इतना दिया

उस ग़रीब की इतनी मदद की

उस कोष में इतना डाला

केयर फंड में इतना


जब टैक्स 

देने की बारी आती है

तो भिखारी सी हालत हो जाती है 


करोड़ कमाया 

चालीस लाख सरकार ले गई 

साठ लाख से क्या होगा?


महँगे से महँगा

फ़ोन हाथ में है 

बेटा आइस क्रीम खानी है?

शौक़ से खाओ

स्पाइडर मैन देखनी है 

ज़रूर देखना 

पॉपकॉर्न भी ले लेना

कोकाकोला मत भूलना


सरकार 

इन सब पर हिस्सा माँगे

तो एक कौड़ी भी ज़्यादा लगती है 


राहुल उपाध्याय । 16 सितम्बर 2026 । सिएटल 




Sunday, September 13, 2026

चाँदनी

चाँदनी रात भर क्यों लुभाती रही  

गीत प्रेम के मुझको सुनाती रही

 

राज़ की बात कोई मैं करता नहीं 

राज़ अपने वो मुझको बताती रही 


कह दिया था जिसे लौट जा बेवफ़ा

आके चरणों में वो शीश नवाती रही


जानता मैं नहीं क्या है मन में उधर 

रह-रह के यही बात सताती रही 


क्या करुँ, क्या नहीं, सोचता रह गया 

प्यार में शक़ की बू क्यों आती रही 


राहुल उपाध्याय । 13 सितम्बर 2026 । सिएटल 




इतवारी पहेली: 2026/09/13

इतवारी पहेली:


भगवान के भक्त #^# # हैं

रोज़ बिकते रोली और #^## हैं


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 20 सितम्बर 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 13 सितम्बर 2026 । सिएटल 


Re: इतवारी पहेली: 2026/09/06

Uploaded Image


On Sun, Sep 6, 2026 at 1:54 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


नीम करौली बाबा के पास सिर्फ़ #%## था

कहते हैं उन बाबाजी में फिर भी न ## ## था


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 13 सितम्बर 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 6 सितम्बर 2026 । सिएटल 


Thursday, September 10, 2026

कभी पेरिस

कभी पेरिस 

तो कभी सबरीमाला में 

हम बदनाम होते हैं 

धर्म के नाम पर 

क्यों ऐसे काम होते हैं


कभी चूड़ी 

कभी बिंदी 

कभी सिन्दूर 

मल दिया जाता है 

क्या हम 

किसी की जागीर हैं 

जो हम पे झंडे 

गाड़ दिए जाते हैं


वे चौक पे 

चौपाल करने जाते हैं 

हम क्यों 

चौका-बर्तन करने के लिए 

छोड़ दिए जाते हैं


वे खाते हैं पहले 

सोते हैं पहले 

जगते हैं बाद में 

हम क्यों हमेशा 

पीछे रह जाते हैं


राहुल उपाध्याय । 10 सितम्बर 2026 । सिएटल