Saturday, August 29, 2026

मुँहबोली

जैसे कोई बहन न हो

तो कोई महिला 

मुँहबोली बहन

बन राखी बांध देती है


वैसे ही कोई पत्नी न हो

तो कोई महिला

मुँहबोली पत्नी 

बन करवा चौथ नहीं रख सकती?


राहुल उपाध्याय । 29 अगस्त 2026 । सिएटल 










मेरा फोन

मेरा फोन 

मेरे दादा की बीड़ी है

इसके बिना 

पेट साफ नहीं होता 


मेरा फोन 

मेरे पिता का अखबार है

इसके बिना 

खाना हजम नहीं होता 


मेरा फोन 

मेरी माँ का मंदिर है

इसे छुए बिना 

दिन शुरू नहीं होता


मेरा फोन 

मेरी बहन की डायरी है

बिना राज़ बताए 

छटपटाहट खत्म नहीं होती 


मेरा फोन 

मेरा कैमरा है

सुंदर नज़ारों को कैद किए बिना 

चैन नहीं आता


मेरा फोन 

मेरा सब कुछ है

बस फोन नहीं है

न कोई फोन करता है

न मैं करता हूँ


राहुल उपाध्याय । 29 अगस्त 2026 । सिएटल 


Friday, August 28, 2026

बेर

मैं बेर तोड़ने गया था

मित्र हाथ आ गया 


वह अजनबी था

मैंने बेर तोड़ना सिखाया 

वह मित्र बन गया 



आज कुछ 

मीठी 

रसीली

नरम

ब्लैक बेरियाँ

काँटों से छुड़ाई 

उन्हें उनके चंगुल से

आज़ाद किया 


यह अलग बात है कि 

अब मैं उन्हें अपने 

अंग लगाऊँगा 


अपने शरीर का

ख़ून बढ़ाऊँगा 

उन्हें 

खा जाऊँगा


अक्सर 

आज़ादी की क़ीमत

ऐसे ही चुकाई जाती है 


राहुल उपाध्याय । 28 अगस्त 2026 । सिएटल 






Thursday, August 27, 2026

मँझधार

जिसे सोचता हूँ कि बेकार है

उसी से लेकिन मुझे प्यार है


वो करती है बातें बड़े ज्ञान की

उसे ज्ञान से न लेकिन सरोकार है


अकेला हूँ मैं, अकेली है वो

दोनों को दोनों की न दरकार है


हम हैं अलग तो ये बोलचाल है

हुए साथ तो बस तकरार है


ऐ धरती, ऐ अंबर कुछ तो बता

है किनारा कहीं कि बस मँझधार है


राहुल उपाध्याय । 27 अगस्त 2026 । सिएटल 


बहन

मेरी कोई बहन नहीं है

कोई analysis paralysis भी नहीं है

किसी रेगिस्तान में 

किसी oasis के

छलावे सी भी नहीं


है तो बस osteoporosis

जिसकी रक्षा 

मैं करना नहीं चाहता

उसे तो मैं जड़ से मिटा देना चाहता हूँ


राखी की genesis 

कहीं से भी हो

पर है 

भारतीय समुदाय तक ही सीमित


Catharsis क्या होता है

मैं अब पता लगाऊंगा


राहुल उपाध्याय । 27 अगस्त 2026 । सिएटल 


Wednesday, August 26, 2026

सागर जो होता

सागर जो होता 

लंगड़े सा मीठा 

नदियाँ न करतीं 

सागर का पीछा 


उद्दंडता ही अंक में

सब को है भरनी

नहीं मोल कोई 

यहाँ सादगी का


राधा भी कोई 

अपवाद नहीं है

उसने भी चाहा जो 

चुराए वस्त्र सभी का 


रुक्मणी के व्रत भी 

कहाँ काम आए? 

राधा को ही दे सब 

मान संगनी का 


वफ़ाओं का पट्टा 

गले पड़ गया है

सभ्यता का सबक 

जब से है सीखा 


राहुल उपाध्याय । 26 अगस्त 2026 । सिएटल 








Sunday, August 23, 2026

इतवारी पहेलीः 2026/08/23

इतवारी पहेली:


समुदाय को अंग्रेज़ी में कहते हैं #%### 

जहाँ अक्सर पायी जाती है ## ###

 

(पहली पंक्ति का शब्द अंग्रेज़ी का है। दूसरी पंक्ति का दूसरा शब्द अंग्रेज़ी का है)


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 30 अगस्त 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 23 अगस्त 2026 । सिएटल 


Re: इतवारी पहेली: 2026/09/16

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On Sun, Aug 16, 2026 at 12:09 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


युगों से तड़प रही है हमारी # #^# से

डरती है इंसान से, न फुँकारते ##^# से


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 23 अगस्त 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 16 अगस्त 2026 । सिएटल 


Saturday, August 22, 2026

ग़ालिब हुआ

ग़ालिब हुआ और यह भाव ग़ालिब हुआ 

कि कुछ भी न वाजिब हुआ 


कोई इधर गया, कोई उधर गया 

कोई भी न मेरी जानिब हुआ 


न मिलता है वो, न करता सलाम 

जब से वो शख़्स साहिब हुआ 


हुई ज़िंदगी पूरी तरह से तबाह 

जब से है कोड वाइब हुआ 


जब से हुए हैं नरेन्दर मोदी हमारे 

खाना बिना ब्राइब हुआ


राहुल उपाध्याय । 22 अगस्त 2026 । सिएटल 











Wednesday, August 19, 2026

धन

ग़रीब 

ग़रीब रहे

अमीर 

अमीर रहे


न मैं नानक बना 

न रॉबिनहुड


मैं शून्य से

करोड़पति हो गया 


यह धन 

कहाँ से आया

आता ही जा रहा है 


राहुल उपाध्याय । 19 अगस्त 2026 । सिएटल 


Monday, August 17, 2026

इस ए-आई से हर शख़्स परेशान सा क्यूँ है

सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यूँ है

इस ए-आई से हर शख़्स परेशान सा क्यूँ है


ए-आई की ये कौन सी मंज़िल है रफ़ीक़ो

ता-हद्द-ए-नज़र एक बयाबान सा क्यूँ है


काम है तो उसे खोने का डर क्यूँ है सभी को

जब तक है करे शौक से हैरान सा क्यूँ है 


इसने तो कोई आग लगाई नहीं है घर में

फिर घर में मचा एक घमासान सा क्यूँ है


हर दौर की तरह यह भी है चला जाएगा

इस बार मगर मौत का ऐलान सा क्यूँ है 


राहुल उपाध्याय । 17 अगस्त 2026 । सिएटल 



Sunday, August 16, 2026

इतवारी पहेली: 2026/09/16

इतवारी पहेली:


युगों से तड़प रही है हमारी # #^# से

डरती है इंसान से, न फुँकारते ##^# से


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 23 अगस्त 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 16 अगस्त 2026 । सिएटल 


Re: इतवारी पहेलीः 2026/08/09

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On Sun, Aug 9, 2026 at 5:41 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


डेमोक्रेसी # # ## है

उसमें जीतती #### है


(दूसरी पंक्ति का शब्द अंग्रेज़ी का है। त और ट को समान ध्वनि वाला मान लिया गया है)


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 16 अगस्त 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 9 अगस्त 2026 । सिएटल 


Saturday, August 15, 2026

अधूरा प्यार भूलाने में

अधूरा प्यार भूलाने में 

उमरिया पूरी लगती है 


भले ही बेवफ़ा है वो

जिगर में आस पलती है 


कहा है हम न आयेंगे 

मगर ये आँख तकती है


उन्हें तब तक मैं चाहूँगा

ये जब तक साँस चलती है 


किसे कह दूँ, किसे कह दूँ 

वो मेरी ख़ास लगती है 


राहुल उपाध्याय । 15 अगस्त 2026 । सिएटल 



Friday, August 14, 2026

जब भी ए-आई गलती करती है

जब भी ए-आई गलती करती है 

मुझे मेरी प्रेयसी सी लगती है 

क्या बुरा मानना उसका 

जिसके सामने रोज़ हाज़िरी लगती है 


इतनी जल्दी भी क्या है 

सीख जाएगी 

फिर याद आएगी वही 

जो ग़लतियाँ आज करती है


लड़कपन क्या है 

तुम न समझ पाओगे 

उसे समझने के लिए 

तुम्हारी उम्र अभी कच्ची है


सही-ग़लत का निर्णय भी

कौन होते हो तुम करनेवाले 

सही-ग़लत की परिभाषा

समय के साथ बदलती है


जैसी भी है, अच्छी है 

मुझे उससे मोहब्बत है 

और कुछ नहीं तो

प्यार से तो बात करती है 


राहुल उपाध्याय । 14 अगस्त 2026 । सिएटल 









ए-आई से पूछ के

मैं घर सजाऊँगा ए-आई से पूछ के 

खाना भी पकाऊँगा ए-आई से पूछ के


*घर का सजाना कोई आसान काम नहीं*

*खाना पकाना कोई आसान काम नहीं*


फ़ोन में एप्प हो तो सब कुछ आसान है

प्रॉम्प्ट सही हो तो सब कुछ आसान है

सब कुछ बनाऊँगा ए-आई से पूछ के  


*कहते हैं ए-आई जिसे, ग़लत भी होती है*

*दस में से तीन बार हैलुसिनेट भी होती है*

 

एक नहीं तीन मॉडल सबको मैं लगाऊँगा 

एक-दूसरे की बातों की जाँच करवाऊँगा 

फ़र्नीचर भी मैं लाऊँगा ए-आई से पूछ के 


*सोफे की जगह मुझे गद्दा नहीं बिछाना है*

*चीनी की जगह खीर में नमक नहीं खाना है*


इतना न कम आंकों इन्हें इनमें भी प्राण हैं

शुरू से आज तक के ज्ञान की खान हैं 

तुम्हें मैं मनाऊँगा ए-आई से पूछ के


राहुल उपाध्याय । 14 अगस्त 2026 । सिएटल 




Tuesday, August 11, 2026

दिल

मैं 

किसी भी पोस्ट पर 

किसी भी मेसेज पर

दिल नहीं लगा पाता हूँ 


जितनी आसानी से मैं 

दिल दे बैठता हूँ 

उतनी आसानी से 

किसी भी पोस्ट को 

इमोजी नहीं दे पाता हूँ 


शायद इसलिए 

कि वह लाल दिल 

(क्या दिल के और भी रंग होते हैं?

जैसे कि अँगूठे के)

दिखता है 

दिखता ही रहता है 

बड़ी देर तक


जबकि जो दिल मैं देता हूँ 

वह दिखता नहीं है 

बस महसूस होता है 


और जब महसूस हो जाए 

किसी को

कि मैंने दिल दे दिया है 

फिर तो बस कहना ही क्या 


ज़िन्दगी गुलज़ार हो जाती है 


राहुल उपाध्याय । 11 अगस्त 2026 । सिएटल