Saturday, May 2, 2026

इतवारी पहली 2026/05/03

इतवारी पहेली:


हर चीज आती है काम कभी # ##

आंख और कान ही नहीं बल्कि ## #


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 10 मई 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 3 मई  2026 । सिएटल 


Re: इतवारी पहेली: 2026/04/26

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On Sun, Apr 26, 2026 at 12:27 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


प्रॉब्लम मेजर हो # ## 

हल कर देती है ### 

(पहली पंक्ति का दूसरा शब्द अंग्रेज़ी का है)


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 3 मई 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 26 अप्रैल 2026 । सिएटल 


साँसों की माला

सांसों की माला

धड़कन की सरगम 

टूट गई तो चल दिए

कहाँ गए, कौन गया

वेद-पुराण न कुछ कह सके


चांद भी होगा, तारे भी होंगे

लेकिन दोबारा हम ना मिलेंगे

शरीर नहीं तो कुछ भी नहीं है

स्थूल ही तो सूक्ष्म धरे है


जीवन से कोई शिकवा नहीं है

जीवन से ही तो हम-तुम मिले हैं

ये बगिया, ये उपवन हर सू खिले हैं

जहां भी जाऊं, जलवे हैं इसके

इससे कहाँ कुछ मेरे गिले हैं


जीवन जो है वो ठहरता नहीं है

जो आया है वो सदा रहता नहीं है

नया पुराना होता है आखिर 

नया सदा नया रहता नहीं है

ऐसा है क्या जो हम न समझे 

कि कोई गया तो बस रोने लगे


बुझता है दीपक

जलता है दीपक

लौ को चाहिए 

कोई तो ईंधन

आत्मा से रिश्ते

आत्मा से बंधन 

बनते नहीं हैं

आत्मीय रिश्ते

आत्मीय जन ही 

लौ के हैं ईंधन


राहुल उपाध्याय । 2 मई 2026 । सिएटल 











Tuesday, April 28, 2026

यह प्रेम नहीं तो क्या है?

शबरी के बेर की तरह

पहले मैं मूवी देखता हूँ

बाद में उसे दिखाता हूँ

यह प्रेम नहीं तो क्या है? 


जब मैं नहीं मिलता हूँ 

वह रो देती है

यह प्रेम नहीं तो क्या है?


जब मैं पहाड़ पर चढ़ जाता हूँ, 

वह नाराज़ होती है

कुछ भी ख्याल नहीं रखते हो अपना

कुछ हो गया तो? 

यह प्रेम नहीं तो क्या है?


जब मैं कहता हूँ चलो

वह चल पड़ती है

यह प्रेम नहीं तो क्या है? 


राहुल उपाध्याय । 28 अप्रैल 2026 । सिएटल 

Monday, April 27, 2026

मैं आया इधर से, वो गए उधर से

मैं आया इधर से, वो गए उधर से 

मिलना भी चाहते तो कैसे मिलते? 


तन्हा-तन्हा कहाँ रहता है कोई

पूर्वाग्रह भी तो साथ रहते हैं सबके


लम्हों की कीमत न समझा ये दिल 

सदा सेफ़ खेला कल के डर से 


न गाड़ी की, न आए वो पैदल

घर पर रहे, न निकले वो घर से


न पूछा, न पोंछे, आंसू के धारे 

नैन बिचारे बरसे तो बरसे 


राहुल उपाध्याय । 27 अप्रैल 2026 । सिएटल 

विग

वह विग लगाता है

यह मुझे पता नहीं था

उसके मित्रों ने मुझे बताया है


हमारी ख़ामियाँ-ख़ूबियाँ 

सब मित्रों को पता होती हैं

और वो लोगों को बताने से 

खुद को रोक नहीं पाते हैं


अच्छा ही है

हम क्यूं एक आयामी बन कर रहे


हमारे कई पहलू हैं

उनसे सबको परिचित होना चाहिए


राहुल उपाध्याय ।  27 अप्रैल 2026 । सिएटल



Sunday, April 26, 2026

इतवारी पहेली: 2026/04/26

इतवारी पहेली:


प्रॉब्लम मेजर हो # ## 

हल कर देती है ### 

(पहली पंक्ति का दूसरा शब्द अंग्रेज़ी का है)


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 3 मई 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 26 अप्रैल 2026 । सिएटल 


Re: इतवारी पहेली: 2026/4/19

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On Sun, Apr 19, 2026 at 2:48 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


जब भरत लौट रहे थे अयोध्या सर पर ### ##

सारे रास्ते कोई था खड़ा इधर, कोई था ## ###


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 26 अप्रैल 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 19 अप्रैल 2026 । सिएटल 


Friday, April 24, 2026

पूर्वाग्रह

मेरा अपना 

सांप का 

कोई अनुभव नहीं है


मैं पूर्वाग्रह से ग्रस्त हूँ 

और सकुशल हूँ


राहुल उपाध्याय । 24 अप्रैल 2026 । विलमिंगटन, डेलावेयर

Monday, April 20, 2026

हैं रंगीन सभी


हैं रंगीन सभी, कोई रंगहीन नहीं

नवजात शिशु होता गमगीन नहीं


भूख-प्यास लगे शिशु रोता है

किंतु होता वो गमगीन नहीं 


ये प्यार-वफा, शिकवा-शिकवे

हैं बेबुनियाद, कोई जमीन नहीं 


अभ्यास करो, अरदास नहीं

अरदास से चलती मशीन नहीं


हो पेरिस, लंदन, या सैलाना

कौन सी जगह जो हसीन नहीं


राहुल उपाध्याय । 20 अप्रैल 2026 । सिएटल 











Saturday, April 18, 2026

इतवारी पहेली: 2026/4/19

इतवारी पहेली:


जब भरत लौट रहे थे अयोध्या सर पर ### ##

सारे रास्ते कोई था खड़ा इधर, कोई था ## ###


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 26 अप्रैल 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 19 अप्रैल 2026 । सिएटल 


Re: इतवारी पहेली: 2026/04/11

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On Sun, Apr 12, 2026 at 1:24 AM Rahul Upadhyaya <kavishavi@gmail.com> wrote:

इतवारी पहेली:


शादी के लिए क्या चाहिए, #### # कुछ और 

शर्मा लाया पगड़ी, #%# ## कुछ और


इन दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द सुनने में एक जैसे ही लगते हैं। लेकिन जोड़-तोड़ कर लिखने में अर्थ बदल जाते हैं। हर # एक अक्षर है। हर % आधा अक्षर। हर ^ अक्षर के ऊपर वाली बिंदी है या चंद्रबिंदु। जैसे कि मंगल —> #^## या चाँद—> #^#)


जैसे कि:


हे हनुमान, राम, जानकी

रक्षा करो मेरी जान की


ऐसे कई और उदाहरण/पहेलियाँ हैं। जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं। 


Https://tinyurl.com/RahulPaheliya


आज की पहेली का हल आप मुझे भेज सकते हैं। या यहाँ लिख सकते हैं। 

सही उत्तर न आने पर मैं अगले रविवार - 12 अप्रैल 2026 को - उत्तर बता दूँगा। 


राहुल उपाध्याय । 5 अप्रैल 2026 । सिएटल 


Friday, April 17, 2026

एक नीला आसमान

एक नीला आसमान 

मेरे भीतर भी है

चांद-सितारे ही नहीं 

सूरज भी है


यह धरती मेरी 

ब्रह्मांड मेरा


इन सबसे परे 

जिसे छू न सको 

वहीं तो अस्तित्व है मेरा

वही तो व्यक्तित्व है मेरा


राहुल उपाध्याय । 17 अप्रैल 2026 । सिएटल





Thursday, April 16, 2026

मुझे मिलना है तुमसे

मुझे मिलना है तुमसे

मिलना है तुमसे 

पर अब कहां फिर मिल सकूंगी


तुम किसी और के हो के भी 

न किसी और के हो

कभी-कभी तो लगता है कि 

नहीं इस दौर के हो


मैं हूं राधा 

और तुम किशन हो मेरे

सात जन्मों का नहीं

जन्मों-जन्मांतर का है साथ हमारा 

बांधेंगे हमें क्या सात वो फेरे


जहाँ तुम रहोगे

वहाँ मैं रहूँगी 


स्थूल काया का 

कोई भरोसा नहीं 

नौकरी करेगी

घर संभालेगी

इधर-उधर भटका करेगी


जहाँ तुम रहोगे

वहाँ मैं रहूँगी


मुझे मिलना है तुमसे

मिलना है तुमसे 

पर अब कहां फिर मिल सकूंगी


राहुल उपाध्याय । 16 अप्रैल 2026 । सिएटल 





वजूद

तुम्हारी खुशबू से मेरा घर महक रहा है

यह मेरा-तुम्हारा ही मुझे बस खटक रहा है


तुम आए तो दिल को सुकून मिला

बहारों को जैसे ‘समन’ मिला

खिले फूल, मुस्कुराई फिजा

हाथों को नहीं तो क्या 

सांसों को तो तुम्हारा वजूद मिला


राहुल उपाध्याय । 16 अप्रैल 2026 । सिएटल 

Tuesday, April 14, 2026

प्रतिमा

कल एक प्रतिमा लगी 

जहां पहले से एक प्रतिमा थी


किसकी थी, कौन था, हमें क्या पता? 

हमने जानने की कोशिश भी नहीं की

करके भी क्या करते? 


जिसकी लगाई 

उसे तो हम जानते हैं

बचपन से पढ़ते आ रहे हैं


इतना जानते हुए भी 

तीन वाक्य से ज्यादा नहीं बोल पाएंगे 

कि उन्होंने अमेरिका में जाकर 

अपने देश का डंका बजाया था

बचपन में भगवान को नहीं मानते थे

फिर परमहंस के चेले बन गए 

और दुनिया भर को ज्ञान बांटा 


समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति होने के कारण

हमारा उत्तरदायित्व बनता है कि 

हम कुछ ऐसे काम करते रहें 

जिनसे लोगों को लगे कि 

हमने कुछ बढ़िया किया

चाहे कोई पलट कर 

फिर देखे तक नही


सॉफ्टवेयर का काम बहुत हो गया

अब थोड़ा लोहा-लंगड़ भी संभाल लिया जाए

कुछ दिन बाद देवी-देवता भी 

सड़क पर आ जाएँगे 

तब जाकर हमारा सपना पूरा होगा 


राहुल उपाध्याय । 14 अप्रैल 2026 । सिएटल 




Sunday, April 12, 2026

ख़बर मिली है

खबर मिली है

खबर का क्या किया जाए? 

सबको खबर लग चुकी है

खबर देने का क्या फायदा? 

सब दुख व्यक्त कर ही चुके हैं

पाँच सौ शब्द का निबंध भी लिख चुके हैं

एक अच्छा सा फोटो भी लगा दिया गया है

अब बचा ही क्या मेरे लिए 

कुछ कहने को

कुछ करने को


खबर मिली है

पर कुछ करने को नहीं है

चलो अब सोया जाए


राहुल उपाध्याय । 12 अप्रैल 2026 । सिएटल