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Tuesday, May 25, 2021

वही है इस जग में सबसे सुन्दर

एक उम्र हो गई है 

कोई फ़िल्म देखे

या टीवी खोले


जब ख़ुद का ही जीवन

किसी फ़िल्म से कम न हो

कोई फ़िल्म भला क्या देखे?


आज तीन घंटे उससे बात हुई

और फिर भी न कोई बात हुई 


वो ऐश्वर्या नहीं 

न हूर कोई 

किसी भी लिहाज़े से

न मशहूर कोई 


पर मुझे 

दिल-जान से चाहे

मुझे अपना साथी माने

हर तरह की बात वह समझे

न समझे तो समझने को दिन-रात जागे


जब सब कुछ इतना है उसके अंदर

तो क्यों न हो मुझे वो सबसे प्रियकर 

और उससे सुंदर कोई और क्या होगा

वही है इस जग में सबसे सुन्दर 


राहुल उपाध्याय । 25 मई 2021 । सिएटल 









Sunday, March 14, 2021

 

https://youtu.be/KHz3cUO5EqI


है गिला उन्हें मैं प्यार किया करता हूँ

प्यार मुझे सबसे मैं प्यार किया करता हूँ


ज़माने भर के ग़मों की है एक भीड़ यहाँ

उन्हें तज के मैं प्यार किया करता हूँ


न इसका हूँ, न उसका हूँ, न किसी का हूँ मैं 

हर कली से मैं प्यार किया करता हूँ 


न मिलाई कुंडली, न मुहूर्त निकाला है कभी

सुबह से शाम से मैं प्यार किया करता हूँ


न सोचा, न समझा, न परखा है कभी 

सरफिरा मैं, मैं प्यार किया करता हूँ


राहुल उपाध्याय । 4 फ़रवरी 2021 । सिएटल


Sunday, February 21, 2021

गाड़ी

उसे मेरी लाल टी-शर्ट नहीं पसन्द थी

इसे हाइकिंग शूज़


लगता है

मेरी गाड़ी

फिर से चल पड़ी है 

कोई तो है जिसे

मेरे अच्छे-बुरे की पड़ी है 


इश्क़ 

ऐसा ही होता है


इश्क़ 

ऐसे ही होता है


सब पसन्द आ जाए

तो औपचारिकता लगती है

सब नापसंद हो

तो घर की मुर्ग़ी लगती है


राहुल उपाध्याय । 21 फ़रवरी 2021 । सिएटल 




Thursday, February 18, 2021

क्या प्यार उसे कहते हैं

क्या प्यार उसे कहते हैं

जिसमें 

जब उसे देखूँ 

वह कहे शृंगार देखो 

जब शृंगार देखूँ 

कहे मुझे देखो


क्या प्यार उसे कहते हैं

जिसमें 

जब वो घर जाए

उदास हो जाए

बाय कहते वक़्त 

आँख भर आए


क्या प्यार उसे कहते हैं

जिसमें 

मैं एक माँगूँ 

वह दस भेजे

सेल्फ़ी में

जन्नत का सुख भेजे


क्या प्यार उसे कहते हैं

जिसमें 

लोक-लाज को 

ध्यान में रखकर 

वह लोक-लाज 

सब तज बैठे


क्या प्यार उसे कहते हैं

जिसमें 

वो अलार्म से नहीं

मेरी कॉल से उठे

ब्रश करते वक़्त भी

न फ़ोन रखे 


क्या प्यार उसे कहते हैं

जिसे 

समझदार 

ना समझे

और नासमझ 

सब समझे


राहुल उपाध्याय । 18 फ़रवरी 2021 । सिएटल 



Thursday, February 11, 2021

तू जान मेरी

तू वायरस नहीं 

कि तुझसे हाथ धो लूँ 

तू मास्क नहीं 

कि तुझे उतार फेंकूँ 

तू मेरी धड़कन है

तुझे सीने से लगा रखा है 


तू वैक्सीन नहीं 

कि सबमें बाँट दूँ

तू कोरोना नहीं 

कि मुख मोड़ लूँ 

तू ख़ुशबू है 

तुझे नस-नस में बसा रखा है


तू साल नहीं 

कि कैलेंडर से ढाँप दूँ 

तू खबर नहीं 

कि पुरानी करार दूँ

तू जान मेरी

तुने मुझे बचा रखा है


राहुल उपाध्याय । 11 फ़रवरी 2021 । सिएटल 


Thursday, January 28, 2021

प्यार की रंगत

प्यार की रंगत में है 

सबका हाथ 

जो रोके उनका भी 

और जो देते हैं साथ 


प्यार के दुश्मन न हो चारों तरफ़ 

तो क्या छुप के मिलना 

और क्या ही करना 

इशारों में बात


ये सजना-संवरना 

ये मिलना-बिछड़ना 

इन सब में हैं शामिल 

हज़ारों के हाथ


न होता स्कूल

न होता दफ़्तर 

तो न तकते बेसब्री से

घड़ी के हाथ


तेरे मेरे मिलने के 

मक़ाम कई हैं 

जहाँ हो मना वहाँ की 

अलग ही है बात 


मिल के न मिलना 

महफ़िल में तुम से 

और शायरी में कहना

सारी बात


राहुल उपाध्याय । 28 जनवरी 2021 । सिएटल 



Wednesday, January 27, 2021

मोती से दाँतों की हसीं हँसी

साँसें तो लेता हूँ 

लेकिन

साँस में साँस तभी आती है

जब तुम्हारा फ़ोन आता है


जाता हूँ बाज़ार 

देखता हूँ रंग बिखरे चारों ओर

लेकिन असली नज़ारा नज़र 

वीडियो कॉल में

तुम्हारे मोती से दाँतों की 

हसीं हँसी में आता है 


होती है शाम, होती है सहर

रातें भी आतीं-जातीं ही होंगी 

समय के सारे विभाजन 

गड्डमड्ड हो गए हैं

सच कहूँ तो हमारी-तुम्हारी बातों में 

बिचारा समय पीस ही जाता है 


किस-किस का नाम गिनाऊँ?

किस-किस को धन्यवाद कहूँ?

आईफ़ोन को कि व्हाट्सेप को?

इंटरनेट को कि ग्राहम बेल को?

सोम को, मंगल को, कि सातों दिनों को?

कि उसे

जिसने ख़ुद से मुझे इतना दूर किया

कि तुम्हारे क़रीब आ गया?


राहुल उपाध्याय । 27 जनवरी 2021 । सिएटल 






Saturday, January 23, 2021

छ: घण्टे

बात किए

छ: घण्टे गुज़र जाए

और बात न हो

पिंग का जवाब न मिले

तो ग़ुस्सा करती है

फिर उदास होती है

फिर चिन्ता करती है


फिर ख़ुद ही फ़ोन कर देती है

‘सब ठीक तो है?’


और सब ठीक हो तो

फिर ख़ैर नहीं 


राहुल उपाध्याय । 23 जनवरी 2021 । सिएटल 

Thursday, January 21, 2021

दिल ❤️ ♥️ 💜💓💕💗💘❣️🥰💟💘💏

इतनी धौंस जमाती है

कि किसी से बात करूँ 

तो रूठ जाती है 


झट से बुरा मान जाती है

बात-बात पे चिढ़ाती है


एक मिनट चैन नहीं लेती है

हर सवाल का जवाब 

तुरंत चाहती है

न मिले तो ?? की बौछार

कर जाती है


सब ग़ुस्सा हवा हो जाता है

जब दर्जनों सेल्फ़ी 

फ़िल्टर और ईमोजी 

संग आ जातीं हैं


अब मेरे 

ईमोजी के 

की-बोर्ड में

टॉप पर

दिल ही दिल है


लाल दिल

गुलाबी दिल

बैंगनी दिल


दिल के ऊपर दिल

दिल के नीचे दिल

दिल के दाएँ दिल

दिल के बाएँ दिल

दिल से निकलता दिल 

दिल में घुसता दिल

तीर से घायल खुशहाल दिल

होंठों से बुलबुले सा

निकलता दिल!


❤️ ♥️ 💜💓💕💗💘❣️🥰💟💘💏


राहुल उपाध्याय । 21 जनवरी 2021 । सिएटल 



Thursday, January 14, 2021

प्रेम का प्रताप

विद्यालय में मिले

वेलेण्टाइन से पहले

कई दिनों तक फिर मिलते रहे


सुन्दर जीवन

हाथ में हाथ लिए

नीलकमल सा और मनमोहक हुआ


सेठों से ज़्यादा अमीर हुए


प्यास बुझी या बढ़ी?

यार भी रखते हैं हिसाब कभी?

रच रहे हैं इतिहास अभी


कल की कोई चिंता नहीं 

रतजगे भी अब भाते हैं

ताबड़तोड़ स्नेपचैट पे जब बतियाते हैं


है ना प्रेम का यह प्रताप सही? 


राहुल उपाध्याय । 14 जनवरी 2021 । सिएटल 




Wednesday, September 23, 2020

मदमस्त धुन

चाँद वही

सूरज वही

बादल अलग

प्यास वही


तेरी शाम ढले 

मैं आँख मलूँ

तू सोए

मैं क्या ख़ाक जगूँ


तेरी सुबह हो

मेरी शाम आए

तू दर्पण तके

मुझे आराम आए


तू माँग सजाए

मैं ख़्वाब सजाऊँ 

तेरी नस-नस में 

मैं समा जाऊँ 


तुझे थाम लूँ 

तेरी बाँह धरूँ 

हर लम्हा 

तुझे प्यार करूँ 


तू गुनगुनाए

अल्हड़ हँसे 

श्रृंगार रस के

सारे रंग फीके पड़े


मैं लिखूँ जिसे

तू उसे पढ़े

आँख से आँख 

ऐसे लड़े


तेरी साँस चले

तो मेरी साँस चले

सच नहीं पर

सच आज लगे


हम कब मिले

कुछ याद नहीं 

है सात जनम का

यह साथ नहीं 


राहुल उपाध्याय । 23 सितम्बर 2020 । सिएटल 


Tuesday, September 22, 2020

मैं कहीं कवि न बन जाऊँ

मैं कहीं कवि न बन जाऊँ तेरे प्यार में ऐ कविता


तुझे डी-पी के आईने में मैंने बार-बार देखा

तेरे स्टेटस में देखा तो छलकता प्यार देखा

तेरा टेक्स्ट मैंने देखा तो जिगर के पार देखा


तेरा ब्लॉग है सलोना तेरी पोस्ट में कसक है

तेरे वीडियो में है जादू तेरे बोल में खनक है

तेरी हर अदा मुहब्बत तू यूट्यूब की धनक है


मेरा दिल लुभा रहा है तेरा रूप सादा सादा

ये झुकी-झुकी निगाहें करे प्यार और ज़्यादा 

ये जग ये भाँप लेगा, है यही डर सताता


(हसरत जयपुरी से क्षमायाचना सहित)

राहुल उपाध्याय । 21 सितम्बर 2020 । सिएटल 

धनक = इन्द्रधनुष 

https://youtu.be/_8V8XYB5YsA 


Friday, April 3, 2020

मिटती है हर बीमारी

सुना है इन दिनों तुम बहुत हाथ धो रही हो

चाहे कितनी ही कोशिश कर लो
मुझसे हाथ तुम धो न सकोगी
ख़ुशबू जो मेरी रग-रग में बसी है
किसी भी साबुन से खो न सकोगी
छ: फ़ुट की दूरी रख लो सबसे
खुद को मुझसे दूर कर न सकोगी
द्वार चाहे बन्द कर लो सारे
मन से मुझे निकाल न सकोगी
तमाम सामान भले उठ जाए दुकानों से
मुझ पर जो है भरोसा वो उठ न सकेगा
ऑनलाइन डिलिवर करवा लो सब कुछ
पर मुझसा दीवाना मिल ना सकेगा

रूमाल लगाओ
नक़ाब चड़ाओ
दस्ताने पहनो
भाप लो
पर इतना ज़रूर तुम भाँप लो
कि
महामारी आज नहीं तो कल गुज़र ही जाएगी
लेकिन दास्ताँ हमारी सदियों तक गाई जाएगी

कोशिश कर के देख ले 
दुनिया की दवा सारी
दिल की लगी नहीं मिटती है
मिटती है हर बीमारी

राहुल उपाध्याय । 3 अप्रैल 2020 । सिएटल

Thursday, February 14, 2019

तुम मिलोगी यह सोचकर

तुम मिलोगी यह सोचकर
कुछ लम्हें 
तह लगाकर रखे हैं
ताकि सिलसिलेवार तुम्हें सब सुना सकूँ 
कि कैसे छायागीत पर अपना गीत बजा
चाँद थमा
रात रूकी
आसमाँ झुका
महफ़िल जमी
और एक कविता बही ...

उस कविता के शब्द
तो मैं दुनिया को सुपुर्द कर चुका हूँ
लेकिन उनके सही मायने
तुम ही समझोगी
एक ही साँस में 
जब मैं पढ़ूँगा 
और तुम सुनोगी
हर बिन्दु
हर बिन्दी
हर नुक़्ता 
हर द्विअर्थी शब्द
जो कहा वह भी
जो नहीं कहा वह भी
सब समझ जाओगी

क्या तुम अब भी यही सोचती हो
कि हम
एक दूजे के लिए
नहीं है?

तुम मिलोगी यह सोचकर ...

14 फ़रवरी 2019
सिएटल